CM Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में सपा शासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अनिल यादव प्रकरण और फर्जी डिग्री का जिक्र करते हुए वर्तमान सरकार की पारदर्शिता पर जोर दिया।
लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लोकभवन में नव चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र बांटे। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के माध्यम से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के लिए 357 कनिष्ठ विश्लेषक (औषधि) तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के लिए 252 दंत स्वास्थ्य विज्ञानी चयनित हुए। इस मौके पर उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्ववर्ती सपा सरकार (2012-2017) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'जिसकी खुद की डिग्री फर्जी थी, वह आयोग का चेयरमैन बनकर सेलेक्शन कर रहा था। अराजकता होती थी, पैसे का लेन-देन होता था, भर्ती नहीं हो पाती थी।'
अनिल यादव ज्वाइनिंग के समय से लेकर यूपी लोक सेवा आयोग में भर्तियों तक में विवादों में रहे। जस्टिस टीएस ठाकुर और जस्टिस वी. गोपाला गौड़ा की बेंच ने अनिल यादव का अपॉइंटमेंट कैंसिल करने के ऑर्डर पर मुहर लगाते हुए कहा कि उनके अपॉइंटमेंट में सारे प्रोसेस नहीं अपनाए गए हैं। कोर्ट ने कहा, 'ये संवैधानिक पद है और कोई राजनीतिक नियुक्ति नहीं है। सरकार को यूपीपीएससी अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के लिए 83 आवेदनों की जांच करते समय तय प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था। इसके बाद बेंच ने सारी दलीलें सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी थी।
योगी ने एक वास्तविक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि गोरखपुर में एक मेरिट वाले युवा को पुलिस भर्ती में नियुक्ति पत्र नहीं मिलने से उसने आत्महत्या कर ली। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले न्यायालय को हर भर्ती प्रक्रिया पर स्टे लगाना पड़ता था और तीखी टिप्पणियां करनी पड़ती थीं।
उन्होंने बताया कि पिछले 9 वर्षों में 2.20 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती हुई, जिसमें 2025 में अकेले 60,244 युवाओं का एक साथ चयन और ट्रेनिंग शामिल है। प्रदेश में कुल 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। अगले एक वर्ष में 1.5 लाख से अधिक पदों पर भर्ती पूरी होने की उम्मीद है, जिसमें UPSSSC के 32,000+, UPPSC के 15,000 और पुलिस भर्ती बोर्ड के 45,000+ पद शामिल हैं।
खाद्य सुरक्षा और औषधि विभाग में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। औषधि परीक्षण प्रयोगशालाएं 5 से बढ़कर 18 हो गई हैं, जबकि खाद्य सुरक्षा लैब्स 6 से बढ़कर 18 हो गई हैं। कनिष्ठ विश्लेषकों की संख्या 44 से बढ़कर 401 हो गई है। अब हर मंडल स्तर पर आधुनिक लैब उपलब्ध होने से नमूना जांच क्षमता कई गुना बढ़ गई है। CM योगी ने कहा कि पहले स्टाफ, लैब और उपकरणों की कमी के कारण मिलावट पर अंकुश नहीं लग पाता था। अब दूध, खाद्य तेल और मिठाई जैसी चीजों की सख्त जांच हो रही है। उन्होंने मिलावट को ‘सोशल क्राइम’ करार देते हुए दोषियों की सार्वजनिक शर्मिंदगी का सुझाव दिया।
मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी तेज प्रगति हुई है। 2017 से पहले सीमित संख्या वाले मेडिकल कॉलेज अब 81 (2 AIIMS सहित) हो गए हैं और हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज का लक्ष्य तेजी से पूरा हो रहा है। पारदर्शिता पर जोर देते हुए CM ने कहा, 'आज भर्ती बोर्ड के चेयरमैन आपके बीच बैठे हैं, लेकिन आप उन्हें पहचानते तक नहीं। यही सच्ची पारदर्शिता है।' उन्होंने कहा कि नीयत साफ और नीति स्पष्ट होने पर परिणाम खुद-ब-खुद आते हैं।
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