लखनऊ

सहज-सरल, लेकिन इरादों के ‘अटल’ थे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी: मुख्यमंत्री योगी

Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary 2026 : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धांजलि दी। उन्होंने अटल जी के राष्ट्र प्रथम के विचारों और दृढ़ नेतृत्व को याद किया।
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Aug 16, 2026
लोकभवन में अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के दौरान मौजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा नेता (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
लोकभवन में अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के दौरान मौजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा नेता (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary: पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर रविवार को राजधानी लखनऊ में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन स्थित अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पर पुष्पार्चन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अटल जी के व्यक्तित्व, कृतित्व और छह दशक लंबे सार्वजनिक जीवन को स्मरण करते हुए कहा कि वह जितने सहज और सरल थे, उतने ही अपने संकल्प और इरादों में ‘अटल’ थे। भारतीय राजनीति में उनका जीवन राष्ट्रहित, लोकतांत्रिक मूल्यों और सार्वजनिक सेवा की प्रतिबद्धता का उदाहरण रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के ऐसे व्यक्तित्व थे, जिन्होंने पद और दल की सीमाओं से ऊपर उठकर हमेशा राष्ट्र को सर्वोपरि रखा। भाजपा के सामान्य कार्यकर्ता से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, नेता सदन, विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों तक पहुंचने के बाद भी उनके लिए राष्ट्र प्रथम का भाव कभी कमजोर नहीं हुआ। जब भी देशहित का प्रश्न सामने आया, उन्होंने राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी।

लोकभवन में अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के दौरान मौजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा नेता  (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

छह दशक का सार्वजनिक जीवन रहा निर्विवाद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अटल बिहारी वाजपेयी के छह दशक लंबे सार्वजनिक जीवन को याद करते हुए कहा कि उनका राजनीतिक जीवन निर्विवाद और निष्कलंक रहा। उन्होंने भारतीय राजनीति में अपने विचारों, वक्तृत्व और लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता से अलग पहचान बनाई। मुख्यमंत्री ने उन्हें भारतीय राजनीति का ‘अजातशत्रु’ बताते हुए कहा कि विरोधी विचारधारा के नेताओं के बीच भी अटल जी के प्रति सम्मान की भावना थी।

उन्होंने कहा कि अटल जी ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रहित से जुड़े आंदोलनों से की। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में कश्मीर में धारा-370 लगाए जाने के विरोध में सत्याग्रह से उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने लगातार देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए काम किया।

पद बदले, लेकिन राष्ट्र प्रथम का संकल्प नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सांसद, विदेश मंत्री, नेता प्रतिपक्ष, जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा प्रधानमंत्री जैसे अलग-अलग दायित्वों का निर्वहन करते हुए भी अटल जी की प्राथमिकता हमेशा राष्ट्र रही। उन्होंने कहा कि अटल जी की सबसे बड़ी विशेषता यही थी कि वह पद को कभी लक्ष्य नहीं मानते थे। उनके लिए पद राष्ट्रसेवा का माध्यम था।

अटल जी की आठवीं पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व अन्य जनप्रतिनिधि   (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के सामान्य कार्यकर्ता से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रधानमंत्री तक की यात्रा में अटल जी ने संगठन और देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को कायम रखा। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर दल से ऊपर उठकर देश के हित को महत्व दिया। यही कारण है कि आज भी अटल बिहारी वाजपेयी को केवल एक दल के नेता के रूप में नहीं, बल्कि पूरे देश के लोकप्रिय और सम्मानित राजनेता के रूप में याद किया जाता है।

आपातकाल के खिलाफ संघर्ष में निभाई अहम भूमिका

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपातकाल के दौर को याद करते हुए कहा कि जब देश पर कांग्रेस सरकार ने आपातकाल थोपा, तब अटल बिहारी वाजपेयी ने लोकतंत्र की बहाली के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने जनसंघ का जनता पार्टी में विलय कर आपातकाल से मुक्ति के आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी ने लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के लिए संघर्ष किया। उनके लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था केवल राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि देश की आत्मा थी। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में लोकतंत्र की गरिमा और विपक्ष की भूमिका को हमेशा महत्व दिया। इसी कारण उनके भाषणों और संसदीय व्यवहार को आज भी लोकतांत्रिक राजनीति के आदर्श उदाहरणों में गिना जाता है।

