वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से उत्तर प्रदेश की आम जनता खासकर किसानों और कामगारों को बहुत उम्मीदें हैं। चूंकि उत्तर प्रदेश में चुनाव भी हो रहे हैं तो यूपी की जनता को इस बात की आस है कि उसे कुछ ज्यादा हासिल हो सकता है। किसान आंदोलन को देखते हुए इस बात की भी उम्मीद की जा रही है कि केन्द्र सरकार किसानों की नाराज़गी दूर करने और उनके हितों के लिए बजट में कुछ खास और अलग व्यवस्था करेगी।
Opinion: विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच 1 फरवरी को देश का आम बजट संसद में पेश होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से उत्तर प्रदेश की आम जनता खासकर किसानों और कामगारों को बहुत उम्मीदें हैं। चूंकि उत्तर प्रदेश में चुनाव भी हो रहे हैं तो यूपी की जनता को इस बात की आस है कि उसे कुछ ज्यादा हासिल हो सकता है। वहीं किसान आंदोलन को देखते हुए इस बात की भी उम्मीद की जा रही है कि केन्द्र सरकार किसानों की नाराज़गी दूर करने और उनके हितों के लिए बजट में कुछ खास और अलग व्यवस्था करेगी। इसका सीधा फायदा उत्तर प्रदेश के करीब साढ़े तीन करोड़ किसानों को मिल सकता है। हालांकि सरकार पहले की विवादित तीनों कृषि कानूनों को वापस ले चुकी है। लेकिन किसानों को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि में इस बार कुछ और बढ़ोतरी हो सकती है।
इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य समेत कृषि से जुड़े और भी तमाम योजनाओं पर यूपी के किसानों को उम्मीद रहेगी। वहीं क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज से उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के लिए, जहाँ किसानों के साथ ही श्रमिकों और मजदूरों की जनसंख्या सबसे अधिक है। वहां अगर मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, आयुष्मान भारत योजना जैसे महत्वपूर्ण योजनाओं में कुछ भी नया और अच्छा होता है तो इसका सबसे ज्यादा फायदा यूपी की आम गरीब जनता को होगा।
वहीं कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने उत्तर प्रदेश में तबाही मचा दी थी। 22 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाला प्रदेश में इसकी सबसे ज्यादा मार मध्यम वर्ग और गरीबों पर पड़ी है। करोड़ों लोग उससे उबर नहीं सके हैं और उनकी रोजरोटी का संकट आज तक बना हुआ है। इसलिए अगर बजट में निम्न वर्ग और मध्यम वर्ग को राहत पहुंचाने वाले कुछ नये प्रावधान किये जाते हैं तो उसका भी सबसे ज्यादा फायदा उत्तर प्रदेश को मिलेगा।
वहीं अगर बजट में टैक्स छूट की लिमिट में कोई बदलाव करती है ये भी एक स्वागत योग्य कदम होगा। आपको बता दें कि 8 साल पहले इस लिमिट को बढ़ाया गया था। उस समय इस लिमिट को 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख किया गया था। उम्मीद है कि मध्यम वर्ग के लोगों को राहत पहुँचाने के लिए इस लिमिट को 2.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख तक कर सकती है।