
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने युवाओं को रिश्तों और शादी को लेकर बड़ी सलाह दी है। उन्होंने कहा कि गर्लफ्रेंड बनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन शादी का वादा किया है तो उसे निभाना भी जरूरी है। युवाओं को पहले अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए, ताकि वे परिवार की जिम्मेदारी उठा सकें। राज्यपाल ने कम उम्र में लड़कियों के मां बनने और फिर उन्हें छोड़ देने पर भी चिंता जताई। वह गुरुवार को महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के सातवें दीक्षांत समारोह में बोल रही थीं।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि किसी के साथ रिश्ता बनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन उसके साथ किए गए वादे को निभाना जरूरी है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि शादी करने से पहले इतनी कमाई जरूर करें कि अपने परिवार की जिम्मेदारी उठा सकें। उन्होंने कहा कि 13-14 साल की उम्र में किसी लड़की को बच्चे की मां बनाकर छोड़ देना सही नहीं है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकारों ने कई कदम उठाए हैं, लेकिन समाज को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के सातवें दीक्षांत समारोह में कुल 2,279 विद्यार्थियों को डिग्री और डिप्लोमा दिए जा रहे हैं। इनमें 20 शोधार्थियों को पीएचडी, 324 विद्यार्थियों को पोस्ट ग्रेजुएशन और 1,612 विद्यार्थियों को ग्रेजुएशन की डिग्री दी जा रही है। इसके अलावा 323 विद्यार्थियों को डिप्लोमा दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में मिनी एक्सपो भी लगाया गया है। इसमें तकनीक, रोबोटिक्स, वैदिक विज्ञान, योग और एनीमेशन से जुड़े प्रोजेक्ट प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
राज्यपाल ने कहा कि आर्थिक परेशानी के कारण कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से जरूरतमंद बच्चों की मदद करने की अपील की। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों को पांच-पांच गांवों से जोड़ा गया है। विश्वविद्यालय इन गांवों में जाकर बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने और उनकी मदद करने का काम करेंगे।
राज्यपाल ने झुग्गी-बस्ती के 450 बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की पहल का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में कई बच्चे आपस में झगड़ते थे, गाली-गलौज करते थे और पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते थे। शिक्षकों और अन्य लोगों की मेहनत से उनके व्यवहार में सुधार आया है। बच्चों को पढ़ाई के साथ दूसरी गतिविधियों में भी शामिल किया जा रहा है। प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीतने वाले बच्चों को टी-शर्ट देकर सम्मानित किया जाता है। इसके लिए करीब 425 टी-शर्ट की व्यवस्था की गई है।
राज्यपाल ने गुजरात में मंत्री और मुख्यमंत्री रहने के दौरान शुरू की गई एक पहल का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि लोगों से मिलने के दौरान होने वाले खर्च को समाज के काम में लगाने का विचार आया था। इसके बाद आंगनवाड़ी केंद्रों में गरीब परिवारों के बच्चों के लिए चने और गुड़ की व्यवस्था की गई। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता चनों को उबालकर और तड़का लगाकर बच्चों को खिलाती थीं।
समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि व्यक्ति के आचरण और व्यक्तित्व को बेहतर बनाना भी है। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि वहां जो कुछ देखने को मिला, वह कैसी शिक्षा और संस्कार का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने और असहमति जताने का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब अराजकता नहीं होना चाहिए।
मंत्री ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के सामने अमर्यादित भाषा, संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए अपशब्दों और भगवान श्रीराम के बारे में आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने महापुरुषों के प्रति सम्मान रखने की बात कही।