ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। भारत में शिया समुदाय ने लखनऊ और कश्मीर समेत कई जगह विरोध प्रदर्शन किए।
Iran-Israel War: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बहुत बढ़ गया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में उनकी मौत हो गई। ईरान ने इसे शहादत बताया है और 40 दिनों का शोक मनाने की घोषणा की है। इस घटना से पूरे इलाके में युद्ध का खतरा मंडरा रहा है।
भारत में भी इस खबर से शिया मुस्लिम समाज बहुत दुखी और गुस्से में है। कश्मीर से लेकर लखनऊ तक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग सड़कों पर उतर आए हैं और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। लखनऊ में चोटा इमामबाड़ा, हुसैनाबाद और अन्य इलाकों में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। उन्होंने काले कपड़े पहने, काले झंडे लगाए और तीन दिनों का शोक मनाने की बात कही। शिया नेताओं ने इसे बहुत दुखद बताया और कहा कि यह पूरी दुनिया के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। यूपी पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है और हाई अलर्ट जारी किया है, ताकि कोई समस्या न हो।
इस बीच उत्तर प्रदेश की भाजपा विधायक राजेश्वर सिंह (सरोजनी नगर) के एक ट्वीट ने विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने लखनऊ में हो रहे प्रदर्शनों पर सवाल उठाया। ट्वीट में उन्होंने ईरान में बाल विवाह की उम्र और अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा पर पाबंदी जैसे मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि इन मामलों में मानवाधिकार की आवाजें और विरोध क्यों नहीं उठे थे? उनका कहना है कि लोकतंत्र में बोलने का अधिकार है, लेकिन विरोध चयनात्मक क्यों है?
राजेश्वर सिंह के इस बयान से शिया समुदाय में भारी गुस्सा फैल गया। लोग मानते हैं कि उनके धार्मिक नेता की शहादत के समय ऐसी टिप्पणियां उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी हैं। इससे भाजपा और शिया समुदाय के बीच पहले से मौजूद दूरी और बढ़ गई है। कुछ लोग इसे संवेदनहीन बताते हैं, जबकि कुछ का मानना है कि यह सवाल उठाना जरूरी है।