
Uttar Pradesh Assembly Election:उत्तर प्रदेश में साल 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने चुनाव की तैयारियों से लेकर सपा के साथ सीटों के तालमेल और कई दूसरे मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयारी कर रही है और चुनाव में देरी से नुकसान हो रहा है। सपा के अपने दम पर जीती 111 सीटों पर चुनाव लड़ने की चर्चा के बीच मसूद ने कुछ दिन पहले कहा था कि अपने क्षेत्र की दो सीटों पर समझौता करना मुश्किल होगा।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि पार्टी चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि हम अपनी तैयारियां कर रहे हैं, हम अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं। चुनाव हों या न हों, हम चुनाव लड़ेंगे। हम पूरी तैयारी कर रहे हैं। हम चुनाव लड़ेंगे। हम पहले ही कह चुके हैं कि आप चुनाव में देरी करते जा रहे हैं, जिससे नुकसान हो रहा है, इसका कोई फायदा नहीं है। मसूद ने कहा कि चुनाव में देरी से कोई फायदा नहीं है और कांग्रेस चुनाव लड़ने के लिए अपनी तैयारी कर रही है।
सपा की ओर से अपने दम पर जीती गई 111 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी को लेकर सवाल पूछे जाने पर इमरान मसूद ने कहा कि मुझे नहीं पता। मेरे यहां दो सीटें हैं और मुझे नहीं पता कि दोनों सीटों पर पार्टी का रुख क्या होगा। लेकिन मेरे क्षेत्र की सीट पर समझौता करना बहुत मुश्किल होगा। मसूद के इस बयान से साफ है कि वह अपने क्षेत्र की दोनों सीटों को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों सीटों पर पार्टी का रुख क्या होगा, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है, लेकिन अपने क्षेत्र की सीट पर समझौते को उन्होंने मुश्किल बताया।
केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी के सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर दिए बयान पर इमरान मसूद ने कहा कि अखिलेश ने उन्हें राज्यसभा तो भेजा ही था, इसमें तो कोई दो राय नहीं हैं। मुझे तो उसके कोई मायने समझ में नहीं आए। जब आप बोल ही नहीं सकते, या आप बोल ही नहीं पाते, तो उसके मायने क्या रह गए। मसूद ने इस बयान के जरिए जयंत चौधरी और अखिलेश यादव से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
चुनाव आयोग की ओर से टीएमसी के चुनाव चिह्न को फ्रीज किए जाने पर इमरान मसूद ने कहा कि लोकतंत्र के लिए यह बहुत घातक है। इलेक्शन कमीशन एक खिलौना बन गया है और खिलौने की तरह इस्तेमाल हो रहा है। पहले शिवसेना, फिर एनसीपी, अब टीएमसी। तो इसका मतलब तो आप दल छोड़ेंगे नहीं। वोटों को भी चुराएंगे, दलों को भी चुराएंगे। लोगों तक चुनाव चिह्न पहुंचाने में सालों लगते हैं। आप चुनाव चिह्न फ्रीज कर देंगे। पार्टी संगठन से होती है ना कि एमपी, एमएलए से मसूद ने कहा कि किसी पार्टी को उसके संगठन के आधार पर देखा जाता है और चुनाव चिह्न को पहचान बनाने में लोगों के बीच काफी समय लगता है।