
यूपी में मिशन-2027 की चुनावी बिसात बिछाने आ रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, संगठन और सरकार की होगी बड़ी परीक्षा (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
UP Politics: भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेशविधानसभा चुनाव-2027 की तैयारियों का औपचारिक आगाज कर दिया है। इसी कड़ी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 4 और 5 जुलाई को दो दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरे पर लखनऊ पहुंच रहे हैं। राजनीतिक जानकार इस दौरे को केवल एक संगठनात्मक बैठक नहीं, बल्कि मिशन-2027 के लिए भाजपा की चुनावी रणनीति की शुरुआत मान रहे हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद भाजपा अब कोई जोखिम लेने के पक्ष में नहीं दिख रही है। यही कारण है कि संगठन से लेकर सरकार तक हर स्तर पर समीक्षा और नई रणनीति तैयार करने का काम शुरू हो चुका है।
उत्तर प्रदेश देश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां की 403 विधानसभा सीटें और 80 लोकसभा सीटें राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करती हैं। भाजपा लगातार दो बार विधानसभा चुनाव जीतकर सरकार बना चुकी है। अब पार्टी की नजर तीसरी बार सत्ता में वापसी कर इतिहास रचने पर है। इसी लक्ष्य को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहली बार प्रदेश के संगठन और सरकार के शीर्ष नेताओं के साथ व्यापक मंथन करेंगे।
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार जीत केवल चुनावी अभियान से संभव नहीं होगी, बल्कि इसके लिए संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना होगा। इसी सोच के साथ प्रदेश, क्षेत्र, जिला और शक्ति केंद्र स्तर तक संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की रणनीति बनाई जा रही है।
लोकसभा चुनाव-2024 में उत्तर प्रदेश में भाजपा को अपेक्षा से कम सीटें मिलीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कई स्थानों पर बूथ प्रबंधन, जातीय समीकरण और स्थानीय असंतोष का असर देखने को मिला। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इन कारणों का गंभीरता से अध्ययन किया है। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे का सबसे बड़ा उद्देश्य यही माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव-2027 में उन सभी कमजोरियों को दूर किया जाए, जिनका असर लोकसभा चुनाव में दिखाई दिया था। बूथ समितियों को मजबूत करना, युवाओं की भागीदारी बढ़ाना, सोशल मीडिया नेटवर्क का विस्तार और लाभार्थियों से सीधा संवाद भाजपा की प्राथमिकताओं में शामिल है।
भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में संगठन को मजबूत करने वाली अनुभवी टीम के कई सदस्य उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सक्रिय हो चुके हैं। माना जा रहा है कि यही टीम प्रदेश के सभी 98 संगठनात्मक जिलों में जाकर बूथ और सेक्टर स्तर की वास्तविक स्थिति का अध्ययन करेगी। सूत्र बताते हैं कि बंगाल में अपनाए गए संगठनात्मक मॉडल के आधार पर उत्तर प्रदेश में भी शक्ति केंद्रों और बूथ समितियों को पुनर्गठित किया जाएगा। इसके साथ ही प्रत्येक क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग रणनीति तैयार की जाएगी।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान प्रदेश पदाधिकारियों, छह क्षेत्रीय इकाइयों तथा सभी 98 जिला एवं महानगर अध्यक्षों के साथ अलग-अलग बैठक करेंगे। इन बैठकों में प्रत्येक जिले की राजनीतिक स्थिति, संगठन की मजबूती, विपक्ष की सक्रियता और आगामी चुनाव की तैयारियों की समीक्षा होगी। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि प्रत्येक जिला अध्यक्ष अपने क्षेत्र की वास्तविक रिपोर्ट प्रस्तुत करे, ताकि जमीनी स्तर पर मौजूद समस्याओं का समाधान समय रहते किया जा सके।
करीब छह महीने के लंबे इंतजार के बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपनी नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया है। नई टीम में 19 उपाध्यक्ष, 8 महामंत्री, 19 मंत्री, छह क्षेत्रीय अध्यक्ष तथा विभिन्न मोर्चों के अध्यक्षों को जिम्मेदारी दी गई है। नई कार्यकारिणी में अनेक नए चेहरों को अवसर मिला है, जबकि कई अनुभवी नेताओं को इस बार स्थान नहीं मिला। ऐसे में नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को चुनावी मोड में तेजी से सक्रिय करना होगी।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पूर्व उपाध्यक्ष त्रयंबक नाथ त्रिपाठी, पूर्व महामंत्री अनूप गुप्ता, गोविंद नारायण शुक्ला, पूर्व मंत्री मानवेन्द्र सिंह तथा मीना चौबे जैसे अनुभवी नेताओं की कार्यशैली और संगठनात्मक अनुभव की कमी नई टीम को महसूस हो सकती है। अब देखना होगा कि नए पदाधिकारी इस जिम्मेदारी को किस तरह निभाते हैं।
