लखनऊ

फेरेंदा विधान सभा चुनाव: 40 साल में कोई दोबारा नहीं बना विधायक, दो बार से 2500 से भी कम अंतर से जीत रहा एमएलए

2027 में फेरेंदा से चुनाव लड़ने की घोषणा करने वाले अमर मणि को पहले तो कानून से लड़ना होगा। अगर इसमें वह जीतेंगे तो चुनाव लड़ सकेंगे। लड़े तो फेरेंदा के चुनावी समीकरण ऐसे हैं कि वह उलझ कर रह सकते हैं।
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Sep 01, 2026
Amar mani Tripathi Madhumita Shukla Case convict to fight UP assembly election 2027
मधुमिता शुक्ला (दाएं) हत्याकांड में उम्रकैद पाने के बाद अमर मणि त्रिपाठी का राजनीतिक कॅरियर खत्म हो गया।

लखनऊ के चर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पा चुके पूर्व मंत्री अमर मणि त्रिपाठी ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने महाराजगंज की फेरेंदा सीट से 2027 में ताल ठोंकने की बात कही है। वह अगस्त 2023 में यूपी सरकार की एक योजना का फायदा उठा कर समय से पहले जेल से रिहा हुए हैं। इस लिहाज से वह कानूनन अगस्त 2029 से पहले चुनाव नहीं लड़ सकते हैं, फिर भी उन्होंने ऐसी घोषणा कर दी है। वैसे अगर उनकी राह में कानूनी रोड़ा नहीं होता, तो भी फेरेंदा में उनके लिए जीत की राह आसान नहीं होती। वहां के चुनावी समीकरण और आंकड़े ऐसा ही बयान कर रहे हैं।

फेरेंदा विधान सभा चुनाव परिणाम 2022 : 1246 मतों के अंतर से हुआ जीत-हार का फैसला

दलउम्मीदवारवोट%±%
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)वीरेंद्र चौधरी85,18140.28+3.1
भारतीय जनता पार्टी (BJP)बजरंग बहादुर सिंह83,93539.69+1.33
बहुजन समाज पार्टी (BSP)इशू चौरसिया21,66510.24-7.74
समाजवादी पार्टी (SP)शंख लाल मांझी16,4577.78
इनमें से कोई नहीं (NOTA)इनमें से कोई नहीं1,4840.7-0.31
जीत का अंतर (Majority)1,2460.59-0.59
कुल मतदान (Turnout)211,49060.19+0.55
परिणाम:कांग्रेस (INC) ने भाजपा (BJP) से यह सीट जीती

फेरेंदा विधान सभा चुनाव परिणाम 2017: 2500 से भी कम रहा जीत-हार का अंतर

दलउम्मीदवारवोट%
भारतीय जनता पार्टी (BJP)बजरंग बहादुर सिंह76,31238.36
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)वीरेंद्र चौधरी73,95837.18
बहुजन समाज पार्टी (BSP)बेचन35,76517.98
राष्ट्रीय लोक दल (RLD)विजय सिंह2,7421.38
निषाद पार्टी (NISHAD)राज कुमार निषाद1,9300.97
एआईएमआईएम (AIMIM)रीना1,8780.94
इनमें से कोई नहीं (NOTA)इनमें से कोई नहीं1,9921.01
जीत का अंतर (Majority)2,3541.18
कुल मतदान (Turnout)198,94559.64
परिणाम:भाजपा (BJP) ने सपा (SP) से यह सीट जीतीस्विंग:

फेरेंदा में 2017 और 2022 के विधान सभा चुनाव नतीजों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि कांग्रेस और बीजेपी में कांटे की टक्कर रही है। जीत-हार का अंतर 2500 से भी कम रहा है। 2017 में बीजेपी 2354 मतों से जीती तो 2022 में वह कांग्रेस से महज 1246 मतों से हार गई। दोनों पार्टियों ने दोनों चुनावों में एक ही उम्मीदवार पर भरोसा किया।

2017 और 2022 के फेरेंदा विधान सभा चुनाव नतीजों के आंकड़े साफ बताते हैं कि यहां से भाजपा या कांग्रेस से इतर, किसी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतना आसान नहीं है। इस बात की कोई संभावना नहीं है कि कांग्रेस या भाजपा में से कोई भी अमर मणि पर दांव लगाएगा। उनका अतीत ऐसा हो चुका है कि कोई भी पार्टी उन्हें अपने से दूर ही रखना चाहेगी।

पार्टी का साथ न मिले तो फेरेंदा से निर्दलीय चुनाव जीतना और भी मुश्किल होगा। खास कर वैसे नेता के लिए जो कत्ल के जुर्म में उम्रकैद पा चुका हो और करीब दो दशकों से सार्वजनिक जीवन से दूर हो। 1985 के बाद यहां से कोई निर्दलीय चुनाव नहीं जीता है।

फेरेंदा विधान सभा चुनाव वर्षविधायक का नामराजनीतिक दल
1951गौरी रामभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1967गौरी रामनिर्दलीय
1969प्यारीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1974लक्ष्मी नारायणकम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (CPI)
1977श्याम नारायण तिवारीकम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (CPI)
1980श्याम नारायण तिवारीनिर्दलीय
1985हर्षवर्धन सिंहजनता पार्टी
1989श्याम नारायण तिवारीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1991श्याम नारायण तिवारीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1993चौधरी शिवेंद्र सिंहभारतीय जनता पार्टी (BJP)
1996विनोद मणिकम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) (CPI-M)
2002श्याम नारायण तिवारीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2007बजरंग बहादुर सिंहभारतीय जनता पार्टी (BJP)
2012बजरंग बहादुर सिंहभारतीय जनता पार्टी (BJP)
2015^(उपचुनाव)विनोद मणिसमाजवादी पार्टी (SP)
2017बजरंग बहादुर सिंहभारतीय जनता पार्टी (BJP)
2022वीरेंद्र चौधरीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

जातिगत राजनीति की बात करें तो अब ब्राह्मण नेताओं में भी अमर मणि की पहले वाली हैसियत नहीं बची है। न ही ब्राह्मणों की राजनीति में वह अब फिट बैठते हैं। एक समय था जब अमर मणि ने वीरेंद्र प्रताप साही से टक्कर लेकर पूर्वाञ्चल के कद्दावर ब्राह्मण नेता की हैसियत बना ली थी। वह चार बार विधायक रहे और इतने ही मुख्यमंत्रियों की सरकारों में मंत्री भी रहे। लेकिन, उन्हें सत्ता से बाहर हुए दो दशक से ज्यादा हो गए हैं। इस बीच ज़्यादातर समय वह जेल में ही रहे। 2023 में उनकी रिहाई हुई है। एक बार वह जेल से भी चुनाव जीत चुके हैं। पर इस बात को भी सालों बीत गए। अब न वह दौर रहा और न उनका दबदबा रहा।

Updated on:
01 Sept 2026 07:09 pm
Published on:
01 Sept 2026 07:04 pm