लखनऊ

अमित शाह ने किया फाइनल, योगी मंत्रिमंडल से कई बड़े नामों की होगी छुट्टी, इन सांसदों का भी कटेगा टिकट

अमित शाह ने ये पूरी रिपोर्ट पीएम नरेंद्र मोदी तक भी पहुंचा दी है...
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Jun 10, 2018
Amit Shah decision for CM Yogi Adityanath Cabinet expansion
अमित शाह ने किया फाइनल, योगी मंत्रिमंडल से कई बड़े मंत्रियों की होगी छुट्टी, इन सांसदों का भी कटेगा टिकट

लखनऊ. फूलपुर, गोखरपुर, कैराना और नूरपुर उपचुनाव में मिली हार के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बूथ प्रमुखों और विस्तारकों के जरिए पार्टी की जमीनी हकीकत की जानकारी ली। जिसमें सभी छह प्रान्तों में भाजपा की स्थित कमजोर बताई गई है। मंत्री, जनप्रतिनिधि और सरकारी बाबू जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह ने ये पूरी रिपोर्ट पीएम नरेंद्र मोदी तक भी पहुंचाई है। इसी के चलते अमित शाह इसी महीने लखनऊ आ रहे हैं और दलित-ओबीसी वोटर्स को लुभाने के लिए योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है। जिसमें इस वर्ग के विधायकों को मंत्री बनाने के साथ ही कई मंत्रियों को हटाया भी जाएगा और उन्हें संगठन में काम करने के लिए भेजा जाएगा। कानपुर-बुंदेलखंड से एक मंत्री की योगी कैबिनेट से छुट्टी होना तय हैं तो बुंदेलखंड से दो मंत्री बनाए जा सकते हैं। साथ ही कन्नौज, इटावा, फर्रूखाबाद और मैनुपरी के विधयकों को योगी कैबिनेट में जगह मिल सकती है।

18 लाख दलित बाहुल्य क्षेत्र पर नजर

भाजपा ने कानपुर-बुंदेलखंड की 52 में से 47 सीटों पर कमल खिलाया था। साथ ही 17 जिलों की 11 लोकसभा सीटों में 10 में भगवा बिगेड का कब्जा है। पर निकाय चुनाव में बसपा ने बुंदेलखंड में खोई जमीन फिर से वापस पा ली है और 18 लाख दलित मतदताओं वाले पिछड़े क्षेत्र में भाजपा की स्थित कमजोर हुई है। बुंदेलखंड के सात जिलों में करीब 18 लाख दलित मतदाता हैं, जो 2014 से लेकर 2017 तक भाजपा के साथ रहे। लेकिन उनका विकास नहीं हो सका। साथ ही यहां से कोई भी विधायक को मंत्री भी नहीं बनाया गया। इसी के चलते बंदेलखंड क्षेत्र से तीन विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। जानकारों की मानें तो अगले सप्ताह अमित शाह पहले लखनऊ जाएंगे और सीएम योगी के साथ प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय व संगठन मंत्री सुनील बंसल के साथ बैठक करेंगे। जानकारों का कहना है कि अमित शाह 2019 से पहले योगी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार करवा सकते हैं। वर्तमान में कई मंत्रियों के काम-काज से नाखुश पार्टी अध्यक्ष उन्हें संगठन में भेजकर दलित और ओबीसी समाज के विधायकों को मंत्री बनवाएंगे। कानपुर से दो तो बुंदेलखंड से एक मंत्री है। इनमें से एक मंत्री के हटाए जाने की चर्चा है। साथ ही बुंदेलखंड से दो मंत्री बनाए जाने की बात निकल कर सामने आ रही है। अपना दल के आशीष सिंह को भी योगी कैबिनेट में मंत्री बनाए जाने की चर्चा चल रही है।

