लखनऊ

ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर और ऑक्सीजन सिलेंडर में क्या है फर्क, जानिए

Difference between oxygen concentrator and oxygen cylinder. ऑक्सीजन सिलेंडर को रिफिलिंग की आवश्यकता होती है, जबकि ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर बिजली की मदद से चौबीस घंटे काम कर सकते हैं।

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May 08, 2021
Oxygen Cylinder and Concentrator

लखनऊ. Difference between oxygen concentrator and oxygen cylinder. उत्तर प्रदेश में कोरोना (UP corona udpate) के प्रकोप को एक साल हो गया है, लेकिन आज हम इसके सबसे बुरे प्रभाव का सामना कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में बीते एक माह में कोरोना मरीजों के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। स्वास्थ्य व्यवस्था की इस दौरान पोल खुल कर सामने आ गई है। सबसे बड़ी किल्लत मेडिकल ऑक्सीजन की देखने को मिली है। गंभीर कोरोनावायरस मामलों की संख्या में वृद्धि की वजह से ऑक्सीजन की मांग बढ़ी है। कई जिलों में लोग अस्पताल परिसर के बाहर कतार लगाए खड़े देखें गए हैं, तो कई ऐसे मरीज हैं जो घर पर ही अपना इलाज करवा रहे हैं और ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर और सिलेंडर की मदद से सांस ले रहे हैं। लेकिन इन दोनों में फर्क क्या है। दरअसल ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर (oxygen concentrator), ऑक्सीजन सिलेंडर (oxygen cylinder) की तरह काम करते हैं। जो मास्क या नोसल ट्यूब के ज़रिए ऑक्सीजन सप्लाई करता है। हालांकि, सिलेंडर को रिफिलिंग की आवश्यकता होती है, जबकि ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर बिजली की मदद से चौबीस घंटे काम कर सकते हैं।

दो प्रकार के होते हैं कॉन्सेंट्रेटर्स-
ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स दो प्रकार के होते हैं। एक हैं कंटीन्यूअस फ्लो और दूसरा है पल्स (नाड़ी)। कंटीन्यूअस फ्लो ऑक्सीजन लगातार एक फ्लों में ऑक्सीजन सप्लाई देता रहता है, वो भी तब तक, जब तक इसे बंद न कर दें। वहीं पल्स डोस मरीज के सांस लेने के पैटर्न का आंकलन करता है और जब भी मरीज को ऑक्सीजन की कमी की जरूरत होती है वह उसे सप्लाई करता है। जब्कि ऑक्सीजन सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म होने के बाद इसे फिर से रिफिल करना होगा यानी ऑक्सीजन प्लांट पर ले जाकर सिलेंडर में फिर से ऑक्सीजन भरना होगा।

गंभीर मरीजों के लिए नाकाफी हैं ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर-

ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर पोर्टेबल होते हैं और उन्हें आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर उन मरीजों के लिए नाकाफी हैं, जो ज्यादा गंभीर बीमारियों से पीड़ित है, साथ में जिन्हें कोरोना हो गया है। क्योंकि ये कंसन्ट्रेटर्स केवल प्रति मिनट पांच-दस लीटर की ऑक्सीजन ही दे सकते हैं। और ऐसे गंभीर मरीजों को ज्यादा सप्लाई की जरूत होती है।

डाक्टरों की राय है कि जब मरीज का ऑक्सीजन लेवेल 92 प्रतिशत से कम हो जाता है, तब ऑक्सीजन सिलेंडर या ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर के जरिए ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जा सकता है। लेकिन स्थिति ज्यादा खराब होने व ऑक्सीजन सपोर्ट लगाने के बावजूद लेवेल गिरने पर मरीज को अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी है।

Published on:
08 May 2021 08:05 pm
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