लखनऊ

सीएम योगी ने इस विशाल मंदिर का किया उद्घाटन, तुरंत हुआ बड़ा चमत्कार, अचानक बोलने लगे भोलेनाथ

बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन रहे मौजूदसात साल से चल रहा मंदिर के सौंदर्यीकरण का काम प्राचीन कोनेश्वर मंदिर में भगवान भोलेनाथ दे रहे जल और ऊर्जा संरक्षण का संदेश
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Feb 27, 2020
सीएम योगी ने इस विशाल मंदिर का किया उद्घाटन, तुरंत हुआ बड़ा चमत्कार, अचानक बोलने लगे भोलेनाथ
सीएम योगी ने इस विशाल मंदिर का किया उद्घाटन, तुरंत हुआ बड़ा चमत्कार, अचानक बोलने लगे भोलेनाथ

लखनऊ. सात साल से सौंदर्यीकरण होने के बाद गुरुवार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के प्राचीन शिव मंदिर कोनेश्वर महादेव का उद्घाटन किया। इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ जल और ऊर्जा संरक्षण का संदेश देंगे। साथ ही भूजल स्तर बढ़ाने के लिए इस मंदिर में देवताओं पर चढ़े जल को शुद्ध कर उसे भूमि में पहुंचाया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चौक में कोनेश्वर मंदिर का शुभारंभ किया। इस मौके पर साथ में बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन भी मौजूद रहे। उन्होंने इस मौके पर भगवान भोलेनाथ का पूजन भी किया। प्रदेश के नगर विकास मंत्री और श्री कोनेश्वर महादेव मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष आशुतोष टंडन ‘गोपालजी’ ने बताया कि 12 फरवरी, 2013 से मंदिर के सौंदर्यीकरण का काम चल रहा था। नवीनीकरण के बाद यहां भगवान भोलेनाथ जल और ऊर्जा संरक्षण का संदेश देंगे। साथ ही भूजल स्तर बढ़ाने के लिए देवताओं पर चढे़ दूध, दही, जल को जलशोधन यंत्र के जरिये अलग-अलग कर जल को भूमि के भीतर पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा वर्षा जल का संचयन की भी व्यवस्था की गई है। साथ ही मंदिर परिसर में सौर ऊर्जा का 15 किलोवाट प्लांट भी स्थापित किया गया है।

‘गोपालजी’ ने बताया कि प्रथम तल पर संत निवास, सत्संग भवन, पवित्र रसोई, पुजारी निवास, भक्तजनों के लिए आवश्यक सुविधाओं का इंतजाम किया गया है। भूतल पर औषधालय, स्वागत कक्ष, भगवान के तमाम स्वरूप, प्रतिमाएं हैं। माता अन्नपूर्णा, मां विंध्यवासिनी, संतोषी माता, हनुमान जी, राम दरबार, राधाकृष्ण, तिरुपति बालाजी, भगवान शंकर, माता पार्वती, नंदी जी, भगवान गणेश, नरसिंह भगवान, देवी सरस्वती की प्रतिमाएं प्राण प्रतिष्ठा के साथ स्थापित की गई हैं। मंदिर में चढ़ने वाले फूलों से अगरबत्ती बनाने का उपक्रम भी है।

नगर के प्राचीन शिव मंदिरों में से एक है चौक स्थित कोनेश्वर महादेव मंदिर। माना जाता है कि ये मंदिर रामायण कालीन है। बताया जाता है कि कौंडिल्य ऋषि ने गोमा नदी के किनारे भगवान को स्थापित किया। तब गोमा इसके पास से ही गुजरती थी। भगवान को यहां कई बार बीच में स्थापित करने का प्रयास किया गया, लेकिन ये अपने आप ही रात में सरक कर अपनी पुरानी जगह पर आ जाती थी। ऐसा लगातार कई दिन तक चला।

उसके बाद एक दिन ऋषि को स्वप्न में खुद भगवान ने उनकी कोने में ही रहने की मंशा बताई तब से कोनेश्वर महादेव वहीं विराजमान है। कालांतर में नदी और दूर हुई। यहां हर महाशिवरात्रि, सावन के सोमवारों पर पुष्प की पंखुड़ियों का शृंगार सबसे अनोखा होता है। शिवरात्रि पर मेला लगता है। सावन भर यहां ब्राह्मणों का दल विशेष पाठ करता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोपाल जी ने सात हजार वर्ष से पुराने मंदिर को भव्य रूप देने का काम किया है। गोपाल जी ने 2013 से इस कार्य को प्रारंभ किया और उसके बाद ही ये विधायक बन गए है। एक बात को लेकर हमेशा ये कहा जाता है की मंदिर को साफ सफाई का ध्यान नहीं रखते है, लेकिन इस मंदिर में ऐसा सुनने को नही मिलेगा। शहरों की सबसे बड़ी समस्या है शहरी कूड़ा हर जगह अगर कूड़े को निस्तारण करने की सुविधाएं हो जाए तो कूड़ा एकत्रित नही होने पाएगा। मंदिर का उदाहरण मोहल्ले और शहरों में भी उतारा जा सकता है।

Updated on:
27 Feb 2020 07:46 pm
Published on:
27 Feb 2020 07:46 pm
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