लखनऊ

UP BJP Rajya Sabha Candidates List: भाजपा ने यूपी में चेहरे बदले, अब संगठन और सरकार में बदलाव की बारी

Rajya Sabha Elections: भाजपा ने सबसे बड़ा बदलाव यह किया कि उत्तर प्रदेश से कार्यकाल पूरा कर रहे भाजपा के सभी आठ राज्यसभा सदस्यों को दोबारा टिकट नहीं दिया। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा भी शामिल हैं।
4 min read
• •
Oct 05, 2026
bjp
भारतीय जनता पार्टी फाइल फोटो

UP BJP Rajya Sabha Candidates List:उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा की आठ उम्मीदवारों की सूची ने सिर्फ उच्च सदन के समीकरण नहीं बदले हैं, बल्कि प्रदेश भाजपा के संगठन और योगी सरकार में आने वाले संभावित बदलावों की जमीन भी तैयार कर दी है। पार्टी ने इस बार उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए किसी भी मौजूदा सदस्य को दोहराने के बजाय प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह सहित संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे नेताओं को आगे किया है। ऐसे में 16 अक्टूबर के राज्यसभा चुनाव के बाद सबसे बड़ा सवाल यह रहेगा कि इन नेताओं की मौजूदा जिम्मेदारियों की जगह कौन लेगा।

भाजपा ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाया है। इनमें प्रकाश पाल प्रदेश भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष, प्रियंका सिंह रावत प्रदेश उपाध्यक्ष और राम प्रताप सिंह चौहान प्रदेश महामंत्री हैं। धर्मपाल सिंह योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री होने के साथ आंवला से विधायक हैं।

राज्यसभा पहुंचेंगे तो प्रदेश संगठन में बदलेंगे चेहरे

भाजपा की सूची का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भाजपा ने केवल राजनीतिक रूप से सक्रिय नेताओं को ही नहीं, बल्कि संगठन की मौजूदा जिम्मेदारियां संभाल रहे तीन चेहरों को भी संसद भेजने का फैसला किया है। प्रकाश पाल को जून 2026 में प्रदेश भाजपा के पिछड़ा वर्ग मोर्चे की जिम्मेदारी दी गई थी। राम प्रताप सिंह चौहान प्रदेश महामंत्री हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संगठनात्मक कामकाज से जुड़े हैं। प्रियंका सिंह रावत प्रदेश उपाध्यक्ष हैं।

तीनों के राज्यसभा पहुंचने की स्थिति में पार्टी के सामने संगठन में उनकी जगह और जिम्मेदारियों को लेकर निर्णय का सवाल होगा। विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश संगठन में होने वाली ये नियुक्तियां इसलिए भी महत्वपूर्ण होंगी क्योंकि इनके जरिए क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व का अगला संतुलन तय होगा। भाजपा ने राज्यसभा की सूची के जरिए एक साथ संसद के लिए नए चेहरे चुने और प्रदेश संगठन में अगले बदलाव की गुंजाइश भी पैदा कर दी।

धर्मपाल सिंह के जाने से सरकार में एक जगह खाली

धर्मपाल सिंह के नाम ने राज्यसभा चुनाव को प्रदेश सरकार से भी जोड़ दिया है। वह आंवला से विधायक और योगी सरकार में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री हैं। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने पर विधानसभा की सदस्यता छोड़नी होगी। इसके साथ ही सरकार में उनके विभाग और मंत्री पद को लेकर भी निर्णय करना पड़ेगा।

इससे विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावना पर राजनीतिक नजरें टिक गई हैं। हालांकि भाजपा या सरकार ने अभी मंत्रिमंडल में किसी बदलाव की घोषणा नहीं की है। इसलिए फिलहाल स्पष्ट तथ्य यही है कि धर्मपाल सिंह के राज्यसभा जाने की स्थिति में सरकार और विधानसभा, दोनों स्तर पर नई व्यवस्था करनी होगी।

आठों पुराने सांसद बाहर, भाजपा ने बदली पूरी संसदीय टीम

भाजपा ने सबसे बड़ा बदलाव यह किया कि उत्तर प्रदेश से कार्यकाल पूरा कर रहे भाजपा के सभी आठ राज्यसभा सदस्यों को दोबारा टिकट नहीं दिया। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा भी शामिल हैं। अन्य निवर्तमान सदस्यों में अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, बृजलाल और गीता शाक्य के नाम हैं। दिनेश शर्मा का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है, लेकिन वे अब अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल हैं।

