
राम मंदिर दान मामले पर बोले धीरेंद्र शास्त्री, एसआईटी जांच और कानून पर जताया पूरा भरोसा (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
Dhirendra Shastri On Ayodhya Ram Temple Donation Case:अयोध्यास्थित श्रीराम मंदिर की दान राशि में कथित हेराफेरी के मामले को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि यदि किसी ने भगवान के नाम पर आए चंदे में अनियमितता की है, तो यह केवल पाप नहीं बल्कि ‘महापाप’ है। साथ ही उन्होंने कहा कि देश की कानून व्यवस्था, विशेष जांच दल (SIT) और सरकार पर उन्हें पूरा विश्वास है तथा जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब राम मंदिर की दान राशि में कथित हेराफेरी के मामले की जांच एसआईटी द्वारा की जा रही है। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और अन्य तथ्यों की पड़ताल में जुटी हुई हैं।
मीडिया से बातचीत के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि उन्होंने पहले भी इस विषय पर अपनी राय स्पष्ट की थी और आज भी वही बात दोहरा रहे हैं। उन्होंने कहा, "हमने पूर्व में भी कहा कि यह पाप नहीं बल्कि महापाप है और भगवान इसका दंड देंगे।"
उन्होंने आगे कहा कि पूरे देश को कानून व्यवस्था और जांच एजेंसियों पर विश्वास रखना चाहिए। उनके अनुसार किसी भी मामले में अंतिम निर्णय तथ्यों और जांच के आधार पर ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एसआईटी निष्पक्ष तरीके से जांच कर रही है और उन्हें भरोसा है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर ने कहा कि मामले की जांच जारी है और ऐसे समय में धैर्य बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को अपना कार्य स्वतंत्र रूप से करने देना चाहिए। उन्होंने कहा, "देश की कानून-व्यवस्था पर, एसआईटी पर हम सबको पूर्ण भरोसा करना चाहिए। जांच चल रही है। निश्चित रूप से हमें इस देश के कानून और इस देश की सरकार पर भरोसा है। सभी आरोपियों को दंड मिलेगा।" धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि यदि किसी ने श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश और दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर दर्शन करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान भी करते हैं। ऐसे में मंदिर की दान राशि से जुड़ा कोई भी मामला स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। धार्मिक और सामाजिक संगठनों का भी मानना है कि श्रद्धालुओं द्वारा भगवान के नाम पर दिए गए दान का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को अपना कार्य निष्पक्ष रूप से करने देना चाहिए और समाज को अफवाहों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था और कानून पर सभी नागरिकों को विश्वास रखना चाहिए। यदि किसी ने वास्तव में गलत किया है तो कानून उसे दंडित करेगा और यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो सत्य भी सामने आ जाएगा।
राम मंदिर की दान राशि से जुड़े कथित हेराफेरी मामले में विशेष जांच दल लगातार साक्ष्य जुटा रहा है। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही हैं। हाल ही में पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ भी शुरू की है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूछताछ और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। हालांकि अब तक जांच पूरी नहीं हुई है और न ही किसी आरोपी के विरुद्ध अदालत द्वारा दोष सिद्ध किया गया है। इसलिए मामला अभी जांच के अधीन है।
धार्मिक मामलों के जानकारों का मानना है कि देश के प्रमुख धार्मिक संस्थानों में आने वाले दान का प्रबंधन पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। आधुनिक डिजिटल व्यवस्था, नियमित ऑडिट और वित्तीय निगरानी जैसी व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत करती हैं। सूत्रों का कहना है कि जब किसी धार्मिक संस्था से जुड़े वित्तीय मामले पर सवाल उठते हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
Published on:
03 Jul 2026 11:17 am
