
Divya Mittal IAS Resignation:यूपीके कई जिलों में जिलाधिकारी (DM) की जिम्मेदारी संभाल चुकीं IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने रविवार को प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपने इस्तीफे की जानकारी सार्वजनिक की। हालांकि, उन्होंने इस्तीफे के पीछे की कोई वजह स्पष्ट रूप से नहीं बताई है। उनके इस फैसले के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
दिव्या मित्तल को देवरिया के जिलाधिकारी पद से हटाए जाने के बाद राजस्व विभाग में तैनाती दी गई थी। बताया जा रहा है कि DM पद से हटने के बाद से ही वह इस्तीफा देने के बारे में विचार कर रही थीं। मई 2026 में देवरिया DM के पद से हटाए जाने के कुछ समय बाद सोशल मीडिया पर की गई उनकी एक पोस्ट ने भी काफी चर्चा बटोरी थी। उस पोस्ट में उन्होंने शिक्षा, मानसिक शांति और खुश रहने को लेकर अपने विचार साझा किए थे।
दिव्या मित्तल को मई 2026 के पहले सप्ताह में देवरिया के DM पद से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्हें फील्ड पोस्टिंग से हटाकर राजस्व परिषद में विशेष सचिव के पद पर भेजा गया। उनके करीबियों के मुताबिक, DM के तौर पर काम करने को लेकर दिव्या मित्तल काफी उत्साहित रहती थीं। उनका मानना था कि प्रशासनिक सेवा में आने का असली उद्देश्य लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं का समाधान करना और जनता की सेवा करना है। ऐसे में फील्ड पोस्टिंग से हटाकर शासन में तैनाती दिए जाने से वह संतुष्ट नहीं थीं। करीबी लोगों का कहना है कि DM पद से हटाए जाने के बाद ही उन्होंने सेवा छोड़ने को लेकर गंभीरता से सोचना शुरू कर दिया था।
DM पद से हटाए जाने के कुछ दिनों बाद दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखी थी। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह पोस्ट उनके मन की स्थिति का संकेत है और आने वाले समय में वह IAS सेवा से इस्तीफा देने का फैसला कर सकती हैं। अपनी पोस्ट में दिव्या मित्तल ने देश की शिक्षा व्यवस्था में मानसिक स्वास्थ्य और खुशी से जुड़े पहलुओं को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने लिखा था कि देश के स्कूलों और शीर्ष शिक्षण संस्थानों में बच्चों को खुश रहना और मानसिक शांति बनाए रखना क्यों नहीं सिखाया जाता।
बता दें कि दिव्या मित्तल का शैक्षणिक और प्रशासनिक सफर काफी खास रहा है। साल 2013 में IAS के लिए चयनित होने से पहले उन्होंने IIT दिल्ली से बीटेक किया और इसके बाद IIM बेंगलुरु से PGDM की पढ़ाई की। साल 2015 में मसूरी में उनका प्रशिक्षण पूरा हुआ। इसके बाद उन्हें मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर पहली नियुक्ति मिली। प्रशासनिक सेवा में आगे बढ़ते हुए मई 2017 में उन्हें गोंडा में मुख्य विकास अधिकारी बनाकर भेजा गया। इसके बाद उन्होंने कानपुर में यूपीएसआईडीसी के संयुक्त महाप्रबंधक और फिर बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाली।
दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जिलाधिकारी के तौर पर काम किया। वह संतकबीरनगर, मिर्जापुर और देवरिया की डीएम रह चुकी हैं। इन जिलों में उनकी कार्यशैली और प्रशासनिक फैसलों को लेकर वह अक्सर चर्चा में रहीं। देवरिया में डीएम की जिम्मेदारी संभालने के बाद मई 2026 में उन्हें फील्ड से हटाकर राजस्व परिषद में विशेष सचिव के पद पर तैनात किया गया। इसके बाद उनके इस्तीफे की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
दिव्या मित्तल ने अपनी मई की सोशल मीडिया पोस्ट में अपने व्यक्तिगत अनुभवों को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए लिखा था कि उन्हें देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि इस शिक्षा ने उन्हें कठिन परीक्षाओं को पास करने और बड़ी जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार किया, लेकिन मन को शांत रखने और अकेलेपन से निपटने की सीख नहीं दी। उन्होंने सवाल उठाया था कि लोग जीवन में सफलता हासिल करने के लिए वर्षों तक पढ़ाई करते हैं, लेकिन खुश रहने के लिए सीखने पर पर्याप्त ध्यान क्यों नहीं दिया जाता।
दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में उन महत्वपूर्ण बातों का भी जिक्र किया था, जिन्हें उनके मुताबिक स्कूल और उच्च शिक्षा के दौरान पर्याप्त महत्व नहीं मिलता। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति को केवल सफल बनाना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे मानसिक रूप से मजबूत और खुशहाल जीवन जीने के लिए भी तैयार किया जाना चाहिए। उनकी इस पोस्ट को उस समय शिक्षा और मानसिक शांति से जुड़े एक व्यक्तिगत अनुभव के तौर पर देखा गया था। अब उनके आईएएस पद से इस्तीफे के बाद उनकी पुरानी पोस्ट एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर इस्तीफे की जानकारी तो साझा की है, लेकिन उन्होंने इसके पीछे की वजह सार्वजनिक नहीं की है। ऐसे में उनके इस्तीफे को लेकर अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, उनके करीबियों के मुताबिक DM पद से हटाए जाने के बाद से ही वह अपने भविष्य को लेकर विचार कर रही थीं। उनका मानना था कि प्रशासनिक सेवा में फील्ड में रहते हुए ही जनता के साथ सीधे जुड़कर बेहतर तरीके से काम किया जा सकता है। शासन में तैनाती मिलने के बाद वह खुद को उस भूमिका में सहज महसूस नहीं कर रही थीं। फिलहाल, उनके इस्तीफे के पीछे की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है।