नए साल के जश्न के दौरान राजधानी लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र में कानून व्यवस्था उस समय शर्मसार हो गई, जब नशे में धुत एक दरोगा ने ट्रैफिक ड्यूटी में लगे पुलिसकर्मियों को कार से रौंदने की कोशिश की। घटना ने पुलिस अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
New Year Celebration: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नए साल के जश्न के दौरान जहां पूरा शहर उत्सव और उल्लास के माहौल में डूबा हुआ था, वहीं 31 दिसंबर की देर रात एक शर्मनाक घटना ने पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया। हजरतगंज जैसे अति संवेदनशील और वीआईपी इलाके में एक नशे में धुत दरोगा ने न सिर्फ कानून व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को कार से रौंदने की कोशिश कर दी। इस घटना से कुछ देर के लिए इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना बुधवार देर रात की है, जब नए साल के स्वागत को लेकर हजरतगंज चौराहे और आसपास के क्षेत्रों में भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने इलाके में विशेष ट्रैफिक डायवर्जन लागू कर रखा था और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, देर रात एक कार तेज रफ्तार में अटल चौक की ओर बढ़ती हुई आई। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने जब कार चालक को रोकने का प्रयास किया और वाहन साइड में लगाने को कहा, तो चालक आक्रोशित हो गया। आरोप है कि चालक नशे की हालत में था और उसने पुलिसकर्मियों से अभद्र भाषा में बात शुरू कर दी। जब मौके पर मौजूद दरोगा ने उसे समझाने की कोशिश की, तो आरोपी ने उनके साथ गाली-गलौज करते हुए धक्का-मुक्की की और कार के शीशे चढ़ाकर मौके से भागने का प्रयास किया।
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई, जब आरोपी ने तेज रफ्तार में करीब 70 मीटर तक कार दौड़ा दी। इस दौरान उसने कई पुलिसकर्मियों को कुचलने का प्रयास किया। अचानक हुई इस घटना से मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। हालांकि, सतर्कता दिखाते हुए पुलिसकर्मियों ने तत्काल बैरियर लगाकर कार को रोकने की कोशिश की। कुछ ही पलों में कार को घेर लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। यदि समय रहते कार को नहीं रोका जाता, तो कोई बड़ी जनहानि भी हो सकती थी।
इसी दौरान डीसीपी ट्रैफिक कमलेश दीक्षित मौके पर ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण कर रहे थे। उन्होंने जब कार रोकने और स्थिति संभालने का प्रयास किया, तो आरोपी उनसे भी उलझ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपी ने डीसीपी ट्रैफिक से अभद्र भाषा का प्रयोग किया और वर्दी उतरवाने जैसी धमकी भी दी। इस व्यवहार से पुलिस महकमे की छवि को गहरा धक्का लगा, क्योंकि आरोपी कोई आम नागरिक नहीं बल्कि खुद पुलिस विभाग से जुड़ा हुआ था।
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को काबू में लिया और सरकारी जीप से हजरतगंज थाने भेजा। जांच में आरोपी की पहचान सौम्य जायसवाल के रूप में हुई, जो वर्तमान में बाराबंकी पुलिस लाइन में तैनात दरोगा है। जैसे ही आरोपी की पहचान सामने आई, पुलिस विभाग में भी खलबली मच गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल सूचना दी गई।
पुलिस द्वारा की गई तलाशी में आरोपी की कार से शराब की खाली और भरी बोतलें, कांच के गिलास और अन्य सामग्री बरामद की गई। इतना ही नहीं, कार के शीशों पर ब्लैक फिल्म लगी हुई थी, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। डैशबोर्ड के भीतर भी शराब रखी हुई मिली। इन सभी तथ्यों को देखते हुए पुलिस ने आरोपी की कार को सीज कर दिया है और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस ने आरोपी दरोगा को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है। मामले की जांच उच्चाधिकारियों के निर्देश पर शुरू कर दी गई है। संभावना जताई जा रही है कि आरोपी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी, जिसमें निलंबन से लेकर अन्य कठोर कदम शामिल हो सकते हैं।
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस विभाग की आंतरिक अनुशासन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानून की रक्षा करने वाला जब खुद कानून तोड़ता नजर आए, तो आम जनता में गलत संदेश जाता है। नए साल जैसे संवेदनशील मौके पर इस तरह की हरकत न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती थी।
सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है और स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह वर्दी में ही क्यों न हो। जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच राहत की बात यह रही कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सतर्कता और तत्परता से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। समय रहते कार को रोक लिया गया और भीड़ को सुरक्षित रखा गया।