इस तरह भाजपा ने राज्यसभा में अपने उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधित्व के लिए पूरी तरह नए चेहरे चुने हैं। खास बात यह है कि पार्टी ने केंद्रीय स्तर पर चर्चित नामों के बजाय प्रदेश की राजनीति और संगठन से जुड़े चेहरों को प्राथमिकता दी है।

हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाए जाने से केंद्र में उनकी आगे की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि पार्टी ने इन दोनों को टिकट नहीं देने का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है, इसलिए उनके भविष्य को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय अगले फैसलों का इंतजार करना होगा।

राज्यसभा की सूची से संगठन गढ़ने की कोशिश

भाजपा की सूची में तीन ओबीसी, दो दलित और तीन सामान्य वर्ग के चेहरे हैं। ओबीसी प्रतिनिधित्व में लोधी, पाल और कुर्मी समुदाय शामिल हैं, जबकि सामान्य वर्ग में दो ब्राह्मण और एक ठाकुर चेहरा है। दो महिलाएं, प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार शामिल हैं।

हालांकि इस सूची का राजनीतिक महत्व केवल जातीय प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है। जिन नेताओं को चुना गया है, उनमें संगठनात्मक अनुभव को भी जगह मिली है। प्रकाश पाल और राम प्रताप सिंह चौहान जैसे नेताओं को राज्यसभा भेजने से प्रदेश भाजपा के संगठन में नए चेहरों के लिए जगह बनेगी। दूसरी तरफ विद्यासागर सोनकर और प्रियंका सिंह रावत जैसे पूर्व जनप्रतिनिधियों को फिर से राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका मिली है। यही बदलाव आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में अगली पंक्ति के नेताओं को सामने लाने की प्रक्रिया से जुड़ता है।

बरेली से दो नाम, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी को भी जगह

भाजपा ने क्षेत्रीय संतुलन को भी साधने की कोशिश की है। धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार दोनों बरेली क्षेत्र से आते हैं। धर्मपाल सिंह लोधी समाज से हैं, जबकि श्रुति गंगवार पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी हैं।
पूर्वांचल से विद्यासागर सोनकर और गोपी कृष्ण पांडेय जैसे नाम हैं। राम प्रताप सिंह चौहान को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संगठनात्मक कामकाज का अनुभव है। वहीं बाराबंकी की पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत अवध क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं।

आठवीं सीट के साथ संगठन की परीक्षा भी

राज्यसभा चुनाव में भाजपा के सामने आठ सीटें जीतने का लक्ष्य है। विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों में भाजपा और उसके सहयोगी आठ सीटों तक पहुंचने की स्थिति में बताए जा रहे हैं, जबकि क्रॉस वोटिंग और अनुपस्थिति चुनाव के गणित को प्रभावित कर सकती है।

इसलिए 16 अक्टूबर का चुनाव भाजपा के लिए सिर्फ राज्यसभा में आठ नए चेहरे भेजने का मामला नहीं रहेगा। उसके बाद प्रदेश संगठन और सरकार में होने वाले फैसले भी महत्वपूर्ण होंगे। एक तरफ राज्यसभा में नई टीम होगी, दूसरी तरफ संगठन में नई जिम्मेदारियां तय करनी होंगी और धर्मपाल सिंह के स्थान पर सरकार में भी निर्णय लेना होगा।

राज्यसभा सूची के बाद अब इन फैसलों पर नजर

धर्मपाल सिंह
राज्यसभा जाने पर मंत्री पद और आंवला विधानसभा सीट का क्या होगा?

प्रकाश पाल
ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी कौन संभालेगा?

राम प्रताप सिंह चौहान
प्रदेश महामंत्री और पश्चिमी यूपी की संगठनात्मक जिम्मेदारी में क्या बदलाव होगा?

प्रियंका सिंह राव
प्रदेश उपाध्यक्ष की जगह संगठन किस चेहरे को आगे करेगा?

हरदीप पुरी-बीएल वर्मा
राज्यसभा टिकट नहीं मिलने के बाद केंद्र में उनकी अगली भूमिका क्या होगी?

Updated on:
05 Oct 2026 07:05 pm
Published on:
05 Oct 2026 06:55 pm