Akhilesh Yadav on Lucknow lathicharge : लखनऊ में वकीलों के चैंबर पर चले बुलडोजर और लाठीचार्ज पर अखिलेश यादव का बड़ा हमला। हाथ में 'रामचरितमानस' लिए वकील की तस्वीर शेयर कर भाजपा को बताया 'अधर्मी'।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार 17 मई 2026 को नगर निगम द्वारा वजीरगंज/कैसरबाग क्षेत्र में जिला अदालत परिसर के आसपास अवैध वकील चैंबरों पर बुलडोजर कार्रवाई के दौरान भारी बवाल हुआ। वकीलों के विरोध प्रदर्शन पर पुलिस को हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) करना पड़ा, जिसके बाद सियासी तूफान खड़ा हो गया।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस घटना पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तीखा तंज कसा। उन्होंने एक तस्वीर शेयर की, जिसमें एक वकील हाथ में श्रीरामचरितमानस थामे खड़ा है और पुलिसकर्मी लाठियां ताने हुए दिख रहे हैं।
अखिलेश ने लिखा, 'श्रीरामचरितमानस’ हमारी सौहार्दपूर्ण संस्कृति का संविधान है और मानवीय-व्यावहारिक मर्यादा का आचार संहिता कोश। उप्र भाजपा सरकार ने जिस तरह लखनऊ में ‘श्रीरामचरितमानस’ का अपमान-तिरस्कार किया है, वो किसी भी तरह क्षमा करने योग्य नहीं है। भाजपाइयों का सिर्फ़ एक धर्म है और वो है पैसा। देश ‘अधर्मी भाजपा’ को अब हमेशा के लिए हटा देगा।' अखिलेश ने पहले भी घटना की निंदा करते हुए इसे ‘अन्याय’ बताया था और घायल वकीलों के मुफ्त इलाज की मांग की थी।
नगर निगम ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय (लखनऊ बेंच) के आदेश का पालन करते हुए अवैध अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। अधिकारियों के अनुसार, जिला अदालत, पुराने हाईकोर्ट परिसर, कलेक्टरेट और आसपास की सड़क, फुटपाथ तथा नालियों पर कब्जा करने वाले लगभग 240 चैंबर और दुकानें ध्वस्त की गईं। कई चैंबर 20-30 साल पुराने बताए जा रहे हैं।
वकीलों ने कार्रवाई का विरोध किया। कुछ वकीलों ने बुलडोजर के सामने धरना दिया, पथराव किया और पुलिसकर्मियों से झड़प की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया। पुलिस का कहना है कि 'कुछ उपद्रवी तत्वों' ने व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की, जिसके बाद आवश्यक बल प्रयोग किया गया।
उच्च न्यायालय ने PIL के आधार पर सख्त टिप्पणी की थी कि अवैध चैंबरों और दुकानों से आम जनता को परेशानी हो रही है। कोर्ट ने नगर निगम को पुलिस और प्रशासन की मदद से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। मार्च-अप्रैल 2026 में दिए गए आदेशों के बाद यह कार्रवाई हुई।
वकीलों का आरोप है कि कई वैध चैंबर भी तोड़े गए और उन्हें उचित नोटिस नहीं दिया गया। लखनऊ बार एसोसिएशन ने सोमवार-मंगलवार को कोर्ट कार्य का बहिष्कार करने का फैसला लिया। कई वकीलों ने दर्द जताते हुए कहा कि उनके वर्षों के परिश्रम से बने चैंबर एक झटके में ढहा दिए गए। पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त बल तैनात था और कार्रवाई शांतिपूर्वक पूरी की गई।