PCS Retirement: उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा (PCS) के पांच वरिष्ठ उपजिलाधिकारी प्रमोद कुमार तिवारी (सोनभद्र), विनोद कुमार सिंह (गोरखपुर), संजय कुमार सिंह (बहराइच), महेश प्रसाद (मेरठ) और सुकमा प्रसाद विश्वकर्मा (हमीरपुर) की आज औपचारिक रूप से सेवानिवृत्ति हो रही है। ये अधिकारी वर्षों से क्षेत्रीय विकास, कानून व्यवस्था और जनकल्याण से जुड़े अहम निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाते आए हैं। उनके प्रशासनिक करियर और योगदान का संक्षिप्त आलेख नीचे प्रस्तुत है।
1. प्रमोद कुमार तिवारी- उपजिलाधिकारी, सोनभद्र
प्रमोद कुमार तिवारी ने प्रशासनिक सेवा की शुरुआत लगभग 30 वर्ष पूर्व की थी और विभिन्न जिलों में तहसीलदार, SDM व ADM जैसे पदों पर कार्य किया। सोनभद्र में उपजिलाधिकारी के रूप में उन्होंने खनन और पर्यावरण से जुड़ी नीतियों को सशक्त पूरा किया।
- अवैध खनन रोकने हेतु कार्रवाई की पहल
- सीमांत किसानों को राहत एवं समेकित विकास योजनाएँ
- सामाजिक पर्वों पर शांतिपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित कीउनकी सहजता, लोक सेवा भावना और कठिनाई से निपटने की शैली उन्हें कर्मठ माना जाता है।
2. विनोद कुमार सिंह -उपजिलाधिकारी, गोरखपुर
विनोद कुमार सिंह गोरखपुर में AD(Sub-Divisional Magistrate) के रूप में कानून व्यवस्था एवं ग्रामीण प्रशासन संभालते हुए लोकप्रिय रहे।
- ग्राम स्तर पर किसानों के अन्न उपजा समेत बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा
- स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र व पेयजल समस्याओं पर ठोस सुधार
- चुनावी प्रक्रिया के दौरान शांतिपूर्ण प्रशासन व्यवस्थाउनकी सजगता और स्थानीय स्तर पर सबको सुनने वाली दृष्टि प्रशंसनीय रही।
3. संजय कुमार सिंह - उपजिलाधिकारी, बहराइच
संजय कुमार सिंह ने बहराइच में संवेदनशील स्थिति,जैसे सीमा कब्जे, कानून व्यवस्था और आपदा प्रबंधन में नेतृत्व निभाया।
- सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनाती समन्वय
- प्राकृतिक आपदा आने पर राहत एवं बचाव
- सार्वजनिक विरोधों को शांतिपूर्ण तरीके से समाधानउनकी स्पष्ट निर्णय क्षमता और जनपक्षपाती सेवा ने स्थानीय प्रशंसा जीती है।
4. महेश प्रसाद - उपजिलाधिकारी, मेरठ
मेरठ में ADM रहे महेश प्रसाद ने औद्योगिक नगर में नागरिक सुविधाएं, सड़क यातायात, व्यापार नियमन और कानून व्यवस्था संभाली।
- व्यापार प्रतिष्ठानों के लाइसेंस व नियामक निरीक्षण की व्यवस्था
- मोटर वाहन नियमों के अनुपालन हेतु जागरूकता अभियान
- महामारी के दौरान स्वास्थ्य एवं लॉकडाउन नियम लागूउनकी प्रशासनिक कुशलता, कानून-व्यवस्था में संतुलन और कार्य‑कुशलता लखनऊ में प्रशंसनीय रही।
5. सुकमा प्रसाद विश्वकर्मा -उपजिलाधिकारी, हमीरपुर
हमीरपुर में सुकमा प्रसाद विश्वकर्मा ने ग्रामीण प्रशासन, तहसील कार्य एवं महिला व समुदाय विकास पर कार्य किया।
- ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार योजनाओं का क्रियान्वयन
- शिक्षा एवं स्वास्थ्य कार्यक्रमों की निगरानी
- पंचायत चुनाव एवं रोग नियंत्रण गतिविधियों की निगरानीउनकी संवेदनशीलता, समाज के कमजोर तबकों के प्रति समर्थन और सुदृढ़ प्रशासनिक दृष्टि सराही गई।
सेवानिवृत्ति के बाद क्या होगा
- इन पांचों अधिकारियों की रिटायरमेंट के बाद लॉजिस्टिक कार्यवाही शुरू होगी:
- वेतन और अंतिम लाभ मामलों का निपटारा
- स्थानांतरण आदेश जारी, नया उपजिलाधिकारी तैनात
- जिले में मतदाताओं एवं जनसामान्य से विदाई समारोहसेवानिवृत्त अधिकारियों को उन्हें सेवाओं का सम्मान स्वरूप प्रशस्ति पत्र या स्मृति चिह्न भी प्रदान किए जा सकते हैं।
- सोनभद्र, गोरखपुर, बहराइच, मेरठ और हमीरपुर के स्थानीय निकायों, पेशेवर समुदायों और सामाजिक संगठनों ने इन अधिकारियों का प्रशासनिक योगदान सराहा है।
- पंचायत और जिला स्तरीय कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता
- योजना क्रियान्वयन और कानून व्यवस्था का संतुलनइन गुणों के कारण उन्हें कार्यकाल में सराहनीय प्रशंसा मिल चुकी है।
प्रशासनिक संरचना में रिटायरमेंट का महत्व
- नई पीढ़ी को मौका देता है
- प्रशासन में सामंजस्य बनाए रखता है
- अनुभवी अधिकारियों का मार्गदर्शन भविष्य को संवारता है
- यह प्रशासन की ताज़गी तथा लोकतांत्रिक शक्ति हस्तांतरण की एक प्रक्रिया है।
- इन अधिकारियों के कार्यकाल से यह स्पष्ट है
- लोक सेवा प्राथमिकता: सभी जनहित कार्यों में पहला स्थान
- तत्काल निर्णय क्षमता: संकट में भी शांति से निर्णय
- सुनने की कला: जनसामान्य की बातों को गंभीरता से ग्रहण
- नवाचार अपनाना: जनसमस्याओं के लिए डिजिटल और पारंपरिक उपाय शामिल करना
- यह गुण अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।