KGMU Case: लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में शादी का झांसा देकर शोषण का एक और गंभीर मामला सामने आया है। नर्सिंग छात्रा ने इंटर्न डॉक्टर पर शारीरिक संबंध बनाने, शादी से मुकरने और विरोध करने पर निजी तस्वीरें वायरल करने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Another ‘Marriage Promise’ Exploitation Case Rocks KGMU: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोपों के मामले अभी थमे भी नहीं थे कि संस्थान से जुड़ा एक और सनसनीखेज मामला सामने आ गया है। इस बार एक नर्सिंग छात्रा ने इंटर्न डॉक्टर पर शादी का झांसा देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाने, फिर शादी से मुकरने और विरोध करने पर निजी तस्वीरें वायरल करने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत पर कैसरबाग थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में KGMU से जुड़े एक अन्य प्रकरण में धर्म परिवर्तन के दबाव और मानसिक उत्पीड़न से परेशान एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर द्वारा आत्महत्या के प्रयास की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान की कार्य संस्कृति, छात्र सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़िता अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक पीजी में रहकर नर्सिंग की पढ़ाई की तैयारी कर रही है। छात्रा के अनुसार, कुछ समय पहले उसकी मुलाकात कैसरबाग इलाके में रहने वाले मोहम्मद आदिल नामक युवक से हुई थी, जो KGMU से संबद्ध एक इंटर्न डॉक्टर है। शुरुआत में दोनों के बीच दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे नजदीकियों में बदल गई।
पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने पहले उससे प्रेम संबंध स्थापित किया और फिर शादी का भरोसा दिलाया। इसी भरोसे के आधार पर आरोपी ने उसे अपने फ्लैट पर बुलाया और कई बार शारीरिक संबंध बनाए। छात्रा का कहना है कि उसने आरोपी पर इसलिए विश्वास किया क्योंकि वह खुद को डॉक्टर बताता था और भविष्य को लेकर गंभीर बातें करता था।
पीड़िता के अनुसार, जब उसने शादी की बात को लेकर दबाव बनाया तो आरोपी का रवैया अचानक बदल गया। उसने शादी से साफ इनकार कर दिया। जब छात्रा ने इसका विरोध किया और पुलिस में शिकायत करने की बात कही, तो आरोपी ने कथित रूप से उसके निजी फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी दी।
डरी-सहमी छात्रा ने अंततः हिम्मत जुटाकर कैसरबाग थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
कैसरबाग थाना पुलिस के अनुसार, पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया गया है और आरोपी की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया चैट्स की भी जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंध सहमति से थे या धोखे और दबाव में बनाए गए।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि निजी तस्वीरों या वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग की पुष्टि होती है, तो आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट और अन्य कड़ी धाराओं में भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
गौरतलब है कि यह मामला KGMU से जुड़ा दूसरा बड़ा विवाद है। इससे पहले 17 दिसंबर को KGMU की एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के दबाव और मानसिक उत्पीड़न से परेशान होकर आत्महत्या का प्रयास किया था। उस मामले में आरोप था कि एक मुस्लिम रेजिडेंट डॉक्टर अपनी महिला साथी पर शादी के लिए धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था।
पीड़िता के परिजनों ने आरोप लगाया था कि जब उनकी बेटी ने धर्म परिवर्तन से इनकार किया तो आरोपी ने शादी से भी इनकार कर दिया और मानसिक प्रताड़ना शुरू कर दी। इससे आहत होकर युवती अवसाद में चली गई और हॉस्टल में दवाइयों का ओवरडोज लेकर जान देने की कोशिश की।
रेजिडेंट डॉक्टर आत्महत्या प्रकरण में पीड़िता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिल चुकी है। मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे। हालांकि, आरोपी डॉक्टर अभी तक फरार बताया जा रहा है। KGMU प्रशासन स्तर पर भी एक जांच समिति गठित की गई है। इन दोनों मामलों के सामने आने के बाद चिकित्सा संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राओं की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और शिकायत निवारण प्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि संस्थागत सुधार और संवेदनशीलता भी जरूरी है। छात्राओं के लिए सुरक्षित वातावरण, परामर्श सुविधाएं और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है। महिला अधिकार संगठनों ने भी KGMU और राज्य सरकार से मांग की है कि मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों पर “शून्य सहनशीलता” की नीति अपनाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।