Home Loan Interest को लेकर अक्सर लोगों में कम से कम ब्याज भरना पड़े इसकी चिंता बनीं रहती है। वहीं सरकार के कुछ नियम ऐसे भी हैं जिन्हें आप नहीं जानते हैं। या यूं कहें की बैंक वाले भी आपको नहीं बताते हैं, जिससे आपको फायदा होगा। ऐसे ही 3 नियम हम आपको बता रहे हैं जिससे आपके होम लोन के ब्याज में 3 लाख 50 हज़ार तक की छूट आपको तुरंत मिल सकती है।
Home Loan in India भारत सरकार के कुछ ऐसे भी नियम हैं जिनके बारे में हर कोई नहीं जनता है। यही कारण है कि अक्सर लोन का ब्याज ज्यादा महंगा पड़ता है। लेकिन इन नियमों से आप कुल मिलाकर 3.5 लाख रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं। यह छूट अफोर्डेबल हाउसिंग की कैटेगरी में आने वाले घर खरीदने पर मिल सकती है.
Home Loan Interest Profit
होम लोन इंटरेस्ट पर 2 लाख रुपये तक की टैक्स छूट तो सेक्शन 24(b) के तहत मिलती है, जबकि 1.5 लाख की अतिरिक्त टैक्स छूट सेक्शन 80EEA के अंतर्गत मिल सकती है. इसका मतलब है कि आप कुल मिलाकर 3.5 लाख रुपये तक टैक्स बेनिफिट का फायदा उठा सकते हैं. लेकिन इस अतिरिक्त छूट के लिए आपको इन शर्तों को पूरा करना होगा. इन्कम टैक्स एडवोकेट जितेंद वर्मा बताते हैं कि:
Tax Payer को होम लोन के इंटरेस्ट पर धारा 80EEA के तहत 1.5 लाख तक का अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट मिल सकता है, बशर्ते वह इन शर्तों को पूरी करता हो-
Stamp Duty घर का मूल्य 45 लाख रुपये से अधिक न हो.
Home Loan Approval 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च, 2022 के बीच मंजूर किया गया हो.
House Owner या घर खरीदने वाला लोन की मंजूरी के समय किसी और घर का मालिक न हो.
Income Tax की धारा 24 (बी) के तहत भी 2 लाख रुपये तक इंटरेस्ट डिडक्शन का प्रावधान है. ऐसी स्थिति में अगर कोई व्यक्ति ऊपर दी गई सारी शर्तों को पूरा करता है और होम लोन पर हर साल 3.5 लाख रुपये ब्याज भर रहा है, तो वह धारा 80EEA के तहत 1.5 लाख रुपये और धारा 24 (बी) के तहत 2 लाख रुपये के डिडक्शन का लाभ पाने के लिए दावा कर सकता है.”
मौजूदा नियमों के मुताबिक अफोर्डेबल हाउसिंग कैटेगरी में होम लोन पर यह अतिरिक्त लाभ लेना है, तो लोन 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2022 के बीच स्वीकृत होना चाहिए. यानी आप अगर इस नियम का फायदा लेना चाहते हैं, तो जल्दी करें. डेडलाइन में अब कुछ ही दिन बचे हैं.
प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट में कारपेट एरिया का जिक्र न हो?
सेक्शन 80EEA में एक प्रावधान यह भी है कि अफोर्डेबल हाउसिंग प्रॉपर्टी का कारपेट एरिया बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली एनसीआर (दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव, फरीदाबाद तक सीमित), हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई जैसे महानगरीय शहरों में 60 वर्ग मीटर (645 वर्ग फुट) से अधिक नहीं होना चाहिए.
बाकी शहरों या कस्बों में अफोर्डेबल हाउस का कारपेट एरिया 90 वर्ग मीटर (968 वर्ग फुट) से अधिक नहीं होना चाहिए. ऐसे में, टैक्सपेयर के मन में यह उलझन हो सकती है कि अगर उसके प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट में घर के कारपेट एरिया का जिक्र न हो, तो उन्हें सेक्शन 80EEA के तहत टैक्स में 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त छूट का फायदा मिलेगा या नहीं. आइए जानते हैं इस पर एक्सपर्ट्स की राय क्या है.