
ओपी राजभर। फोटो सोर्स-IANS
UP Politics: उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर निशाना साधा। लखनऊ में उन्होंने कहा कि आंदोलन करने वाले लोगों को पहले अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए। राजभर ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के पुराने राजनीतिक दौर का जिक्र करते हुए विपक्ष के चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल उठाया।
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि 2014 से पहले पूरे देश के सिस्टम पर कांग्रेस का कब्जा था। उन्होंने विपक्ष के उस तर्क पर सवाल उठाया, जिसमें चुनाव आयोग पर किसी राजनीतिक दल के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया जा रहा है। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अगर उस समय चुनाव आयोग कांग्रेस की मुट्ठी में था और कांग्रेस ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर चुनाव कराया, तो फिर 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री कैसे बन गए।
मंत्री ने उत्तर प्रदेश की पिछली सरकार का उदाहरण देते हुए समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी और उनके मुताबिक उस समय पूरे सिस्टम पर अखिलेश यादव का कब्जा था। राजभर ने इसी तर्क को आगे बढ़ाते हुए कहा कि अगर चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के प्रभाव में काम करता था, तो अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग से मिलकर योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री क्यों बनवा दिया।
ओम प्रकाश राजभर ने विपक्ष के मौजूदा विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर उनके आरोपों को सही मान लिया जाए तो फिर उन्हें अब परेशानी क्यों हो रही है। उन्होंने आंदोलन कर रहे लोगों से अपने पुराने राजनीतिक दौर और चुनावी नतीजों पर भी विचार करने की बात कही। राजभर का यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। हाल के दिनों में राजभर ने चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के विरोध को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
वहीं, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी सांसदों के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बयान दिया है। ओपी राजभर ने इस कार्रवाई को सही कदम बताया। राजभर ने कहा कि अगर कोई सरकारी संस्थान में जबरन घुसकर तोड़फोड़ करता है तो उसकी गिरफ्तारी होगी और उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पुलिस की ओर से कार्रवाई होना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के मुताबिक, विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से निर्वाचन सदन तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी। पुलिस का कहना है कि इस मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी। प्रदर्शनकारी जब चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़े तो पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड लगा दिए। इसके बाद कई विपक्षी नेता वहीं सड़क पर बैठ गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने की कोशिश की। इसी दौरान कुछ कांग्रेस नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहां विरोध जारी रखा।
Updated on:
07 Oct 2026 01:13 pm
Published on:
07 Oct 2026 12:44 pm
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