Lucknow Airport Flight Diversion: लखनऊ में खराब मौसम के चलते डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक की फ्लाइट तीन बार लैंडिंग में विफल होकर भोपाल डायवर्ट हुई।
Lucknow Airport: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में खराब मौसम ने हवाई सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। सोमवार को घने बादलों, तेज हवाओं और कम दृश्यता (लो विजिबिलिटी) के कारण कई उड़ानों का संचालन बाधित रहा। इस दौरान एक बड़ी घटना तब सामने आई जब प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को लेकर दिल्ली से लखनऊ आ रही इंडिगो की फ्लाइट अपने निर्धारित गंतव्य पर उतरने में असफल रही।
सूत्रों के अनुसार, इंडिगो की फ्लाइट संख्या 6E-6476 ने लखनऊ एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए तीन बार प्रयास किया, लेकिन खराब मौसम और बेहद कम दृश्यता के चलते हर बार उसे असफलता हाथ लगी। पायलट ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अंततः विमान को डायवर्ट करने का निर्णय लिया। यह फ्लाइट अंततः मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सुरक्षित उतारी गई। विमान में मौजूद यात्रियों के साथ-साथ दोनों उपमुख्यमंत्री भी इस दौरान मौजूद थे।
लगातार तीन बार लैंडिंग की कोशिश नाकाम होने के बाद यात्रियों में कुछ समय के लिए चिंता का माहौल बन गया। हालांकि, विमान चालक दल ने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित रखा और यात्रियों को सुरक्षित रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए। एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि खराब मौसम के दौरान पायलट द्वारा लिया गया यह निर्णय पूरी तरह से सुरक्षा मानकों के अनुरूप था।
केवल लखनऊ ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में भी मौसम खराब रहा। वहां लो विजिबिलिटी के कारण कई उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ। जानकारी के अनुसार, दिल्ली से आने वाली करीब 15 उड़ानों को डायवर्ट कर लखनऊ एयरपोर्ट पर उतारा गया। इससे लखनऊ एयरपोर्ट पर अचानक विमानों की संख्या बढ़ गई और संचालन पर अतिरिक्त दबाव पड़ गया।
अचानक बड़ी संख्या में विमानों के लखनऊ पहुंचने से एयरपोर्ट प्रशासन को भी अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ीं। ग्राउंड स्टाफ को विमानों की पार्किंग, यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए तेजी से काम करना पड़ा। हालांकि, एयरपोर्ट अथॉरिटी ने स्थिति को संभालते हुए सभी उड़ानों के संचालन को व्यवस्थित रखने की कोशिश की।
मौसम विभाग के अनुसार, इस बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमीय गतिविधियां जिम्मेदार हैं। तेज हवाएं, गरज-चमक और बादलों की घनी परत ने दृश्यता को काफी हद तक प्रभावित किया, जिससे हवाई यातायात पर असर पड़ा। सूत्रों का कहना है कि इस तरह के मौसम में लैंडिंग और टेक ऑफ दोनों ही चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं, खासकर तब जब विजिबिलिटी बहुत कम हो।
इस पूरे घटनाक्रम के चलते यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा। कुछ यात्रियों की उड़ानें देर से पहुंचीं, तो कुछ को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़े। हालांकि, एयरलाइंस और एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों को हर संभव सहायता प्रदान करने की कोशिश की।
घटना के बाद प्रशासन और एयरलाइंस दोनों ही सतर्क हो गए हैं। मौसम की स्थिति को देखते हुए आगे की उड़ानों के संचालन को लेकर विशेष निगरानी रखी जा रही है। यात्रियों को भी सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति की जानकारी जरूर ले लें और मौसम के अपडेट पर नजर बनाए रखें।