युद्ध के समय सरकार के साथ खड़े रहे अटल जी

मुख्यमंत्री ने 1962, 1965 और 1971 के युद्धों का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण अवसरों पर अटल जी ने जिम्मेदार सांसद की भूमिका निभाई। उन्होंने सरकार को कटघरे में खड़ा करने के बजाय राष्ट्र की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरकार के साथ खड़े होकर अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा कि अटल जी की राजनीति में राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा महत्वपूर्ण विषय रही। विपक्ष में रहते हुए भी जब देश की सुरक्षा और एकता का प्रश्न सामने आया तो उन्होंने राजनीतिक विरोध को पीछे रखा। उनका मानना था कि देश की सुरक्षा के मुद्दे पर पूरा राष्ट्र एकजुट होना चाहिए। यह दृष्टिकोण आज भी सार्वजनिक जीवन में अनुकरणीय है।

राजनीतिक स्थिरता के लिए एनडीए का निर्माण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि 1990 के दशक में देश राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था। ऐसे समय में अटल जी ने राजनीतिक समन्वय और सहयोग की नई मिसाल कायम की। 1996 से 1998 के दौर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के निर्माण और विस्तार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं वाले दलों को साथ लेकर चलने की अटल जी की क्षमता उनकी राजनीतिक परिपक्वता को दर्शाती है। उन्होंने गठबंधन की राजनीति को केवल सत्ता का माध्यम नहीं बनाया, बल्कि राजनीतिक स्थिरता और सुशासन के लक्ष्य से जोड़ा। आज भी भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए विभिन्न राज्यों और केंद्र में सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकारें चला रहा है।

सहज व्यक्तित्व, लेकिन फैसलों में दृढ़ता

अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह बेहद सहज और सरल स्वभाव के थे, लेकिन जब राष्ट्रहित का सवाल आता था तो उनके निर्णयों में दृढ़ता दिखाई देती थी। यही वजह है कि उनके व्यक्तित्व में संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता था। मुख्यमंत्री ने कारगिल संघर्ष के समय अटल जी के नेतृत्व और दृढ़ संकल्प को याद करते हुए कहा कि उस दौर में दुनिया ने भारत के नेतृत्व की क्षमता को देखा। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया था कि भारत पर युद्ध थोपा गया है और देश इसका मुंहतोड़ जवाब देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी ने दुनिया की किसी भी ताकत के सामने झुके बिना भारत की सामरिक क्षमता और आत्मविश्वास को मजबूत किया।

परमाणु शक्ति के रूप में भारत की पहचान मजबूत की

मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में भारत ने अपनी सामरिक क्षमता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाए। भारत को परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित करने के उनके निर्णय ने देश की रणनीतिक स्थिति को मजबूत किया। उनके नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं किया। मुख्यमंत्री के अनुसार अटल जी का नेतृत्व यह संदेश देता था कि भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। उनके निर्णयों ने देश में आत्मविश्वास की भावना को मजबूत किया और भारत की सामरिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई मजबूती दी।

बलरामपुर से संसद की शुरुआत, लखनऊ से बना गहरा रिश्ता

अटल बिहारी वाजपेयी का उत्तर प्रदेश से गहरा राजनीतिक और भावनात्मक रिश्ता रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अटल जी को पहली बार 1957 में उत्तर प्रदेश की बलरामपुर संसदीय सीट से संसद पहुंचने का अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने लखनऊ संसदीय क्षेत्र का पांच बार प्रतिनिधित्व किया और राजधानी के लोगों के साथ उनका विशेष जुड़ाव बना रहा। लखनऊ ने अटल जी को लंबे समय तक अपना सांसद चुना और अटल जी ने भी इस शहर के विकास और यहां के लोगों के साथ अपने रिश्ते को हमेशा महत्व दिया। यही कारण है कि लखनऊ में उनकी स्मृतियां आज भी लोगों के बीच जीवंत हैं। उनके नाम पर योजनाओं और संस्थानों के माध्यम से भी उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

अटल जी की स्मृतियों को नमन

आठवीं पुण्यतिथि के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज पूरा देश पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृतियों को नमन कर रहा है। अटल जी का जीवन सार्वजनिक सेवा, राष्ट्रभक्ति, लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक शुचिता की प्रेरणा देता है। उनका व्यक्तित्व भारतीय राजनीति में एक ऐसी विरासत छोड़ गया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां लंबे समय तक याद रखेंगी।