भारत की पहली स्वदेशी डेंगू वैक्सीन 'डेंगीआल' का ट्रायल अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यह वैक्सीन इस साल के अंत तक उपलब्ध हो सकती है।
भारत में हर साल मानसून के दौरान डेंगू का कहर देखने को मिलता है। अब इस जानलेवा बीमारी से लड़ने के लिए भारतीय विशेषज्ञों को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। भारत की पहली स्वदेशी डेंगू वैक्सीन 'डेंगीआल' का परीक्षण अब अपने अंतिम चरण में है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल के अंत तक यह वैक्सीन आम जनता के लिए उपलब्ध हो सकती है।
इस वैक्सीन का विकास भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और पैनासिया बायोटेक ने किया है। इसका क्लीनिकल ट्रायल अपने अंतिम चरण में है। इस वैक्सीन के तीसरे चरण (Phase-3) का ट्रायल देश के 19 प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में किया गया है। लखनऊ का किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) इस महत्वपूर्ण परीक्षण का हिस्सा रहा है। एक निजी चैनल से बातचीत में केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि तीसरे चरण का ट्रायल अगस्त 2024 में शुरू हुआ था जिसमें देशभर के 10 हजार से अधिक स्वस्थ लोगों ने भाग लिया।
अभी तक डेंगू का कोई निश्चित इलाज मौजूद नहीं है और डॉक्टर केवल लक्षणों के आधार पर ही मरीजों का उपचार करते हैं। ऐसे में डेंगीआल वैक्सीन एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इस वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 'टेट्रावैलेंट' है यानी यह डेंगू वायरस के चारों प्रकारों (DENV-1, 2, 3, 4) के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है। साथ ही यह एक सिंगल डोज वैक्सीन है जो इसे दूसरी वैक्सीन से अलग और प्रभावी बनाती है।
ट्रायल के दौरान प्रतिभागियों को वैक्सीन और प्लेसीबो (डमी डोज) के समूहों में बांटा गया था। केजीएमयू में ही 300 से अधिक लोगों पर इसका परीक्षण किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रायल के परिणाम काफी उत्साहजनक हैं और इसकी रिपोर्ट आईसीएमआर को भेज दी गई है। फाइनल डेटा अक्टूबर तक आने की संभावना है जिसके बाद इसे मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
ट्रायल की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद इसे ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) के पास अप्रूवल के लिए भेजा जाएगा। डीसीजीआई की मंजूरी मिलते ही यह वैक्सीन अस्पतालों में उपलब्ध हो जाएगी। भारत में साल 2024 में ही डेंगू के सवा दो लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। यह वैक्सीन लाखों लोगों को डेंगू के गंभीर संक्रमण से बचाएगी।