5 नवंबर को धनतेरस है, आदि वैद्य भगवान धनवन्तरि की जयंती भी इसी दिन है, इसे कामेश्वरी जयंती भी कहा जाता है..
लखनऊ. 5 नवंबर को धनतेरस है। आदि वैद्य भगवान धनवन्तरि की जयंती भी इसी दिन है। इसे कामेश्वरी जयंती भी कहा जाता है। निरोगी काया के लिए इस दिन धनवंतरि की पूजा विशेष फल देने वाली है। इस दिन दान व पूजन का भी विशेष महत्व है। वैसे तो भगवान धनवन्तरि की पूजा किसी भी समय की जा सकती है, लेकिन अगर यह पूजा शुभ मुहूर्त देखकर की जाये तो और भी फलदायी हो जाती है।
राजधानी के चौक निवासी ज्योतिष के जानकार आचार्य नीरज व्यास बताते हैं कि 4 नवम्बर की रात 3 बजकर 56 मिनट से ही त्रयोदशी लग जाएगी, जो 5 नवम्बर की रात 9 बजकर 02 मिनट तक रहेगी। शाम का वक्त भगवान धनवन्तरि की पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। विधि-विधान से पूजा कर उनसे निरोगी शरीर का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। कुछ लोग इस भगवान धनवंतरि की पूजा करने के बाद ही नये सिरे से दवाइयां लेना शुरू करते हैं।
लक्ष्मी कृपा के लिए विष्णु-लक्ष्मी की करें पूजा
आचार्य नीरज व्यास कहते हैं कि सोमवार को आदि वैद्य भगवान धनवंतरि का पूजा करना बेहद उत्तम माना जाता है। इसे कामेश्वरी जयंती भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिवत पूजन करने से सभी कामनाएं पूरी हो जाती हैं। धनतेरस पर लक्ष्मी कृपा पाने के लिए विष्णु-लक्ष्मी का पूजन करें।