लखनऊ

Lucknow AQI: खराब श्रेणी में पहुंची राजधानी की हवा, जानें किस इलाके में कितना AQI

Lucknow Air Quality Update: लखनऊ में ठंड बढ़ते ही वायु प्रदूषण की समस्या तेज होती जा रही है। राजधानी के कुछ क्षेत्रों में AQI 300 के पार पहुँच गया है, जिससे हवा “खराब” श्रेणी में दर्ज हुई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें लालबाग और तालकटोरा में निरीक्षण कर प्रदूषण स्रोतों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।

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Oct 26, 2025
लबाग में हवा अलर्ट, तालकटोरा में भी प्रदूषण तेजी से बढ़ा (फोटो सोर्स : AI)

Lucknow Air Quality Worsens: ठंडी हवा के साथ धीरे-धीरे राजधानी के कुछ हिस्सों में वायु गुणवत्ता घातक स्तर की ओर बढ़ती दिख रही है। शनिवार को लालबाग और तालकटोरा क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) तीसरे सौ अंक को पार कर गया. यह “खराब” श्रेणी में आता है। स्थानीय निवासी सुबह-सुबह घनभूत कोहरे और धुंध की शिकायत कर रहे हैं। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की क्षेत्रीय टीम ने स्थिति का निरीक्षण किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही तापमान गिरना शुरू हुआ है, हवा में प्रदूषकों का घनत्व बढ़ने लगा है,उद्योग, वाहन तथा धूल-उड़ान सहित विविध स्रोतों से बढ़ती पारदुषित हवा अब नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम बन रही है।

प्रमुख निरीक्षण 

शनिवार को आयोजित निरीक्षण के दौरान उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) की टीम ने लालबाग क्षेत्र में वाहन मरम्मत कार्यों और धुएँ निकलने वाले स्रोतों को चिन्हित किया। टीम ने पाया कि हवा गुणवत्ता यंत्र के समीप ही वाहन मरम्मत कार्य हो रहे थे, जिससे धुआँ सीधे वातावरण में मिल रहा था। इस पर बोर्ड ने संबंधित कार्यस्थलों को चेतावनी दी है। तालकटोरा इंडस्ट्रियल एरिया में भी AQI दुर्लक्षित स्तर की ओर बढ़ रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि औद्योगिक गतिविधियों और वाहनों का मिश्रण हवा को भारी बना रहा है।

हवा की वर्तमान स्थिति (प्रमुख स्थानों के अनुसार)

क्षेत्रAQI
श्रेणी
तालकटोरा190संतोषजनक
अलीगंज212खराब
लालबाग294
खराब (300 के पास)
गोमती नगर106संतोषजनक
अम्बेडकर विश्वविद्यालय105संतोषजनक
कुकरैल118संतोषजनक

इस सूची से स्पष्ट है कि राजधानी के सभी क्षेत्र एक-समान नहीं, बल्कि कुछ हिस्सों में वायु गुणवत्ता तेजी से बिगड़ रही है।

क्यों बढ़ा प्रदूषण स्तर

  • विश्लेषकों के अनुसार निम्न कारण इस बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार हैं:
  • तापमान में गिरावट: ठंडी हवा के कारण वायुमंडलीय मिश्रण धीमा पड़ जाता है; प्रदूषक नीचे जमा हो जाते हैं।
  • वाहन व उद्योग उत्सर्जन: खुले-आम वाहन मरम्मत कार्य, इंडस्ट्रियल धुआँ और निर्माण-धूल मुख्य स्रोत बने हैं।
  • हवा का प्रवाह कम होना: कम हवा और ठहराव के कारण धूल व पीएम 2.5 कण फैल नहीं पाते।
  • स्थानीय निगरानी व रोकथाम की कमी: कुछ हॉट स्पॉट्स पर पर्याप्त नियंत्रण व निरीक्षण न होना समस्या बढ़ा रहा है।
  • उदाहरण के तौर पर, एक अध्ययन में बताया गया कि लखनऊ में बड़े ट्रैफिक पॉइंट्स एवं उद्योगों के निकट वायु प्रदूषण अधिक पाया गया है।

प्रशासनिक कदम

AQI “खराब” श्रेणी तक पहुंचने के बाद, बोर्ड ने दो-दो टीमों का गठन किया है। क्षेत्रीय अधिकारी जेपी मौर्य ने बताया कि सहायक अभियंता विनोद सोनकर की अगुवाई में टीम ने लालबाग क्षेत्र में वाहन मरम्मत कार्यों की निगरानी की। उन्होंने संबंधित दुकानों को निर्देश दिए हैं कि इन कार्यों को अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए; नहीं तो कार्रवाई होगी। इसके अलावा हॉट स्पॉट क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें प्राथमिक नियंत्रण में लाने की योजना बनाई जा रही है।

नागरिकों को चेतावनी और सुझाव

जब AQI “खराब” श्रेणी में हो, तब निम्न सावधानियां आवश्यक हो जाती हैं:

  • सुबह-सवेरे व शाम के समय बाहर निकलते समय मास्क पहनें।
  • सांस की समस्या वाले, बुजुर्ग व बच्चों को बाहरी गतिविधियां कम करनी चाहिए।
  • घर-घर में वायु शुद्धिकरण या कम-से-कम खिड़कियाँ बंद रखने की सलाह है।
  • वाहन प्रयोग कम करें, सार्वजनिक-परिवहन व कार–पूलिंग को प्राथमिकता दें।
  • निर्माण-धूल एवं जलते कचरे पर कटाक्ष करें-इनसे पीएम2.5 कण बढ़ते हैं।

आगे क्या देखने को है

राजधानी का वायुमान अगले दिन-दो दिन में इन पहलुओं पर भी निर्भर होगा:

  • तापमान कितनी तेजी से नीचे जाता है।
  • हवा का प्रवाह कितना होगा।
  • क्या लोक-निर्माण व वाहन मरम्मत गतिविधियों पर नियंत्रण बढ़ेगा।
  • क्या प्रशासन द्वारा ठोस-कार्रवाई की जाएगी।
  • यदि तापमान और हवा-गति नियंत्रण में नहीं आई तो अगले कुछ दिनों में AQI “बहुत खराब” या “गंभीर” श्रेणी तक पहुँच सकता है।

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