UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार के बाद नए मंत्रियों के विभागों के बंटवारे, संगठनात्मक बदलाव और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर अहम चर्चा हुई।
CM Yogi Delhi Meeting: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को अचानक दिल्ली पहुंचे, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में चर्चा हुई। इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में हुए यूपी कैबिनेट विस्तार के बाद यह पहली बड़ी बैठक थी।
10 मई को योगी सरकार में 6 नए मंत्रियों को शामिल किया गया था, जबकि दो मंत्रियों को प्रमोशन देकर स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया। हालांकि पांच दिन बीत जाने के बावजूद नए मंत्रियों को विभाग नहीं दिए गए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री ने दिल्ली पहुंचकर इसी मुद्दे पर शीर्ष नेतृत्व से राय-मशविरा किया। माना जा रहा है कि विभागों के बंटवारे में कई स्तरों पर संतुलन साधने की कोशिश चल रही है।
अमित शाह से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री योगी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान संगठनात्मक बदलाव, आगामी रणनीति और सरकार-संगठन के तालमेल पर चर्चा हुई। यह भी माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री जल्द ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात कर सकते हैं।
भाजपा नेतृत्व अब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गया है। माना जा रहा है कि योगी सरकार का यह कैबिनेट विस्तार पूरी तरह चुनावी रणनीति के तहत किया गया है। नए मंत्रियों के जरिए भाजपा ने क्षेत्रीय, सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है। दिल्ली में हुई बैठकों में इसी रणनीति को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।
सरकार ने नए मंत्रियों को दफ्तर तो आवंटित कर दिए हैं, लेकिन विभागों का फैसला अब तक लंबित है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कई बड़े विभागों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। ऐसे में भाजपा के सबसे मजबूत रणनीतिकार माने जाने वाले अमित शाह को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा। उत्तर प्रदेश में अब मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों समेत कुल 60 मंत्री हो चुके हैं, इसलिए विभागों का संतुलन साधना चुनौती बन गया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी की कैबिनेट मंत्री के रूप में वापसी को केंद्रीय नेतृत्व के भरोसे से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने उनके जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश और संगठन दोनों को मजबूत संदेश देने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में उन्हें चुनावी रणनीति में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
समाजवादी पार्टी से बगावत कर भाजपा के करीब आए मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर भाजपा ने बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है। यह फैसला सीधे तौर पर अमित शाह के पुराने वादे को पूरा करने के रूप में देखा जा रहा है। इससे ब्राह्मण वोटबैंक को साधने की कोशिश भी मानी जा रही है।
नई टीम में कृष्णा पासवान को शामिल कर भाजपा ने दलित और महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की कोशिश की है। वहीं हंसराज विश्वकर्मा को मंत्रिमंडल में जगह देकर पूर्वांचल और कारीगर वर्ग को साधने का प्रयास किया गया। सुरेंद्र दिलेर को सबसे युवा मंत्री बनाकर वाल्मीकि समाज को संदेश देने की रणनीति अपनाई गई है।
सोमेंद्र तोमर को स्वतंत्र प्रभार देकर भाजपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गुर्जर समाज को साधने की कोशिश की है। वहीं अजीत पाल सिंह को प्रमोशन देकर पाल समाज के वोटबैंक पर फोकस किया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब 2027 की तैयारी जातीय समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन के आधार पर आगे बढ़ा रही है।
दिल्ली में हुई बैठकों के बाद अब उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में बड़े बदलावों की अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों का दावा है कि सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर नई जिम्मेदारियां तय की जा सकती हैं। आने वाले दिनों में विभागों का बंटवारा और संगठनात्मक फेरबदल यूपी की राजनीति में बड़ा संदेश देने वाला साबित हो सकता है।