Deadly Chinese Manja Injures Two in Lucknow: लखनऊ में प्रतिबंधित चाइनीज मांझा फिर जानलेवा साबित हुआ। हुसैनगंज और नाका पुल इलाके में हुए दो हादसों में कर्मचारी और छात्र घायल हो गए, जिनकी गर्दन और चेहरा कट गया।
Chinese Manja Lucknow Accident: राजधानी लखनऊ में प्रतिबंधित चाइनीज मांझा एक बार फिर जानलेवा साबित हो रहा है। शहर के अलग-अलग इलाकों में हुए दो अलग हादसों में एक कर्मचारी और एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों ही घटनाओं में सड़क पर उड़ते चाइनीज मांझे ने अचानक लोगों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे उनकी गर्दन और चेहरे पर गहरे घाव हो गए। घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
पहला हादसा हुसैनगंज इलाके में हुआ, जहां पशुपालन विभाग में कार्यरत कर्मचारी रामखेलावन शाम के समय अपनी स्कूटी से घर लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही वह सड़क से गुजर रहे थे, तभी अचानक हवा में उड़ता चाइनीज मांझा उनकी गर्दन से लिपट गया।
मांझा इतना तेज था कि कुछ ही सेकंड में उनकी गर्दन कट गई और खून बहने लगा। अचानक हुए इस हादसे से रामखेलावन घबरा गए और स्कूटी रोककर सड़क किनारे बैठ गए। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उनकी मदद की और उन्हें पास के सिविल अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने से बड़ा खतरा टल गया, लेकिन उनकी गर्दन पर गहरा घाव आया है। फिलहाल अस्पताल में उनका उपचार जारी है।
इसी तरह की दूसरी घटना नाका पुल के पास हुई। यहां बाइक से जा रहे एक छात्र के चेहरे पर अचानक हवा में उड़ता चाइनीज मांझा आ गिरा। मांझे के तेज धारदार धागे ने छात्र के चेहरे को बुरी तरह जख्मी कर दिया। घटना के बाद छात्र ने तुरंत बाइक रोकी और आसपास के लोगों से मदद मांगी। स्थानीय लोगों ने उसे नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसके चेहरे पर दो टांके लगाए। इस घटना के बाद इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोगों ने प्रशासन से ऐसे जानलेवा मांझे की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की।
लखनऊ में चाइनीज मांझे के कारण होने वाले हादसे लगातार सामने आ रहे हैं। यह मांझा कांच और रसायनों से तैयार किया जाता है, जिससे इसकी धार बहुत तेज हो जाती है। यही वजह है कि यह इंसानों और जानवरों दोनों के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब यह मांझा हवा में उड़ता हुआ सड़कों तक पहुंच जाता है तो राहगीरों और बाइक सवारों के लिए जानलेवा बन जाता है। कई बार यह गर्दन, हाथ या चेहरे पर गहरे घाव कर देता है।
राजधानी में इससे पहले भी कई हादसे सामने आ चुके हैं। कई मामलों में बाइक सवारों की गर्दन कटने से गंभीर चोटें आई हैं। कुछ मामलों में तो लोगों की जान तक चली गई है। इसके बावजूद प्रतिबंध के बाद भी शहर में चोरी-छिपे चाइनीज मांझे की बिक्री जारी है। बाजारों और गलियों में इसे गुप्त रूप से बेचा जा रहा है, जिससे खतरा लगातार बना हुआ है।
प्रशासन द्वारा चाइनीज मांझे की बिक्री और उपयोग पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद कुछ दुकानदार अधिक मुनाफे के लालच में इसे बेचने से बाज नहीं आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई इलाकों में खुलेआम चाइनीज मांझा बेचा जाता है, लेकिन उस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हो रही है। यही कारण है कि आए दिन इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
लगातार हो रहे हादसों के कारण शहरवासियों में डर का माहौल बन गया है। खासकर बाइक और स्कूटी से चलने वाले लोग अब अधिक सतर्क रहने लगे हैं। कई लोगों का कहना है कि सड़क पर चलते समय अचानक मांझे का दिखाई देना मुश्किल होता है, जिससे दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। कुछ लोग अब गर्दन पर स्कार्फ या कपड़ा बांधकर चलने लगे हैं ताकि मांझे से बचाव हो सके।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि चाइनीज मांझे की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए कड़ी कार्रवाई की जाए। बाजारों में नियमित जांच की जाए और दोषी दुकानदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। इसके साथ ही लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है ताकि वे प्रतिबंधित मांझे का उपयोग न करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि चाइनीज मांझा न केवल इंसानों बल्कि पक्षियों के लिए भी बेहद खतरनाक होता है। कई बार पक्षी उड़ते समय इसमें फंसकर घायल हो जाते हैं या उनकी मौत तक हो जाती है। पर्यावरण प्रेमियों का भी मानना है कि इस तरह के मांझे का उपयोग पूरी तरह बंद होना चाहिए और केवल सुरक्षित धागों का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
राजधानी में लगातार सामने आ रहे ऐसे हादसे प्रशासन के लिए भी चुनौती बनते जा रहे हैं। यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं की गई तो भविष्य में और गंभीर घटनाएं हो सकती हैं। फिलहाल घायल कर्मचारी और छात्र का इलाज चल रहा है, लेकिन इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझा बाजारों तक कैसे पहुंच रहा है। शहरवासियों का मानना है कि जब तक इसकी बिक्री पर पूरी तरह लगाम नहीं लगाई जाएगी, तब तक सड़कों पर इस तरह के जानलेवा हादसों का खतरा बना रहेगा।