वेस्ट यूपी पर फोकस

2014 से बीजेपी के मजबूत गढ़ बने वेस्ट यूपी में एकाएक कैराना और नूरपुर के उपचुनाव में करारी शिकस्त मिलने से पार्टी असहज महसूस कर रही है। वह हर स्तर से हार के कारणों का पता लगाने के साथ कमजोर कड़ी को हटाने की तरफ बढ़ रही है। हाईकमान का मानना है कि जब भी चुनाव होंगे, पहले फेज में वेस्ट यूपी में वोटिंग शुरू होती है। ऐसे में अगर यहां से कमजोर संदेश प्रदेश और देश के भीतर चला गया तो पार्टी को नुकसान पहुंचना तय है। ऐसे में हार के कारणों का पता लगाया जाना जरूरी है। साथ ही इस क्षेत्र के कई विधायकों को योगी मंत्रिमंडल में शामिल कर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की जाएगी। पिछले दिनों कानपुर आए संगठन मंत्री सुनील बंसल ने कार्यकर्ताओं को बताया था कि जनप्रतिनिधियों के कामों से पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह नाराज हैं। जिसके चलते वह जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। इसके अलावा 2019 के लोकसभा चुनाव में 10 मौजूदा सांसदों में से 6 का टिकट कटना लगभग तय है।

सुनील बंसल ने ली हार की टोह

कुछ दिन पहले कानपुर दौरे से पूर्व संगठन मंत्री सुनील बंसल के नेतृत्व में एक टीम ने वेस्ट यूपी का दौरा किया था। टीम ने कैराना सीट के सहारनपुर जिले की दो विधानसभा सीटों गंगोह और नकुड़ पर जाकर हार की वजह पता की। सूत्रों के मुताबिक, बूथ प्रमुखों के साथ ही विस्तारकों ने साफ कर दिया कि गन्ना भुगतान न होना बड़ी वजह रही, जिससे जाट बिरादरी के ज्यादातर किसान नाराज हैं। इसके अलावा नेताओं की आमजन तक पहुंच नहीं हुई और सिर्फ सभा करके भाषण देने तक मंत्री और दूसरे नेता जुटे रहे। यह भी कहा गया कि उनके कहने से जनता के काम नहीं होते फिर वह हमें वोट क्यों दें। टार्गेट के मुताबिक वोटरों को बूथ तक नहीं लाया जा सका। एक विस्तारक ने तो सुनील बंसल से यहां तक कह दिया कि सरकार की एक भी योजना जमीन पर नहीं उतरी। वह सिर्फ सरकारी बाबुओं के कागजों में दौड़ती रही। सुनील बंसल ने ये रिपोर्ट अमित शाह को भेजी है और इसी के बाद उन्होंने लखनऊ आने का कार्यक्रम बनाया।

गुर्जर विधायकों को मिल सकता है मौका

कैराना लोकसभा सीट पर गुर्जर काफी हैं। बीजेपी के गुर्जर प्रत्याशी की ही यहां हार हुई है। माना जा रहा है कि प्रदेश सरकार में गुर्जर प्रतिनिधित्व नहीं होने से वे भी नाराज हैं। ऐसे में योगी मंत्रिमंडल विस्तार में किसी गुर्जर नेता को स्थान मिलना तय माना जा रहा है। बीजेपी के पास वेस्ट में पांच गुर्जर विधायक हैं। इनमें से चार दूसरे दलों से आए हुए हैं। गंगोह से विधायक प्रदीप चौधरी, मीरापुर से अवतार सिंह भड़ाना कांग्रेस से, दादरी से तेजपाल नागर बीएसपी से, नंद किशोर लोनी एसपी से बीजेपी में आए हुए हैं। सिर्फ मेरठ दक्षिण से विधायक सोमेन्द्र तोमर और हाल में एमएलसी बनाए गए अशोक कटारिया संगठन के पुराने नेता हैं। माना जा रहा है कि इन दोनों में से किसी एक को योगी मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है।

Updated on:
10 Jun 2018 11:51 am
Published on:
10 Jun 2018 11:41 am