- आबकारी विभाग के आंकड़े- जनवरी में आबकारी से आया 3,472 करोड़ रुपए राजस्व
पत्रिका न्यूज नेटवर्क.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में देशी शराब (Desi Sharab) की एक चौथाई बोतल यानी 'पौव्वा' ने बिक्री के नए कीर्तिमान बनाए हैं। यह मार्च में खत्म हो रहे मौजूदा वित्तीय वर्ष में राजस्व संग्रह का परिणाम है या फिर कोरोना काल में उपजी हताशा। पता नहीं, लेकिन, आबकारी विभाग ने जो आंकड़ा जारी किया है उसके मुताबिक बीते केवल एक महीने में पौवा की बिक्री 65 लाख 'पेटी' (डिब्बों) तक बढ़ गई। 15 महीने पहले तक यह केवल 35 लाख थी। एक 'पेटी' में 50 क्वार्टर होते हैं, प्रत्येक की औसत कीमत 65 रुपये है। 'पौव्वा' की बिक्री प्रति माह औसतन 2,275 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इस साल जनवरी में आबकारी का संग्रह शुल्क 3,472 करोड़ रुपये था, जो 2020 जनवरी की तुलना में 127 प्रतिशत ज्यादा है। जनवरी 2020 में 1,694 करोड़ रुपये की इसकी बिक्री हुई थी। शराब पर उत्पाद शुल्क राज्य के राजस्व की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और पौव्वा इसमें सबसे आगे है।
अवैध शराब की बिक्री पर प्रतिबंध से आया उछाल
राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव, आबकारी, संजय भूसरेड्डी ने 'पौव्वा' की बिक्री में भारी उछाल के कारणों को गिनाते हुए कहा कि अवैध शराब पर सख्त कार्रवाई और रोक ने शराब और शराब माफियाओं का सफाया कर दिया है। इसीलिए उपभोक्ता सुरक्षित और बेहतर गुणवत्ता वाली देशी शराब खरीद रहे हैं। प्रदेश में कुल 27,500 में से देशी शराब की 15,000 से अधिक दुकानें हैं।
प्रवर्तन विंग की सक्रियता रंग लायी
भूसरेड्डी ने बताया कि ब्रिटिश काल से, गंगा, यमुना और अन्य प्रमुख नदियों और तराई क्षेत्र के किनारे शराब माफियाओं के लिए सुरक्षित स्थान रहे हैं। वे इन क्षेत्रों में अवैध शराब का निर्माण कर नौकाओं के माध्यम से इसकी तस्करी करते थे और भारी मुनाफा कमाते थे। लेकिन अब प्रवर्तन विंग की सक्रियता की वजह से शराब माफिया का लगभग सफाया हो चुका है।