लखनऊ

बदलेगा टोल कलेक्शन का तरीका, फास्टैग सिस्टम होगा खत्म, ऐसे देना होगा टोल टैक्स

केंद्र सरकार जर्मनी और रूस में सैटेलाइट सिस्टम से वसूली हो रही है। यह सिस्टम वहां काफी सफल भी है। इस सिस्टम के जरिये गाड़ी हाईवे पर जितने किमी चलती है, उसके हिसाब से टोल की राशि लगती है। यूरोपीय देशों में इस फॉर्मूले को सफल होता देख भारत में भी लागू किए जाने पर विचार विमर्श जारी है।

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Mar 28, 2022
FASTAG System to Shut Down Toll Collection Through GPS Tracking

देशभर के वाहनों के लिए लागू किया गया फास्टैग सिस्टम भी अब बंद होने वाला है। कुछ समय बाद फास्टैग की जगह वाहनों से टोल टैक्स की वसूली जीपीएस सिस्टम (सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम) से होगी। इसका पायलट प्रोजेक्ट भी चल रहा है। दरअसल, केंद्र सरकार जर्मनी और रूस में सैटेलाइट सिस्टम से वसूली हो रही है। यह सिस्टम वहां काफी सफल भी है। इस सिस्टम के जरिये गाड़ी हाईवे पर जितने किमी चलती है, उसके हिसाब से टोल की राशि लगती है। यूरोपीय देशों में इस फॉर्मूले को सफल होता देख भारत में भी लागू किए जाने पर विचार विमर्श जारी है। अभी भारत में 60 किमी के अंदर एक से अधिक टोल प्लाजा बने हैं, ऐसे में यहां किसी के हिसाब से टोल वसूली का सिस्टम नहीं है।

सारे टोल प्लाजा हो जाएंगे खत्म

2020 में सरकार ने दिल्ली-मुंबई कमर्शियल कॉरिडोर में इसका प्रयोग ट्रकों में शुरू किया था। यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो देशभर के सारे टोल प्लाजा खत्म कर दिए जाएंगे और इसी सिस्टम के जरिये वसूली की जाएगी। इसकी कीमत भी कम आएगी और मैनपावर भी नहीं लगेगी।

1.37 गाड़ियों को किया गया चिन्हित

केंद्र सरकार ने इस पायलट प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए देशभर में 1.37 लाख गाड़ियों को चिन्हित किया गया है। इस पायलट प्रोजेक्ट में दिल्ली की 29,705, उत्तराखंड की 14,401, छत्तीसगढ़ की 13,592, हिमाचल की 10,824 और गोवा की 9,112 गाड़ियां शामिल हैं।

Updated on:
28 Mar 2022 12:00 pm
Published on:
28 Mar 2022 11:19 am
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