प्रदेश संगठन की नई टीम को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं भी हैं। पार्टी के भीतर यह आरोप लगाया जा रहा है कि कई पदाधिकारियों की नियुक्ति स्थानीय नेतृत्व की अपेक्षा राष्ट्रीय स्तर की सिफारिशों के आधार पर हुई है।
कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पसंद के कई नेताओं को उत्तर प्रदेश और बिहार की संगठनात्मक टीमों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं। ऐसे में अब उन सभी पदाधिकारियों की कार्यक्षमता और संगठनात्मक क्षमता की वास्तविक परीक्षा शुरू होने जा रही है। यदि वे अपेक्षित परिणाम देने में सफल नहीं हुए तो भविष्य में संगठनात्मक बदलाव से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने प्रवास के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा उसके विभिन्न आनुषंगिक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ भी महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इनमें विश्व हिंदू परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय मजदूर संघ, विद्या भारती तथा सेवा भारती के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इन बैठकों का उद्देश्य आगामी चुनाव से पहले सभी वैचारिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और संयुक्त रणनीति तैयार करना बताया जा रहा है।
दो दिवसीय प्रवास के दौरान भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की कोर ग्रुप बैठक भी होगी। इसमें राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं ब्रजेश पाठक, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह तथा संघ के क्षेत्रीय प्रचारक शामिल होंगे।
इस बैठक में प्रदेशभर में हुई बैठकों का फीडबैक प्रस्तुत किया जाएगा और अगले दो से तीन महीनों के लिए संगठन तथा सरकार की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। सरकार की उपलब्धियों को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और विपक्ष के मुद्दों का जवाब देने की रणनीति भी इसी बैठक में तैयार होने की संभावना है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर अवध क्षेत्र के लगभग 6,390 शक्ति केंद्र प्रभारियों से सीधा संवाद करेंगे। भाजपा संगठन में शक्ति केंद्रों को चुनावी सफलता की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। प्रत्येक शक्ति केंद्र के माध्यम से बूथ स्तर तक संगठन की गतिविधियों को गति दी जाती है। इस संवाद के माध्यम से राष्ट्रीय नेतृत्व सीधे जमीनी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें आगामी चुनाव की रणनीति से भी अवगत कराएगा।
विधानसभा चुनाव-2027 तक उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के लगभग दस वर्ष पूरे हो जाएंगे। ऐसे में सत्ता विरोधी माहौल की संभावना से भी पार्टी पूरी तरह परिचित है। माना जा रहा है कि संगठन सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंच बढ़ाने, विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से प्रचारित करने तथा सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देगा। युवा मतदाताओं, महिलाओं, किसानों, पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और शहरी मतदाताओं के बीच अलग-अलग अभियान चलाने की तैयारी भी की जा रही है।
राजनीतिक दृष्टि से राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का यह दौरा उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह केवल संगठनात्मक बैठक नहीं बल्कि मिशन-2027 की औपचारिक शुरुआत है। लोकसभा चुनाव-2024 के अनुभवों से सीख लेते हुए भाजपा अब बूथ से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक पूरी ताकत के साथ चुनावी तैयारियों में जुटती दिखाई दे रही है।
आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि भाजपा की नई संगठनात्मक टीम, सरकार और संघ परिवार के बीच बनने वाला समन्वय पार्टी को तीसरी बार सत्ता तक पहुंचाने में कितना सफल होता है। फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति अब मिशन-2027 के चुनावी रंग में पूरी तरह रंगने लगी है और राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दौरा उसी दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।
Updated on:
03 Jul 2026 07:50 am
Published on:
03 Jul 2026 07:50 am
