
प्रतीकात्मक तस्वीर - एआइ
महोबा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर कोई भी दंग रह जाए। यहां बाल विकास विभाग ने एक ऐसी महिला कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया जिसकी मौत हुए करीब डेढ़ साल बीत चुके हैं। विभाग के इस प्रकार एक मृत महिला को नोटिस भेजने से सिस्टम पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
मामला महोबा के पनवाड़ी विकासखंड के नैपुरा गांव का है। यहां के आंगनबाड़ी केंद्र में पार्वती नाम की महिला सहायिका के पद पर तैनात थीं। लंबी बीमारी के चलते 1 नवंबर 2024 को पार्वती का निधन हो गया था। अब 18 महीने बाद बाल विकास परियोजना अधिकारी के कार्यालय से एक नोटिस जारी किया गया है। इसमें मृतका पर आरोप लगाया गया है कि निरीक्षण के दौरान उनका केंद्र बंद मिला। और तो और विभाग ने मृतका को 2 दिन के अंदर रिकॉर्ड के साथ दफ्तर में हाजिर होने का अल्टीमेटम भी दे डाला।
मृतका के पति किशुनलाल का बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि पत्नी की मौत के महज 8 दिन के भीतर ही उन्होंने विभाग में मृत्यु प्रमाण पत्र जमा कर दिया था। इसके बावजूद विभाग को यह भनक तक नहीं लगी कि उनकी कर्मचारी अब इस दुनिया में नहीं है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि अगर पार्वती उपस्थित नहीं हुईं तो उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी।
इस नोटिस से आहत मृतका के बेटे महेश ने सिस्टम पर तंज कसा है। महेश का कहना है कि अब वह यह सरकारी नोटिस लेकर स्वर्ग में अपनी मां के पास जाएगा और उनसे पूछेगा कि आखिर वह ड्यूटी पर क्यों नहीं जा रही हैं? परिजनों को अब यह अंदेशा है कि कहीं मृतका के नाम पर पिछले 18 महीनों से मानदेय (Salary) का गबन तो नहीं किया जा रहा था। क्या विभाग को वाकई डेढ़ साल तक अपने कर्मचारी की मौत की खबर नहीं मिली?
परिजनों ने अब इस पूरे फर्जीवाड़े और लापरवाही की शिकायत जिलाधिकारी (DM) से करने का निर्णय लिया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारियों ने बिना रिकॉर्ड चेक किए एक मृत व्यक्ति के नाम पर नोटिस कैसे जारी कर दिया? इस घटना के बाद अब लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों पर शासन क्या कार्रवाई करता है।
Updated on:
31 Mar 2026, 11:27 AM IST
Published on:
31 Mar 2026, 11:27 AM IST
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