लखनऊ यूनिवर्सिटी में सरस्वती पूजन से सत्र की शुरुआत करने पर कुछ मौलानाओं ने आपत्ति जताई है।
लखनऊ. लखनऊ यूनिवर्सिटी में सरस्वती पूजन से सत्र की शुरुआत करने पर कुछ मौलानाओं ने आपत्ति जताई है। मौलाना फजले मनान ने कहा है कि एक धर्म विशेष को ध्यान में रखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ये फैसला लिया जबकि वहां हर धर्म के बच्चे पढ़ने आते हैं। वहीं मौलाना सैफ अब्बास ने कहा है कि यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट का ध्यान पढ़ाई और अनुशासन बनाए रखने पर नहीं है बल्कि धार्मिक मतभेद पैदा करने की ये कोशिश है। बता दें कि एलयू में नया सत्र शुरू होने से पहले 'सरस्वती पूजा' का आयोजन किया गया। पहले विश्वविद्यालय के गेट नंबर एक के पास स्थित सरस्वती वाटिका में का आयोजन किया गया।
'यूनिवर्सिटी की मंशा क्या है'
मौलाना फजले मनान ने कहा कि यूनिवर्सिटी के कुलपति की आखिर मंशा क्या है। क्या वे केवल एक धर्म विशेष को ध्यान में रखते हुए फैसले लेना चाहते हैं। इस तरफ के फैसलों से छात्र व शिक्षकों में आपस में तनाव बढ़ने के भी चांस रहते हैं।वहीं मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि हाल ही में यूनिवर्सिटी में इतना बड़ा बवाल हुआ लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन उसे सुलझाने के बजाए धार्मिक मदभेद पैदा करने की कोशिश कर रहा है। सीपीआई के राष्ट्रिय सचिव व एलयू छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारी अतुल अनजान ने कहा कि छात्रों व शिक्षकों पर कुछ भी थोपना नहीं चाहिए। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट को छात्रहित में सोचना चाहिए।
एलयू प्रशासन का तर्क
यूनिवर्सिटी प्रशासन से जु़ड़े अधिकारियों ने कहा कि नया सत्र शुरू होने से पहले सरस्वती पूजा का आयोजन कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा, 'अन्य राज्यों में भी कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इस तरह के आयोजन होते हैं।' विश्वविद्यालय के सभी अधिकारी और शिक्षक इस पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। लखनऊ क्रिस्चन कॉलेज में सत्र शुरू होने से पहले चर्च में प्रार्थना की तर्ज पर लखनऊ विश्वविद्यालय में यह परंपरा शुरू की गई है। शिक्षकों ने कहा कि सरकारी संस्थानों में नए प्रॉजेक्ट्स या नई बिल्डिंगों के उद्घाटन के से पहले भी इस तरह की प्रथाएं प्रचलित हैं।
जानें क्या बोले एलयू वीसी
कुलपति एसपी सिंह, 'मुझे नए सत्र की शुरुआत से पहले मां सरस्वती की पूजा में कुछ गलत नहीं लगता।' उन्होंने कहा कि सरस्वती ज्ञान की देवी हैं और नई शुरुआत से पहले उनकी पूजा करने से हमारा दिमाग शिक्षा लेने के लिए और सीखने के लिए प्रेरित होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अधिकारियों के लिए कार्यक्रम में शामिल होना अनिवार्य नहीं था लेकिन सभी को आमंत्रित किया गया था।