
Election Commission Controversy: देशभर में चुनाव आयोग और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रहे विवाद पर सियासी बयानबाजी लगातार जारी है। अब कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के SIR से जुड़े बयान पर पलटवार किया है। कैबिनेट मंत्री राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष को 2022 विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार अब तक नहीं पची है और वे आज तक इस लोकतांत्रिक सच्चाई को स्वीकार करने के लिए तैयार ही नहीं हो पा रहे हैं। राजभर ने आगे कहा कि देश की संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लगातार कटघरे में खड़ा करना उनकी पुरानी आदत में शुमार हो चुका है।
SIR कोई आज पहली बार नहीं हो रहा है बल्कि समय-समय पर चुनाव आयोग मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए इस प्रकार के अभियान चलाता रहता है। कैबिनेट मंत्री ने SIR को लेकर पुराने चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि आप हमें बताएं कि 1952 में देश में किसकी सरकार थी, 1957 में देश में किसकी सरकार थी, 1961, 1965 और 2003 में देश में किसकी सरकार थी? उस समय SIR नहीं हुआ? उस समय भी SIR हुआ। कांग्रेस के शासनकाल में भी SIR हुआ था।
अनिल राजभर ने कहा कि SIR को लेकर समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और दूसरे विपक्षी दल देश में भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लोगों को गुमराह कर रहा है और चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर बेवजह सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि SIR को केवल मौजूदा राजनीतिक विवाद के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को व्यवस्थित और शुद्ध करने की प्रक्रिया है और समय-समय पर चुनाव आयोग इस तरह के अभियान चलाता रहा है ।
SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक विवाद लगातार तेज है। दरअसल 23 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने के दौरान आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। इनमें SIR से जुड़े फैसले भी शामिल बताए गए।
इसके बाद चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि देशभर में SIR शुरू करने का फैसला मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिया गया था। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। तमाम विवादों के बीच चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को बड़ी बैठक की। इस अहम बैठक में आयोग के तीनों चुनाव आयुक्त यानी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार, डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी शामिल रहे।