Big Relief For Farmers: किसानों को बड़ी राहत मिलिने जा रही है। आलू की 6500 रुपये प्रति टन की दर से खरीद होगी। जानिए महिलाओं के लिए क्या बड़ी खबर आई है?
Big Relief For Farmers: केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के आलू किसानों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से 6500.90 रुपये प्रति टन की दर से आलू खरीद को मंजूरी दी गई है। यह खरीद बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत की जाएगी, जिसके अंतर्गत कुल 20 लाख टन आलू खरीदे जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पूरी प्रक्रिया पर सरकार के खजाने से लगभग 203.15 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य बाजार में आलू की कीमतों में गिरावट को रोकना है। अक्सर अधिक उत्पादन के कारण किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती है। इस योजना के जरिए किसानों को न्यूनतम समर्थन सुनिश्चित किया जाएगा और उनकी आय को स्थिर करने में मदद मिलेगी।
कृषि मंत्री ने राज्य के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक के बाद अन्य राज्यों के लिए भी अहम निर्णय लिए। आंध्र प्रदेश में चने की खरीद सीमा को 94,500 टन से बढ़ाकर 1.13 लाख टन कर दिया गया है। वहीं, कर्नाटक में मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत तुअर की खरीद की अवधि 15 मई तक बढ़ा दी गई है।
इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के निर्देश पर गन्ना समितियों में स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
गन्ना समितियों के परिसरों में उपलब्ध खाली या अतिरिक्त स्थान महिलाओं को ‘प्रेरणा कैंटीन’ चलाने और अपने उत्पादों के प्रदर्शन व बिक्री के लिए दिया जाएगा। इससे ग्रामीण महिलाओं को सीधे बाजार से जुड़ने और अपनी आय बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
इस योजना की खास बात यह है कि महिलाओं को दिए गए स्थान के उपयोग के लिए शुरुआती दो वर्षों तक कोई किराया नहीं देना होगा। इसके बाद भी उन्हें केवल 50 प्रतिशत किराया देना होगा, जो जिला प्रशासन द्वारा तय सर्किल रेट के अनुसार होगा। हालांकि, इन स्थानों का स्वामित्व गन्ना समितियों के पास ही रहेगा।
महिलाएं इन केंद्रों के माध्यम से अपने हस्तनिर्मित उत्पाद जैसे खाद्य सामग्री, सोलर लैंप, हस्तशिल्प और कृषि उत्पाद बेच सकेंगी। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
सरकार और संबंधित विभाग महिलाओं को प्रशिक्षण, विपणन और प्रचार-प्रसार में भी सहयोग देंगे। उन्हें मेलों, प्रदर्शनियों और अन्य आयोजनों में भाग लेने का मौका मिलेगा, जिससे उनके उत्पादों की पहुंच और बिक्री दोनों बढ़ेंगी।
यूपीएसआरएलएम इस योजना के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि महिलाओं को कैंटीन संचालन, स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण का उचित प्रशिक्षण मिले।
इस पहल से न केवल महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता मिलेगी, बल्कि गन्ना समितियों की गतिविधियों में भी विविधता आएगी। स्थानीय स्तर पर उत्पादन और खपत बढ़ेगी, जिससे प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।