लखनऊ

Ayodhya Ram Mandir Row: कब तक बचाओगे? एक दिन विनाश तय है! सपा सांसद अवधेश प्रसाद की सरकार को सीधी चेतावनी

Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर दान विवाद पर सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार असली गुनहगारों और कस्टोडियन को बचाने में जुटी है, लेकिन अयोध्या से ही इनका पतन शुरू हो चुका है।
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Sep 26, 2026
Awdhesh Prasad
सपा सांसद अवधेश प्रसाद (PC: IANS)

Ram Mandir Donation Row: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले ने राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने योगी सरकार पर सीधे हमला बोलते हुए चेतावनी दी है कि बड़े लोगों को बचाने की कोशिश कब तक चलेगी। उन्होंने कहा कि एक दिन इनका विनाश तय है। वहीं विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने जांच प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच पूरी हुई है और दोषियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

सपा सांसद का सरकार पर हमला

लखनऊ में राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, 'यह सरकार बड़े मछलियों को बचा रही है। जो असली दोषी हैं, मुख्य लोग, संरक्षक… सरकार उन्हें बचाने का काम कर रही है। ठीक है, फिलहाल वे सुरक्षित हैं, सरकार उन्हें बचा ले… लेकिन वे बच नहीं पाएंगे, उनका पूर्ण विनाश होगा… उनका पूर्ण पतन अयोध्या से शुरू हो चुका है।'

अवधेश प्रसाद के इस बयान से साफ है कि विपक्ष इस मुद्दे को 2027 के विधानसभा चुनाव तक गर्माए रखना चाहता है। सपा लगातार आरोप लगा रही है कि मंदिर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

वीएचपी ने जांच का किया बचाव

दिल्ली में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने पुलिस द्वारा चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दिए जाने पर कहा, 'श्री राम मंदिर अयोध्या में कथित चढ़ावा चोरी की जांच पूरी हो चुकी है। कई लोगों के नाम लिए जा रहे थे और मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा था। ऐसा लग रहा था कि 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए इससे अभियान बनाया जा रहा है।'

आलोक कुमार ने आगे बताया कि जब ये आरोप लग रहे थे तो कुछ लोगों ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को जांच की निगरानी करनी चाहिए। उन्होंने इसका स्वागत किया। सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार किया। कोर्ट की सलाह पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का पुनर्गठन किया और फॉरेंसिक ऑडिटर भी नियुक्त किया। हर सुनवाई से पहले एसआईटी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करती रही। इस तरह सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जांच पूरी हुई और 73,000 पेज की रिपोर्ट आई। दोषी पाए गए लोगों के नाम आरोपी के रूप में दर्ज कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

Updated on:
26 Sept 2026 07:56 pm
Published on:
26 Sept 2026 07:00 pm