लखनऊ

क्या हुक्का बार पर लगेगी रोक? हाईकोर्ट ने कहा- चलाना मौलिक अधिकार नहीं, राज्य सरकार ले फैसला

Allahabad High Court News : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हुक्का बार संचालकों को बड़ा झटका देते हुए कहा कि हुक्का बार चलाना मौलिक अधिकार नहीं है। जनस्वास्थ्य के हित में राज्य सरकार इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा सकती है।
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May 28, 2026
Allahabad Highcourt
इलाहाबाद ने हुक्का बार को नहीं बताया मौलिक अधिकार का हिस्सा, PC- Wikipedia

लखनऊ : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बुधवार को हुक्का बार संचालकों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि हुक्का बार चलाना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत व्यापार और व्यवसाय करने का मौलिक अधिकार नहीं है। जनहित और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए राज्य सरकार ऐसे कारोबार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा सकती है।

जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने एम्पेरियो ग्रैंड प्राइवेट लिमिटेड समेत कई हुक्का बार ऑपरेटरों की याचिकाएं खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ताओं ने प्रशासन द्वारा उनके प्रतिष्ठानों के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई, बंदी और नए लाइसेंस न देने को चुनौती दी थी। कोर्ट ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया।

लोगों की सेहत न हो किसी तरह का खिलवाड़

कोर्ट ने कहा कि हुक्का बार में तंबाकू और निकोटीन का सेवन होता है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। यह गतिविधि ‘रेस एक्स्ट्रा कमर्शियम’ (वाणिज्य से परे) की श्रेणी में आती है, जिसे शराब और जुए की तरह नियंत्रित या प्रतिबंधित किया जा सकता है। बेंच ने जोर दिया कि राज्य को लोगों की सेहत की सुरक्षा के लिए ऐसे कारोबार पर रोक लगाने का पूरा अधिकार है।

कोर्ट ने कोविड-19 महामारी का हवाला भी दिया। उस समय संक्रमण के तेज प्रसार के खतरे को देखते हुए हाईकोर्ट ने पूरे उत्तर प्रदेश में हुक्का बारों पर पूरी रोक लगा दी थी। मौजूदा फैसले में भी उसी भावना को दोहराया गया है।

कोर्ट ने इसे मौलिक अधिकार से जोड़ने से किया इनकार

यह फैसला उन होटल और रेस्टोरेंट मालिकों के लिए बड़ा झटका है जो हुक्का सर्विस को अतिरिक्त आय का साधन मानते थे। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग से अनुमति लेकर वे व्यवसाय चला रहे थे, लेकिन कोर्ट ने इसे मौलिक अधिकार से जोड़ने से इनकार कर दिया।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हुक्का से सामूहिक धूम्रपान के जरिए न सिर्फ निकोटीन, बल्कि कई अन्य हानिकारक रसायन शरीर में जाते हैं। एक सेशन में हुक्का पीना कई सिगरेट पीने के बराबर नुकसान पहुंचा सकता है। युवाओं में इसके बढ़ते चलन को देखते हुए कई राज्य पहले ही सख्ती कर चुके हैं।

यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार को मजबूत आधार देता है। अब प्रशासन बिना किसी कानूनी अड़चन के हुक्का बारों पर कार्रवाई कर सकता है। कोर्ट ने जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए साफ संकेत दिया कि व्यावसायिक स्वतंत्रता सार्वजनिक हित से ऊपर नहीं हो सकती।

Updated on:
28 May 2026 06:46 pm
Published on:
28 May 2026 06:46 pm