
Uttar Pradesh News: इटली में बुर्के और नकाब पर प्रतिबंध की घोषणा के बाद इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत में भी इसे लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने इटली के फैसले और यूरोप के करीब 24 जगहों पर बुर्के पर प्रतिबंध की चर्चा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले इस्लाम के प्रति नफरत वाली सोच को दिखाते हैं। यासूब अब्बास ने कहा कि इस्लाम महिलाओं को सम्मान और गरिमा देता है और बुर्के को कट्टरता से जोड़ना सही नहीं है।
इस मुद्दे पर लखनऊ में शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि जिस तरह इटली में बुर्के पर प्रतिबंध लगाया गया है, उससे साफ तौर पर इस्लाम के प्रति नफरत वाली सोच सामने आती है। इस्लाम महिलाओं को अनमोल मानता है, जैसे कोई कीमती गहना हो। इस्लाम ने महिलाओं को सम्मान और गरिमा दी है। बुर्के का मतलब किसी महिला को पिंजरे में बंद पक्षी की तरह घर में कैद करना नहीं है। लोग कहते हैं कि बुर्के से कट्टरता बढ़ती है, लेकिन असल में यह उनकी अपनी सोच को दिखाता है। यह न तो इस्लामी विचारधारा का मुद्दा है और न ही बुर्के का।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मिलान में अपनी पार्टी 'ब्रदर्स ऑफ इटली' के युवा विंग के एक कार्यक्रम में स्कूलों में बुर्के और नकाब पर बैन लगाने की बात कही थी। इसके बाद इस मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। भारत में AIMPLB की ओर से भी इस फैसले का विरोध किया गया है। लखनऊ में बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने मेलोनी के इस कदम पर अपनी आपत्ति जताई और उनसे फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की।
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि इटली की प्रधानमंत्री ने ऐलान किया है कि वो स्कूलों में हिजाब बैन का प्रस्ताव लाएंगे। ये धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ है। उन्होंने आगे कहा कि ये देश खासकर पश्चिमी दुनिया, जो दावा करते हैं कि वो अपने नागरिकों को हर तरह की आजादी देते हैं, ये इस बात का उदाहरण है कि ये देश कैसे दोहरा रवैया अपना रहे हैं।