UP Politics: मिशन 2027 से पहले अंदरूनी घमासान के 'भंवर' में भारतीय जनता पार्टी नजर आ रही है। विरोधी सुरों ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है।
UP Politics: उत्तर प्रदेश में अगले साल चुनाव होने हैं। चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल जमकर तैयारियों में जुटे हुए हैं। चुनाव से पहले सत्ताधारी दल में विरोधी सुरों ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। 'जनप्रतिनिधियों बनाम अधिकारियों' और 'सरकार बनाम संगठन' के बीच खींची दीवारों से चिंतित BJP सरकार के अंदर भी विरोधी लहरें टकराती नजर आ रही हैं।
30 जनवरी के दिन महोबा में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और स्थानीय विधायक बृजभूषण राजपूत के बीच सड़क पर उभरा विवाद कोई अकेला उदाहरण मात्र नहीं है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जब जनप्रतिनिधियों की बेचैनी और महत्वाकांक्षा ने अनुशासन की दीवार तोड़ी। मंत्रिमंडल में फेरबदल, पंचायत चुनाव, प्रदेश संगठन विस्तार और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले विद्रोही सुरों को नरम करने के लिए BJP और संघ के बीच समन्वय बैठक का नया एजेंडा तैयार किया जा रहा है।
चुनाव की चौखट पर खड़ी पार्टी सामने जनता का भरोसा जीतने की बड़ी चुनौती है। हालांकि, जमीनी सच्चाई को देखते हुए कई जनप्रतिनिधियों में असंतोष भी उभरा नजर आया है। इसकी शुरूआत जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने जुलाई 2022 में अधिकारियों पर उपेक्षा करने और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देकर की थी। इसी बीच संदेश गया, अंदर-बाहर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
इसके अलावा 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव लड़ रहे केंद्रीय मंत्री डॉक्टर संजीव बालियान और BJP के पूर्व विधायक संगीत सोम के बीच खुली और कड़वी जुबानी जंग ने कई सीटों पर विपरीत असर डाला। परिणाम आने के बाद सहारनपुर से BJP के लोकसभा प्रत्याशी राघव लखनपाल शर्मा ने अपने ही मंत्री और विधायक पर हराने का आरोप लगाकर सियासी पारा चढ़ा दिया।
वहीं, अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर गाजियाबाद के लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने कई बार अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। कई मामले ऐसे भी देखने को मिले जहां जनप्रतिनिधियों की अदावत 'अधिकारियों और माननीयों' दोनों मोर्चों पर देखने को मिली। पिछले साल जून में कानपुर के बिठूर क्षेत्र के विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने जिलाधिकारी बनाम CMO के विवाद में CMO को हटाने के लिए मोर्चा खोला, जबकि BJP के वरिष्ठ नेता और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना समेत 3 विधायक CMO के समर्थन में नजर आए।
बाल विकास राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला कानपुर देहात की अकबरपुर कोतवाली में पुलिस के खिलाफ जुलाई में धरने पर बैठीं थी। इस दौरान उन्होंने पति और पूर्व सांसद अनिल शुक्ल के साथ मिलकर अपने ही दल के सांसद देवेंद्र भोले पर ब्राह्मणों को लड़ाने का गंभीर आरोप लगाया था। इतना ही नहीं इसी महीने खेरेश्वर मंदिर मार्ग में भ्रष्टाचार के आरोप से आहत प्रतिभा शुक्ला ने मिश्रिख सीट से सांसद अशोक रावत के खिलाफ 1 करोड़ रुपये की मानहानि की नोटिस भेज दी।
पिछले साल अगस्त में कारगार राज्यमंत्री सुरेश राही ने अवर अभियंता को हटाने और ट्रांसफार्मर बदलवाने की मांग को लेकर सीतापुर के विद्युत उपकेंद्र हरगांव में धरना दिया था। CM योगी आदित्यनाथ के सामने मंच पर राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रवीन्द्र जायसवाल और पूर्व मंत्री डा. नीलकंठ तिवारी के बीच एक दूसरे को पटका पहनाने के दौरान 'उपेक्षा और तनाव' के पल अक्टूबर महीने में वाराणसी में उभरे। जिसको लेकर बड़ी चर्चा भी हुई। वहीं, 31 जनवरी को अयोध्या में डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य के कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष संजीव सिंह और पार्टी नेता सच्चिदानंद पांडे के बीच मारपीट का मामला भी चर्चा का विषय बना।
इस सभी के बीच बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का कहना है, '' BJP संगठन आधारित पार्टी है। कई बार जनहित के मुद्दों को लेकर मतभिन्नता हो सकती है।'' उनका कहना है कि कहीं कोई विवाद नहीं है लेकिन अनुशासन सर्वोपरि है।