Indian Railways New Order for Bedroll रेलवे भी अपने नियमों में ढिलाई देने जा रहा है। भारतीय रेल के अनुसार, अगले महीने तक सभी ट्रेन के एसी कोच में कंबल, चादर और तकिया जैसी चीजें मिलने लगेंगी। मतलब साफ है कि, रेलवे के एसी क्लास में सफर करने वाले यात्रियों को अब घर से कंबल-तकिया लाने की जरूरत नहीं है।
Indian Railways एसी कोच में ट्रेन यात्रा करने वाले यात्री भारी परेशानी झेल रहे हैं। पर उनका यह दुख जल्द खत्म हो जाएगा। अगले महीने से सभी एसी कोच में चादर-कंबल की सुविधा बहाल हो जाएगी। रेलवे यात्रियों की असुविधा को देखते हुए यह ऐलान किया है। कोरोना काल में रेलवे ने एसी कोच में कंबल, चादर, तकिया को बंद कर दिया था। पर अब जब कोरोनावायरस का संक्रमण कम हो गया है और तमाम सुविधाएं बहाल हो गईं है। तो रेलवे भी अपने नियमों में ढिलाई देने जा रहा है। भारतीय रेल के अनुसार, अगले महीने तक सभी ट्रेन के एसी कोच में कंबल, चादर और तकिया जैसी चीजें मिलने लगेंगी। मतलब साफ है कि, रेलवे के एसी क्लास में सफर करने वाले यात्रियों को अब घर से कंबल-तकिया लाने की जरूरत नहीं है।
भारतीय रेल ने रेलवे के सभी जोन को यह आदेश जारी किया है कि, यात्रियों के लिए लिनेन की सुविधा जल्द से जल्द उपलब्ध कराएं जाएं। इस समय 538 जोड़ी ट्रेन में लिनेन की सुविधा शुरू हो चुकी है और भारतीय रेल की कुल 1114 जोड़ी ट्रेनों में यह सुविधा उपलब्ध कराई जानी है।
रेलवे ने कोविड-19 संक्रमण रोकने के लिए ट्रेन के एसी कोच से तकिया, चादर, कंबल आदि की सुविधा को बंद कर दी थी। इतना ही नहीं उस वक्त एसी बोगी से परदे भी हटा दिए गए थे। अब कोरोनावायरस का असर कम होने के बाद रेलवे यह सुविधा दोबारा शुरू कर रही है।
एसी कोच में सफर करने वाले अपने यात्रियों को बेडरोल उपलब्ध कराने के लिए रोजाना 7.5 लाख पैकेट की जरूरत है। बेडरोल के एक पैकेट में दो बेडशीट, 2 पिलो कवर, ब्लैंकेट और हैंड टॉवल होते हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस समय रेलवे की जरूरत का सिर्फ आधा बेडरोल ही उपलब्ध है। भारतीय रेल ने करीब 2 महीने पहले एसी में सफर करने वाले यात्रियों को बेडरॉल उपलब्ध कराने की घोषणा की थी।
बताया जा रहा है कि, रेलवे ने 15 लाख से अधिक बेडरोल के लिए आर्डर प्लेस किया था। इस साल 10 मार्च को भारतीय रेल ने घोषणा की थी कि चरणबद्ध तरीके से ट्रेन के एसी कोच में बेडरोल की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। कोरोना संकट की अवधि में रेलवे के पास मौजूद बेडरोल स्टॉक का 60 फ़ीसदी खराब हो गया था। रेलवे के पास मौजूद बेडरोल के स्टॉक का बड़ा हिस्सा मास्क बनाने में इस्तेमाल कर लिया गया।