Dadi Doli Utsav: लखनऊ में झुंझुनू वाली दादी डोली उत्सव की शुरुआत भव्य मंगल कलश यात्रा से हुई, जिसमें 311 सौभाग्यवती महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर भाग लिया। भजनों की गूंज और भक्तों का सैलाब आयोजन की शोभा बढ़ा रहा था। उत्सव में दो असहाय जोड़ों का विवाह और नारायणी मानस पाठ मुख्य आकर्षण रहे।
Dadi Doli festival Yatra: झुंझुनू वाली दादी जी मित्र मंडल की ओर से आयोजित झुंझुनू वाली दादी डोली उत्सव का शुभारंभ एक भव्य मंगल कलश यात्रा से हुआ। इस आयोजन में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। 311 सौभाग्य शाली महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर, हाथों में मेंहदी सजाए, और सिर पर दादी जी के नाम का कलश धारण करते हुए चुनरी की साड़ी में सजी मंगल यात्रा निकाली। यह यात्रा महानगर के हनुमान मंदिर से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए निकली। जिधर यह मंगल कलश यात्रा पहुंची, उधर "दादी की जय जयकार" की गूंज सुनाई दी। रास्ते में जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई और भक्तों ने यात्रा का स्वागत किया। इस दौरान मंच से भजन गायकों ने भक्तिमय प्रस्तुतियां दीं।
भजन गायक संजय शर्मा ने "दादी का दरबार सुहाना लगता है" और "म्हारी मैया झुंझुनू वाली थारी जग में शान निराली..." जैसे भजनों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। वहीं, पवन मिश्रा ने "ओ पालन हारी, ओ मैया प्यारी..." और "तेरे जैसा कोई भी ना दादी, तू दीपक है हम सब है बाती..." जैसे भजनों से श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। भक्तों में दिनेश मेघदूत अग्रवाल, पूनम अग्रवाल, महेश गर्ग, जया गर्ग, सतीश अग्रवाल, रूपेश अग्रवाल, अनुराग साहू, आशीष अग्रवाल, मोनी और शरद अग्रवाल जैसे श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर झूमते नजर आए।
उत्सव में श्री नारायणी चरित्र मानस पाठ का आयोजन पूनम धानुका मोर के भावपूर्ण मधुर वाणी में हुआ। इस दौरान दो असहाय वर-वधु का विवाह भी संपन्न कराया गया। आयोजन समिति ने इस पहल को बेहद पवित्र और दादी जी की कृपा का प्रतीक बताया।
सुबह 11 बजे प्रारंभ हुई इस भव्य मंगल कलश यात्रा में 311 सौभाग्यवती महिलाओं ने भाग लिया। सोलह श्रृंगार और लाल चुनरी पहने इन महिलाओं ने सिर पर कलश धारण किए। पांच रथों पर सजी झांकियां, गाजे-बाजे और भजनों की गूंज ने यात्रा को अत्यंत खास बना दिया। मार्ग में भक्तों द्वारा जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई और श्रद्धालुओं ने दादी जी की झांकी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
मंगल कलश यात्रा के बाद नारायणी मानस पाठ का आयोजन किया गया। इसमें 251 से अधिक परिवारों ने सहभागिता की और भक्ति के सागर में डूब गए। भक्तों ने एक साथ मंगल पाठ किया, जिससे पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया।
दादी के विवाह का वर्णन: श्री नारायणी चरित्र मानस पाठ के दौरान चतुर्थ अध्याय में दादी जी के विवाह का वर्णन सुनाया गया। इस भावुक क्षण ने भक्तों को भक्ति में और भी गहराई से जोड़ दिया।
झुंझुनू वाली दादी डोली उत्सव ने भक्ति, सेवा और सामूहिकता का संदेश दिया। मंगल कलश यात्रा, भजन-कीर्तन, और असहाय जोड़ों का विवाह जैसे आयोजन न केवल धार्मिक भावनाओं को बढ़ावा देते हैं बल्कि समाज को एकता और प्रेम का संदेश भी देते हैं।