
शक्तिभवन पर धरने को जुटे संविदाकर्मी (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
Outsourcing Employees: उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) में कार्यरत संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने के प्रस्ताव को लेकर विरोध शुरू हो गया है। यूपीपीसीएल में 114 संविदा कर्मचारियों में से 25 प्रतिशत यानी 29 कर्मचारियों को सेवा से हटाने के फैसले पर उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग एवं संविदा कर्मचारी संघ ने आपत्ति जताई है। संघ ने प्रबंधन से निर्णय पर पुनर्विचार करने और कर्मचारियों को सेवा से न हटाने की मांग की है। अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी लखनऊ स्थित शक्ति भवन के गेट नंबर तीन पर धरना देने के लिए पहुंचे।
संघ का कहना है कि प्रस्तावित कार्रवाई की जद में आने वाले कर्मचारी यूपीपीसीएल और उससे संबंधित कार्यालयों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं। इन कर्मचारियों में कंप्यूटर ऑपरेटर, अनुसेवक, कार्यालय सहायक और लेखाकार के तौर पर काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं। संघ के मुताबिक कर्मचारियों ने वर्षों के दौरान विभागीय कामकाज की प्रक्रिया, रिकॉर्ड व्यवस्था और कार्यालयीय कार्यों का अनुभव हासिल किया है। संघ का तर्क है कि लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को अचानक सेवा से हटाए जाने से उनके सामने रोजगार का संकट पैदा होगा। संगठन ने प्रबंधन से कर्मचारियों की सेवा अवधि और उनके अनुभव को ध्यान में रखते हुए निर्णय पर दोबारा विचार करने की अपील की है।
कर्मचारी संघ के मुताबिक यूपीपीसीएल में कुल 114 संविदा या आउटसोर्सिंग कर्मचारी कार्यरत हैं और इनमें से करीब 25 प्रतिशत कर्मचारियों को हटाने का निर्णय लिया गया है। संख्या के लिहाज से यह 29 कर्मचारियों के बराबर है। संघ ने इस प्रस्ताव को लेकर प्रबंध निदेशक के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराने और निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है। संघ का कहना है कि जिन कर्मचारियों को हटाने की बात कही जा रही है, उनमें से कई लंबे समय से अपने-अपने पदों की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। ऐसे में उनकी जगह नए कर्मचारियों की व्यवस्था करने की स्थिति में विभाग को फिर से प्रशिक्षण और कार्यप्रणाली समझाने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि इस संबंध में अंतिम प्रशासनिक निर्णय और उसके कारण प्रबंधन की ओर से स्पष्ट किए जाने बाकी हैं।
मांगों को लेकर कर्मचारी राजधानी के शक्ति भवन की ओर पहुंचे। संघ से जुड़े कर्मचारियों ने गेट नंबर तीन पर धरना देने की तैयारी की। कर्मचारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य प्रबंधन तक अपनी बात पहुंचाना और सेवा समाप्ति के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग करना है। धरने के दौरान कर्मचारियों ने अपनी सेवा, अनुभव और रोजगार से जुड़े मुद्दों को उठाने की बात कही। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से विभागीय व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं और अचानक सेवा समाप्त होने की स्थिति में उनके परिवारों के सामने भी आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग एवं संविदा कर्मचारी संघ ने यूपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। संघ ने कहा है कि कर्मचारियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। संगठन की ओर से प्रबंधन से मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की गई है। संघ का कहना है कि कर्मचारियों ने विभागीय कामकाज में अपनी सेवाएं दी हैं और उनके अनुभव का इस्तेमाल संस्थान के काम में होता रहा है। ऐसे में सेवा समाप्त करने के बजाय किसी वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। संघ ने कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने के लिए प्रबंधन स्तर पर वार्ता की मांग भी उठाई है।
संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए सेवा समाप्त होने का सीधा असर रोजगार पर पड़ता है। संघ का कहना है कि जिन 29 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने की बात सामने आई है, उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी इससे प्रभावित हो सकती है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं और अब अचानक सेवा समाप्त होने की स्थिति उनके लिए कठिन होगी। संघ ने इसी आधार पर प्रबंधन से कर्मचारियों की सेवा अवधि, कार्य अनुभव और विभाग में उनकी भूमिका को ध्यान में रखने की अपील की है। संगठन का कहना है कि निर्णय लेते समय कर्मचारियों के हितों और विभागीय जरूरतों के बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए।
प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर कर्मचारियों के बीच इसलिए भी चिंता है क्योंकि अलग-अलग पदों पर काम कर रहे लोगों की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। संघ के मुताबिक कंप्यूटर ऑपरेटर, अनुसेवक, कार्यालय सहायक और लेखाकार जैसे पदों पर कर्मचारी लंबे समय से काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों का काम कार्यालयों में रिकॉर्ड तैयार करने, कंप्यूटर संबंधी कार्य, दस्तावेजों के रखरखाव और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़ा रहा है। संघ का कहना है कि इन पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों को विभाग की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव है। इसी अनुभव को आधार बनाकर संगठन सेवा समाप्ति के फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहा है।
फिलहाल कर्मचारियों की मांगों और प्रबंधन के रुख पर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। संघ ने स्पष्ट किया है कि वह कर्मचारियों की सेवा बचाने के लिए अपनी मांग प्रबंधन के सामने रखेगा। कर्मचारियों की ओर से प्रबंध निदेशक से मामले में बातचीत और पुनर्विचार की उम्मीद जताई गई है। अब यह देखना होगा कि यूपीपीसीएल प्रबंधन कर्मचारियों की मांग पर क्या निर्णय लेता है। यदि प्रबंधन और कर्मचारी संगठन के बीच वार्ता होती है तो सेवा समाप्ति के प्रस्ताव, कर्मचारियों की संख्या और उनकी भूमिका को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
कर्मचारी संगठन का मुख्य जोर 29 संविदा कर्मियों को सेवा से हटाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार कराने पर है। संघ ने कहा है कि कर्मचारियों के लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें सेवा में बनाए रखने का रास्ता तलाशा जाना चाहिए। संगठन ने प्रबंधन से मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। शक्ति भवन गेट नंबर तीन पर कर्मचारियों का जुटना इस मुद्दे को लेकर उनके विरोध को सामने लाता है। अब कर्मचारियों की निगाहें प्रबंधन की अगली कार्रवाई और वार्ता पर हैं। वहीं, सेवा समाप्ति के प्रस्ताव को लेकर यूपीपीसीएल की ओर से विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और साफ हो सकेगी।
Updated on:
22 Sept 2026 12:24 pm
Published on:
22 Sept 2026 12:24 pm
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