
लखनऊ. यूपी कैडर के वरिष्ठ आईपीएस डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला राम मंदिर निर्माण की शपथ लेकर बड़े विवाद में घिर गए हैं। उनका इससे जुड़ा एक वीडियो भी काफी वायरल हो रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ से विवाद बढ़ने पर डीजी होमगार्ड सूर्य कुमार को तलब करते हुए जवाब देने के लिए कहा है। इससे पहले भी सूर्य कुमार का नाम काफी सुर्खियों में रहा है।
कौन हैं आईपीएस सूर्य कुमार
सूर्य कुमार 1982 यूपी कैडर के आईपीएस अफसर है। जो वर्तमान में डीजी होमगार्ड मुख्यालय, लखनऊ पद पर तैनात हैं। पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह के रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ आईपीएस सूर्य कुमार शुक्ला का नाम डीजीपी की रेस में था। हालांकि वरिष्ठ आईपीएस ओपी सिंह के नाम पर मोहर लगने के बाद सूर्यकुमार शुक्ला इस रेस से बाहर हो गए थे।
सपा सरकार में खुब की तरक्की
सपा सरकार के दौरान साल 2013 में वरिष्ठ आईपीएस सूर्य कुमार को प्रेसिडेंट पुलिस मैडल से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं सपा सरकार में सूर्य कुमार को डीजी एसआईटी बनाया गया था, इसके बाद उनका डीजी पोस्ट पर प्रमोशन हुआ।
इससे पहले साल 1999 में सूर्य कुमार को उत्कृष्ट सेवा के लिए पुलिस मेडल मिल चुका है। वहीं सूर्य कुमार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनपद गोरखपुर के एसएसपी पद की कमान भी संभाल चुके हैं।
यह है पूरा विवाद
लखनऊ विश्वविद्यालय में डीजी ने लिया राम मंदिर बनवाने का संकल्प
लखनऊ यूनिवर्सिटी में गत 28 जनवरी को 'अखिल भारतीय समग्र विचार पृष्ठ' कार्यक्रम के तहत राम मंदिर निर्माण को लिए एक सेमिनार का आयोजन किया गया थ। इसमें 1982 यूपी कैडर के आईपीएस ऑफिसर व होमगार्ड डीजी सूर्यकुमार शुक्ला ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है, इसमें डीजी सूर्य कुमार अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की शपथ ले रहे हैं।साथ ही यहां जय श्रीराम के नारे लगाए।
मुख्यमंत्री ने मांगा डीजी से जवाब
वरिष्ठ आईपीएस द्वारा राम मंदिर निर्माण से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने और विवादित शपथ में शामिल होने से सरकार की काफी किरकिरी हो रही है। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से डीजी सूर्य कुमार शुक्ल को तलब किया है। साथ ही उनसे पूरे प्रकरण पर सफाई देने के लिए कहा है।
बचाव में उतरे डीजी
पत्रिका से बातचीत में डीजी सूर्य कुमार शुक्ल ने कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम में अतिथि के रुप में आमंत्रित किया गया था। जहां उन्होंने उच्चतम न्यायालय के सुझाव के अनुरुप दोनों पक्षों की आपसी सहमति ने राम मंदिर विवाद को सुलझाया जा सकता है। इसी विचार पर वहां मौजूद सभी लोगों ने शांतिपूर्वक वातावरण बनाकर भविष्य में इस समस्या का समाधान करने का संकल्प लिया।