लखनऊ

Ghooskhor Pandat Controversy: घूसखोर पंडत’ फिल्म पर लखनऊ में केस दर्ज, धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में पुलिस सख्त कार्रवाई

Ghuskhor Pandit Row: लखनऊ के हजरतगंज थाने में नेटफ्लिक्स फिल्म “घूसखोर पंडत” के खिलाफ धार्मिक और जातिगत भावनाएं आहत करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। फिल्म के डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और टीम पर विभिन्न धाराओं में केस हुआ। पुलिस ने इसे सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताया।

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Feb 06, 2026
नेटफ्लिक्स फिल्म “घूसखोर पंडत” पर FIR: धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप, लखनऊ में दर्ज हुआ मामला (Source: Police Media Cell)

Manoj Bajpayee Film Controversy: लखनऊ में ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर प्रसारित एक फिल्म को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। फिल्म “घूसखोर पंडत” के खिलाफ धार्मिक और जातिगत भावनाएं आहत करने के आरोप में हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल आपत्तिजनक कंटेंट और समाज में तनाव फैलाने के आरोपों के चलते दर्ज किया गया है। एफआईआर संख्या 23/2026 के तहत फिल्म के डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और पूरी क्रिएटिव टीम को नामजद किया गया है। पुलिस ने इसे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और कानून व्यवस्था प्रभावित करने वाला मामला बताया है।

इंस्पेक्टर विक्रम सिंह बने वादी

इस प्रकरण में हजरतगंज थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विक्रम सिंह स्वयं वादी बने हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फिल्म के कुछ अंश वायरल हुए, जिनमें कथित रूप से धार्मिक और जातिगत टिप्पणियां आपत्तिजनक पाई गईं। पुलिस का कहना है कि यह सामग्री समाज के एक वर्ग की भावनाओं को आहत कर सकती है और इससे साम्प्रदायिक सौहार्द पर असर पड़ने की आशंका थी।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:

  • धारा 196 BNS - धर्म के आधार पर वैमनस्य फैलाने का आरोप
  • धारा 299 BNS -धार्मिक भावनाएं आहत करना
  • धारा 352 BNS - शांति भंग की आशंका
  • धारा 353 BNS-सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करना
  • आईटी एक्ट की धारा 66 - डिजिटल माध्यम से आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करना

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये धाराएं गंभीर प्रकृति की हैं और मामले की जांच साइबर सेल की मदद से की जाएगी।

सोशल मीडिया पोस्ट बने जांच का आधार

प्राथमिक जांच में पाया गया कि फिल्म से जुड़े कुछ दृश्य और संवाद सोशल मीडिया पर क्लिप के रूप में वायरल हो रहे थे। कई संगठनों और व्यक्तियों ने इन अंशों पर आपत्ति जताते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस का कहना है कि इन पोस्टों के कारण तनावपूर्ण माहौल बनने की आशंका थी, इसलिए त्वरित कार्रवाई की गई।

‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर जोर

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने इस कार्रवाई को सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बताया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी समुदाय की धार्मिक या जातिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस का बयान है कि शांति और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी निर्देश का हवाला

सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में उच्च स्तर से भी सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए थे। प्रशासन इसे संवेदनशील मामला मानते हुए हर पहलू की जांच कर रहा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर किसी राजनीतिक टिप्पणी से बचते हुए पुलिस ने कहा है कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।

फिल्म टीम पर बढ़ा दबाव

एफआईआर दर्ज होने के बाद फिल्म के निर्माताओं और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी दबाव बढ़ गया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों पर आपराधिक कार्रवाई हो सकती है। साथ ही, फिल्म के विवादित हिस्सों को हटाने या संशोधित करने की मांग भी उठ सकती है।

जांच जारी

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल फिल्म से जुड़े डिजिटल कंटेंट और पोस्टों की तकनीकी जांच कर रही है। संबंधित व्यक्तियों को नोटिस भेजे जाने की तैयारी है। अधिकारियों ने कहा कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।   

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