
UP Minister Anil Rajbhar Defends SIT Probe, Slams Opposition Over Ram Temple Donation Case: अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर की दान राशि में कथित हेराफेरी के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति लगातार गर्म होती जा रही है। एक ओर जहां विशेष जांच दल (एसआईटी) मामले की जांच में जुटा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने विपक्ष के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और ऐसे समय में माहौल बनाने का प्रयास उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार निष्पक्ष जांच के पक्ष में है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि विपक्ष इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है, जबकि जांच एजेंसियों को निष्पक्ष रूप से अपना काम करने दिया जाना चाहिए।
मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि विपक्ष की ओर से लगातार ऐसे बयान दिए जा रहे हैं जिनसे जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल बिना जांच पूरी हुए ही निष्कर्ष निकालने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "विपक्ष यह नहीं चाह रहा है कि ठीक से जांच हो और एक टारगेटेड माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। एसआईटी जांच कर रही है और जांच अभी पूरी नहीं हुई है।" राजभर ने कहा कि किसी भी संवेदनशील मामले में धैर्य और संयम जरूरी होता है तथा जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।
अनिल राजभर ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत यही है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय भी कई मामलों में यह स्पष्ट कर चुका है कि बिना पूरी जांच के किसी प्रकार का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से अपना कार्य करने देना चाहिए ताकि बाद में किसी भी पक्ष को जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का अवसर न मिले। मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि पूरी पारदर्शिता के साथ जांच पूरी हो और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
मंत्री अनिल राजभर ने अपने बयान में समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास जनता के मुद्दों पर बोलने के लिए कुछ नहीं बचा है, इसलिए वह इस मामले को राजनीतिक रूप देने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, "समाजवादी पार्टी और उनके नेताओं के पास कोई विषय नहीं है। जिन्होंने हमेशा से अयोध्या से दूरी बनाकर रखी, भगवान राम के खिलाफ रहे, आज उन्हें अयोध्या की चिंता होने लगी?" हालांकि समाजवादी पार्टी की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
राम मंदिर की दान राशि से जुड़े कथित हेराफेरी मामले में विशेष जांच दल लगातार विभिन्न पहलुओं की जांच कर रहा है। जांच एजेंसियां वित्तीय अभिलेखों, बैंकिंग लेन-देन और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण कर रही हैं। हाल ही में पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार एक आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूछताछ और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अब तक जांच पूरी नहीं हुई है और किसी भी आरोपी के खिलाफ अदालत द्वारा दोष सिद्ध नहीं किया गया है। ऐसे में मामला फिलहाल जांच के अधीन है।
अयोध्या का श्रीराम मंदिर देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर की दान राशि से जुड़ा कोई भी मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन जाता है।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक मनोज उपाध्याय का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या और भगवान श्रीराम का विषय हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में इस मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण के अनुसार बयान दे रहे हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी पक्ष को अंतिम निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए और जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने देना चाहिए।
सरकार और जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। एसआईटी उपलब्ध दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का गहन परीक्षण कर रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।