
Railway Crime: रेलवे मार्ग के जरिए होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में जीआरपी ने कार्रवाई करते हुए करीब 2 करोड़ 49 लाख 97 हजार 500 रुपये मूल्य के नशीले पदार्थों को नष्ट कर दिया। जीआरपी अनुभाग लखनऊ की ओर से 'ऑपरेशन दहन' अभियान के तहत विभिन्न जनपदों में दर्ज 34 एनडीपीएस (NDPS) मामलों में जब्त मादक पदार्थों का नियमानुसार भस्मीकरण कराया गया।
जीआरपी अधिकारियों के अनुसार, नष्ट किए गए मादक पदार्थ अलग-अलग समय पर दर्ज 34 एनडीपीएस मामलों में बरामद किए गए थे। इन मामलों की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तथा सक्षम न्यायालय एवं संबंधित प्राधिकरण से अनुमति मिलने के बाद जब्त माल के निस्तारण की कार्रवाई की गई। इस प्रक्रिया के तहत विभिन्न रेलवे थाना क्षेत्रों से सुरक्षित तरीके से जब्त मादक पदार्थों को लखनऊ लाया गया और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए भस्मक भट्टी में नष्ट किया गया। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराई गई और आवश्यक दस्तावेजी औपचारिकताएं भी पूरी की गईं।
ऑपरेशन के दौरान कुल 26.323 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए। इनमें 20.750 किलोग्राम गांजा, 2 किलोग्राम डोडा, 1.148 किलोग्राम स्मैक (हीरोइन) तथा अन्य श्रेणी के 2.425 किलोग्राम मादक पदार्थ शामिल रहे। अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन सभी मादक पदार्थों की अनुमानित कीमत 2 करोड़ 49 लाख 97 हजार 500 रुपये आंकी गई है। इतनी बड़ी मात्रा में जब्त नशीले पदार्थों का निस्तारण यह दर्शाता है कि रेलवे पुलिस लगातार नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और उनके नेटवर्क को कमजोर करने का प्रयास जारी है।
जीआरपी लखनऊ के मुताबिक, नष्ट किया गया मादक पदार्थ अलग-अलग रेलवे थाना क्षेत्रों से संबंधित था। इनमें बाराबंकी, अयोध्या कैंट, प्रतापगढ़, हरदोई और लखीमपुर रेलवे थानों में दर्ज मामलों में जब्त माल शामिल था। इन सभी थानों में जब्त किए गए मादक पदार्थों को सुरक्षा व्यवस्था के बीच लखनऊ लाया गया। इसके बाद डीडीसी (Drug Disposal Committee) की निगरानी में सभी नमूनों का मिलान किया गया और नियमानुसार उन्हें भस्मक भट्टी में नष्ट किया गया।
नशीले पदार्थों के निस्तारण की पूरी प्रक्रिया वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में संपन्न हुई। इस दौरान एसपी रेलवे रोहित मिश्रा स्वयं मौजूद रहे। उनके साथ दो पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) तथा डीडीसी समिति के सदस्य भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने पहले जब्त माल का सत्यापन किया, उसके बाद निर्धारित मानकों के अनुरूप भस्मीकरण की कार्रवाई कराई गई। पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ पूरी की गई ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद या कानूनी प्रश्न न उठे।
रेलवे पुलिस का कहना है कि 'ऑपरेशन दहन' केवल जब्त मादक पदार्थों को नष्ट करने की औपचारिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ सख्त संदेश देना भी है। रेलवे मार्ग लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्रमुख माध्यमों में शामिल रहा है। ऐसे में जीआरपी लगातार ट्रेनों, रेलवे स्टेशनों और संदिग्ध यात्रियों पर विशेष निगरानी रख रही है। समय-समय पर चलाए जाने वाले विशेष अभियानों के माध्यम से नशीले पदार्थों की बरामदगी और तस्करों की गिरफ्तारी की कार्रवाई जारी है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने से युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने में मदद मिलेगी। उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर रेलवे पुलिस लगातार एनडीपीएस अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई कर रही है। लखनऊ सोशल एक्टिविस्ट अनुराग का कहना है कि मादक पदार्थों का समयबद्ध निस्तारण भी उतना ही जरूरी है जितनी उनकी बरामदगी। इससे जब्त माल के सुरक्षित संरक्षण, रिकॉर्ड प्रबंधन और कानूनी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है।
जीआरपी अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में रेलवे स्टेशनों, प्लेटफॉर्म, पार्सल कार्यालयों और ट्रेनों में निगरानी और अधिक सख्त की जाएगी। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी निगरानी और विशेष चेकिंग अभियान भी जारी रहेंगे। अधिकारियों ने यात्रियों से भी अपील की है कि यदि उन्हें रेलवे परिसर या ट्रेन में किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तत्काल रेलवे पुलिस को सूचना दें। जन सहयोग से ही नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
करीब ढाई करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थों का निस्तारण यह दर्शाता है कि रेलवे पुलिस नशे के कारोबार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। 'ऑपरेशन दहन' के माध्यम से एक ओर जहां वर्षों से लंबित जब्त मादक पदार्थों का नियमानुसार निस्तारण किया गया, वहीं दूसरी ओर तस्करों को यह स्पष्ट संदेश भी दिया गया कि कानून के शिकंजे से बच पाना आसान नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी इस तरह के अभियान नियमित रूप से जारी रहेंगे, ताकि रेलवे नेटवर्क को नशा तस्करी से मुक्त और यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।