
Congress Hoardings: उत्तर प्रदेश की सियासत में कांग्रेस के नए होर्डिंग चर्चा का विषय बन गए हैं। लखनऊ, अमेठी, रायबरेली और सुल्तानपुर में लगाए गए पोस्टरों पर लिखे नारे ‘200 सीट हक है हमारा’ और ‘यूपी को है राहुल गांधी पर भरोसा’ ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इन नारों को समाजवादी पार्टी के साथ इंडी गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस के रुख से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इन होर्डिंग के जरिए औपचारिक रूप से सीटों की मांग घोषित किए जाने की पुष्टि अलग से होना बाकी है।
होर्डिंग पर 200 सीटों का नारा ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन की रणनीति और सहयोगी दलों के बीच सीटों के तालमेल को लेकर चर्चाएं अहम मानी जा रही हैं। राजनीतिक हलकों में इसे कांग्रेस की मजबूत दावेदारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यदि कांग्रेस की ओर से समाजवादी पार्टी के सामने 200 सीटों की मांग औपचारिक रूप से रखी जाती है, तो गठबंधन के भीतर बातचीत और सीटों के बंटवारे का मुद्दा खासा महत्वपूर्ण हो सकता है।
पोस्टरों पर ‘यूपी को है राहुल गांधी पर भरोसा’ का नारा कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का प्रमुख संदेश बनकर उभरा है। अमेठी और रायबरेली जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों के साथ लखनऊ और सुल्तानपुर में होर्डिंग लगाए जाने को पार्टी की छवि और जनाधार को लेकर दिए जा रहे संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इन पोस्टरों के पीछे पार्टी नेतृत्व की आधिकारिक रणनीति क्या है, यह स्पष्ट होना बाकी है।
होर्डिंग पर राहुल गांधी के साथ इमरान मसूद और सोनिया गांधी-प्रियंका गांधी की तस्वीरें दिखाई देने की बात सामने आई है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तस्वीर न होने और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की जगह आराधना मिश्रा की तस्वीर अपेक्षाकृत छोटी होने को लेकर भी चर्चा हो रही है। पोस्टर में नेताओं की तस्वीरों का आकार और चयन राजनीतिक संदेश के लिहाज से अहम माना जाता है, लेकिन केवल तस्वीरों के आधार पर किसी नेता की भूमिका या महत्व को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
फिलहाल इन होर्डिंग ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की चुनावी महत्वाकांक्षा और समाजवादी पार्टी के साथ संभावित सीट बंटवारे को लेकर बहस तेज कर दी है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि कांग्रेस नेतृत्व इन नारों पर क्या रुख अपनाता है और गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों की प्रतिक्रिया प्रदेश की सियासत में नई तस्वीर साफ कर सकती है।