लखनऊ

अखिलेश यादव को पूड़ी खिलाने के बाद हुआ डिमोशन, सुपरवाइजर को बनाया सफाईकर्मी, क्या है सच्चाई?

Anjali Massey Akhilesh Yadav Puri Controversy : क्या अखिलेश यादव को पूड़ी खिलाने की सजा मिली? लखनऊ में अंजली मैसी के पिता के डिमोशन पर मचा बवाल। सपा इसे राजनीतिक साजिश बता रही है, वहीं प्रशासन ने सच्चाई कुछ और ही बताई है।

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May 07, 2026
अखिलेश यादव को पूड़ी खिलाने वाली युवती के पिता का डिमोशन, क्या है सच्चाई?, PC- X

लखनऊ : 14 अप्रैल 2026 को लखनऊ के सदर गुरुद्वारे में अंबेडकर जयंती और बैसाखी के अवसर पर अखिलेश यादव माथा टेकने पहुंचे थे। गुरुद्वारे के पास अंजली मैसी द्वारा आयोजित भंडारे में अखिलेश यादव ने गाड़ी रोककर प्रसाद ग्रहण किया। अंजली ने उन्हें पूड़ी खिलाई और अखिलेश की खुलकर तारीफ की। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।

अंजली मैसी लखनऊ की रहने वाली हैं। उन्होंने अंग्रेजी विषय में एमए किया है और वर्तमान में एक निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। वे खुद को दलित समुदाय से बताती हैं और कॉलेज के दिनों से अखिलेश यादव के कामकाज से प्रभावित रही हैं। अंजली का कहना है कि वे समाजवादी पार्टी की राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहती हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव को फिर से मुख्यमंत्री बनते देखना चाहती हैं।

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पिता के डिमोशन का आरोप

घटना के बाद अंजली ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, भंडारे के अगले दिन उनके पिता उमेश कुमार, जो लखनऊ छावनी परिषद (कैंटोनमेंट बोर्ड) में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे, उन्हें बिना किसी कारण के डिमोट कर सफाई कर्मचारी बना दिया गया। अंजली इसे सत्ता पक्ष की धांधली और राजनीतिक साजिश बताती हैं। 6 मई को अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचकर अंजली भावुक हो गईं और कहा, 'नौकरी की बात नहीं है, अखिलेश सर के लिए ऐसी 100 नौकरियां कुर्बान हैं। मेरे पिता ने आपके लिए यही संदेश दिया है।'

अधिकारी बोले- वह पहले से सफाई कर्मी

छावनी परिषद के अधिकारियों ने इन आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उमेश कुमार मूल रूप से सफाई कर्मचारी ही हैं। इसलिए डिमोशन का सवाल ही नहीं उठता। उन्हें गेट ड्यूटी से हटाकर स्कूल में स्थानांतरित किया गया है। कार्रवाई का मुख्य कारण अनुशासनहीनता और कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन बताया गया है। उमेश कुमार ने विभागीय अनुमति के बिना उच्च अधिकारियों को सीधे भंडारे का आमंत्रण पत्र भेजा था। उन पर पहले से ही बदतमीजी और मनमानी की कई शिकायतें मौजूद थीं।

यह मामला अब सपा और प्रशासन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गया है। समाजवादी पार्टी इसे विपक्षी आवाज को दबाने की कोशिश बता रही है, जबकि प्रशासन इसे शुद्ध विभागीय कार्रवाई मानता है। अंजली मैसी इस घटना को अपने साहस का प्रतीक बताकर राजनीतिक भविष्य तैयार कर रही दिख रही हैं।

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Updated on:
07 May 2026 09:51 am
Published on:
07 May 2026 09:50 am
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