
Uttar Pradesh News:उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव आयोग को लेकर समाजवादी पार्टी ने बड़ा दावा किया है। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि चुनाव आयोग के भीतर बढ़ते मतभेदों को पूरा देश देख रहा है। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार अब उत्तर प्रदेश नहीं जाएंगे। वर्मा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी यूपी में और जोखिम नहीं उठा सकती। उन्होंने कहा कि जब नाव डूब रही हो तो उसे और डुबाने के लिए किसी और को नहीं लाया जा सकता। साथ ही उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन पर भी पार्टी का पक्ष रखा।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने चुनाव आयोग को लेकर कहा कि आयोग के भीतर बढ़ते मतभेदों को पूरा देश देख रहा है। उन्होंने कहा कि तीन चुनाव आयुक्तों में से दो एक के खिलाफ हैं और इसे लेकर राजनीतिक दलों के साथ पूरे देश में भी नाराजगी है। वर्मा ने कहा कि इन सब बातों को देखते हुए बड़ा फैसला लिया गया है कि ज्ञानेश कुमार अब उत्तर प्रदेश नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी यूपी में अब और जोखिम नहीं उठा सकती। वर्मा ने कहा कि जब नाव डूब रही हो तो उसे और डुबाने के लिए किसी और को नहीं लाया जा सकता।
आशुतोष वर्मा ने कहा कि लोग अपने हिसाब से चुनाव का विश्लेषण कर सकते हैं कि किस पार्टी की पकड़ मजबूत है और कौन सा क्षेत्र मजबूत है। उन्होंने कहा कि अगर पूरी घटना को देखा जाए तो समाजवादी पार्टी वहां अपने विधायकों पर पुलिस हमले के विरोध में गई थी। इसके अलावा छात्र सभा के सिलसिले में राहुल लोधी पर हुए हमले के विरोध में भी पार्टी वहां गई थी। वर्मा ने कहा कि अखिलेश यादव ने कहा था कि जब हम वहां पहुंचेंगे तो उनकी स्थिति अपने आप मजबूत हो जाएगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मेरठ और वाराणसी दौरा स्थगित हो गया है। उन्हें 25 सितंबर को मेरठ के CCSU में Gen-Z के साथ संवाद करना था। इसके बाद 28 सितंबर को वाराणसी में युवाओं से बातचीत का कार्यक्रम तय था। दोनों कार्यक्रमों की नई तारीख अभी तय नहीं हुई है। मेरठ में निर्वाचक साक्षरता क्लब (ELC 2.0) और ECI-Net का क्षेत्रीय सम्मेलन भी प्रस्तावित था। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शैक्षिक संस्थानों के विद्यार्थियों और शिक्षकों से संवाद होना था।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने दोनों कार्यक्रमों को स्थगित करने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद उठे सवालों के बीच दौरा स्थगित होने को लेकर चर्चाएं भी हैं। आयोग के भीतर मतभेद होने की बात भी सामने आ रही है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।