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Mahoba News:किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद, कोर्ट ने लगाया 30 हजार जुर्माना

POCSO Act Case:महोबा में 2020 में मानसिक रूप से कमजोर 13 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के दोषी रामदयाल कुशवाहा को पॉक्सो कोर्ट ने आजीवन कारावास व 30 हजार जुर्माना सुनाया। जुर्माना न देने पर 3 माह अतिरिक्त सजा होगी।

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Mahoba Crime News: जिले में साढ़े पांच साल पुराने दुष्कर्म मामले में बुधवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम और अपर सत्र न्यायाधीश संदीप चौहान की अदालत ने एक फैसला सुनाया। कोर्ट ने दोषी रामदयाल को आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को तीन महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

क्या था पूरा मामला

यह घटना 23 अक्तूबर 2020 की है। थाना कबरई क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली महिला उस दिन दोपहर बकरियां लेकर खेत गई थी। घर पर उसकी 13 साल की बेटी अकेली थी। पीड़िता मानसिक रूप से कमजोर है। इसका फायदा उठाकर पड़ोस में रहने वाला रामदयाल घर पहुंचा। उसने किशोरी को रुपयों का लालच दिया और बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया।

आरोपी ने अपने घर में किशोरी के साथ जबरन दुष्कर्म किया। शाम को जब पीड़िता की मां घर लौटी तो बेटी नहीं मिली। परेशान मां ने बेटी की तलाश शुरू की। खोजते हुए वह रामदयाल के घर पहुंची और दरवाजा खटखटाया। आहट मिलते ही आरोपी घबरा गया और किशोरी को छोड़कर मौके से भाग निकला। घर आने पर पति को पूरे मामले की जानकारी दी गई। इसके बाद परिवार ने तुरंत थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई।

ऐसे चला केस

24 अक्तूबर 2020 को थाना कबरई पुलिस ने आरोपी रामदयाल के खिलाफ दुष्कर्म समेत अन्य संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की और सभी सबूत जुटाए। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। इसके बाद विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम संदीप चौहान की कोर्ट में मामले की सुनवाई चली। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों को देखने के बाद कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार दिया। कोर्ट ने सजा का ऐलान किया।

कोर्ट का सख्त रुख

पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज इस मामले में कोर्ट ने कड़ा संदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मानसिक रूप से कमजोर नाबालिग बच्ची के साथ इस तरह का अपराध बेहद गंभीर है। आरोपी ने पड़ोसी होने का फायदा उठाया और भरोसा तोड़ा। इसलिए उसे आजीवन कारावास की सजा दी जाती है। कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित परिवार को साढ़े पांच साल बाद न्याय मिला है। स्थानीय लोगों ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि ऐसे फैसलों से अपराधियों में कानून का डर बनेगा।