
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी की ओर से नगर निकाय को लेकर जारी की गयी सूची के बाद बगावत का बिगुल बज चुका है। राजधानी से लेकर आस पास के जिलों में कार्यकर्ताओं के बीच विरोध साफ़ नज़र आरहा है। ज़ाहिर है टिकट कटने से नाराज़ भाजपा उमीदवार अब या तो निर्दलीय नामांकन का मन बना चुके हैं या तो भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ रणनीति बनाने में जुट गए हैं। ख़ास बात ये भी है कि कार्यकर्तों की नाराज़गी के पर सूबे के कई बड़े नेता और मंत्री भी हैं।
बात राजधानी की करें तो लगभग 11 निवर्तमान पार्षदों का टिकट काट दिया गया है। कार्यकाणी उपाध्यक्ष रहे हरशरण लाल गुप्ता, एलडीए बोर्ड के मेंबर सौरभ सिंह मोनू, शोभा सिंह, शिव कुमार, सांवरी चौधरी शामिल हैं। इनमें से अधिकतर वो वार्ड हैं जिनका आरक्षण बदला गया हैं। लेकिन निवर्तमान पार्षदों का आरोप है कि उनकी पत्नी को ये कह कर टिकट नहीं दिया गया कि वे सक्रिय कार्यकर्ता नहीं है लेकिन जिन्हे दिया गया वे भी तो नहीं है। ऐसा कई वार्डों में देखने को मिला है।
बड़े नेताओं के समर्थकों की बल्ले-बल्ले
जानकारों की माने तो बड़े नेताओं की टिकट वितरण के दौरान खूब चली है। डॉ दिनेश शर्मा के परिवार से सम्बन्ध रखने वाले निवर्तमान पार्षद साकेत शर्मा की माता को टिकट मिला तो विधायक आशुतोष टंडन, बृजेश पाठक नीरज बोरा, रीता बहुगुणा और स्वाति सिंह की सिफारिशों का भी ध्यान रखा गया। यही नहीं कानपुर में सतीश महाना और सत्यदेव पचौरी के सामर्थ कों की भी बल्ले-बल्ले रही। लेकिन वहीं क्षेत्रीय विधायकों से खट्टास निवर्तमान पार्षदों को भारी पड़ी है।
पार्टी को उठाना पढ़ सकता है खामियाज़ा
दरअसल पार्षदी चुनाव में दल से अधिक व्यक्तित्व पर चुनाव जीता जाता है। कई बार अधिक प्रत्याशी चुनावी मैदान में होने के चलते 2 हज़ार वोट भी जीत की दिशा तय कर देते हैं। जिन दलों ने निवर्तमान पार्षदों को साइड लाइन किया है वे अब अपने कामों को लेकर निर्दलीय मैदान में उतरने का मन बना चुके हैं।
नहीं करेंगे भाजपा उमीदवार का समर्थन
कानपुर के स्वर्ण जयंती विहार से सौरभ तिवारी को टिकट दिया गया है जिसका विरोध हो रहा है। दरअसल वार्ड इकाई की ओर से भी सौरभ को टिकट न देने की बात कही गयी थी लेकिन कैबिनेट मंत्री सतीश महाना और बजरंग दल के प्रान्ती संयोजक कुशल पाल सिंह के करीबी होने के चलते इन्हे टिकट मिल गयी। इसके साथ ही रमापति झुनझुनवाला लगातार तीन बार पार्षद रह चुके हैं लेकिन इस बार सत्यदेव पचौरी के ख़ास को टिकट देदिया गया है जिससे क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं में रोष है। उनका कहना है कि अगर झुनझुनवाला चुनाव नहीं भी लड़ेंगे तब भी वे भाजपा प्रत्याशी का समर्थन नहीं करेंगे।
वहीँ ललितपुर से अध्यक्ष के पद के लिए विधायक और कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के करीबी नेता ने पार्टी के खिलाफ बगावत कर दी है। ललितपुर सदर सीट से विधायक रहे रमेश प्रसाद कुशवाहा ने अपनी पत्नी कमला देवी को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतार दिया है।
हालांकि लिस्ट आने के बाद अभी कई निवर्तमान पार्षदों ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। या तो वे निर्दलीय मैदान में आएंगे या तो पार्टी की विरुद्ध रणनीति तैयार करेंगे। इनकी स्थिति 6 और 7 तारीख को नामांकन ख़त्म होने के साथ साफ़ होगी।