लखनऊ

CM योगी ने सौंपी थीं चाबियां, मुख्तार अंसारी से मुक्त कराई जमीन पर बने फ्लैटों को अब अवैध बता रहा सिंचाई विभाग

Sardar Patel Awas Yojana: लखनऊ की सरदार पटेल आवासीय योजना विवादों में घिर गई है। सिंचाई विभाग ने फ्लैटों को अपनी जमीन पर अवैध निर्माण बताते हुए नोटिस जारी कर 7 दिन में कब्जा हटाने की चेतावनी दी है।

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Jun 18, 2026
72 परिवारों का सपना संकट में! मुख्तार अंसारी की कब्जामुक्त जमीन पर बने फ्लैटों को नोटिस (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
LDA के फ्लैटों को सिंचाई विभाग ने भेजा नोटिस (फोटो- पत्रिका)

Lucknow LDA Housing Scheme: राजधानी लखनऊ की चर्चित सरदार पटेल आवासीय योजना एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला किसी नए आवंटन या विकास कार्य का नहीं, बल्कि जमीन के स्वामित्व को लेकर उठे विवाद का है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) द्वारा विकसित इस आवासीय योजना के फ्लैटों पर सिंचाई विभाग ने नोटिस चस्पा कर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

विभाग ने दावा किया है कि जिन फ्लैटों का निर्माण किया गया है, वह उसकी भूमि पर अवैध रूप से किया गया है। नोटिस में आवंटियों को सात दिनों के भीतर कब्जा हटाने का अल्टीमेटम दिया गया है, जिससे फ्लैट धारकों के बीच चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसी योजना के फ्लैटों की चाबियां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं लाभार्थियों को सौंपी थीं। ऐसे में अब सरकारी विभागों के बीच भूमि स्वामित्व को लेकर शुरू हुआ विवाद चर्चा का विषय बन गया है।

सिंचाई विभाग ने जताई आपत्ति

जानकारी के अनुसार सिंचाई विभाग ने सरदार पटेल आवासीय योजना के अंतिम छोर पर स्थित फ्लैट पर नोटिस चस्पा किया है। विभाग का कहना है कि संबंधित भूमि उसकी संपत्ति है और उस पर बिना वैधानिक अनुमति के निर्माण किया गया है। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि सात दिनों के भीतर कब्जा नहीं हटाया गया तो विभाग नियमानुसार कार्रवाई करेगा।

साथ ही यह भी कहा गया है कि निर्धारित समय सीमा के बाद यदि किसी प्रकार का नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं आवंटी की होगी। विभाग ने यह भी उल्लेख किया है कि अवैध कब्जा नहीं हटाने की स्थिति में हर्जा-खर्चा और समन शुल्क भी संबंधित पक्षों से वसूला जाएगा।

 LDA  और सिंचाई विभाग आमने-सामने

इस पूरे मामले ने दो सरकारी संस्थाओं को आमने-सामने ला खड़ा किया है। एक ओर  LDA  का दावा है कि उसने सभी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए योजना विकसित की है, वहीं दूसरी ओर सिंचाई विभाग भूमि पर अपना अधिकार जता रहा है।

भूमि स्वामित्व को लेकर दोनों विभागों के बीच विवाद अब सार्वजनिक रूप से सामने आ गया है। इस विवाद का सीधा असर उन 72 परिवारों पर पड़ सकता है जिन्हें योजना के तहत फ्लैट आवंटित किए गए थे। आवंटियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि दो सरकारी विभाग ही भूमि को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं तो उनकी स्थिति क्या होगी।

मुख्तार अंसारी से जुड़ी भूमि का भी जिक्र

सरदार पटेल आवासीय योजना उस जमीन पर विकसित की गई है जिसे पहले बाहुबली और पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी से जुड़ा बताया जाता रहा है। सरकार द्वारा कब्जा मुक्त कराई गई भूमि पर बाद में एलडीए ने इस आवासीय परियोजना को विकसित किया था।

सरकार ने इस परियोजना को गरीब और मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए आवास उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था। यही कारण था कि योजना को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला और बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए।

हजारों लोगों ने दिखाई थी रुचि

 LDA  की इस योजना के लिए जब आवेदन प्रक्रिया शुरू हुई थी तब लोगों का जबरदस्त रुझान देखने को मिला था। महज 72 फ्लैटों के लिए करीब 8 हजार लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। इससे स्पष्ट था कि राजधानी में सस्ते और सुविधाजनक आवास की मांग कितनी अधिक है।

बाद में नवंबर 2025 में लॉटरी प्रणाली के माध्यम से 72 पात्र लाभार्थियों का चयन किया गया। चयनित लोगों में खुशी का माहौल था क्योंकि उन्हें राजधानी के प्रमुख इलाके में अपेक्षाकृत कम कीमत पर आवास उपलब्ध हुआ था।

सीएम योगी ने सौंपी थीं चाबियां

योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि 4 नवंबर को आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं लाभार्थियों को फ्लैटों की चाबियां सौंपी थीं। उस समय इसे सरकार की उपलब्धि और गरीबों के लिए बड़ी सौगात के रूप में प्रस्तुत किया गया था। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रदेश में आवासीय सुविधाओं के विस्तार और गरीबों को सम्मानजनक जीवन देने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। लेकिन कुछ महीनों बाद ही योजना विवादों में घिर जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।

2,314 वर्ग मीटर भूमि पर बना है प्रोजेक्ट

जानकारी के अनुसार सरदार पटेल आवासीय योजना करीब 2,314 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में विकसित की गई है। योजना में निर्मित प्रत्येक फ्लैट की कीमत लगभग 10.70 लाख रुपये निर्धारित की गई थी। यह कीमत राजधानी लखनऊ के लिहाज से काफी किफायती मानी गई थी। हजरतगंज, सिकंदरबाग और डाली बाग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के नजदीक होने के कारण इस योजना की मांग और अधिक बढ़ गई थी। बंधा रोड पर स्थित यह परियोजना राजधानी के प्रमुख आवासीय क्षेत्रों में शामिल मानी जाती है।

आवंटियों में बढ़ी चिंता

सिंचाई विभाग का नोटिस सामने आने के बाद सबसे अधिक चिंता उन लोगों में देखी जा रही है जिन्होंने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर फ्लैट खरीदे हैं। कई लाभार्थी अब यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर भूमि विवाद के लिए जिम्मेदार कौन है और उनके हितों की रक्षा कैसे होगी। आवंटियों का कहना है कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया के तहत आवेदन किया, लॉटरी में चयनित हुए और सरकारी एजेंसी द्वारा आवंटन प्राप्त किया। ऐसे में यदि भूमि को लेकर कोई विवाद है तो उसका समाधान संबंधित विभागों को करना चाहिए, न कि आम नागरिकों को परेशान किया जाना चाहिए।

कानूनी और प्रशासनिक सवाल खड़े

यह पूरा मामला प्रशासनिक समन्वय और भूमि अभिलेखों की स्थिति पर भी सवाल खड़े कर रहा है। यदि भूमि वास्तव में सिंचाई विभाग की थी तो निर्माण कार्य शुरू होने से पहले यह विवाद क्यों नहीं सामने आया? और यदि  LDA  के पास भूमि विकास का अधिकार था तो फिर सिंचाई विभाग की आपत्ति का आधार क्या है? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही स्पष्ट हो पाएंगे। फिलहाल दोनों विभागों की ओर से आधिकारिक स्थिति का इंतजार किया जा रहा है।

नजरें सरकार के अगले कदम पर

सरदार पटेल आवासीय योजना से जुड़ा यह विवाद अब केवल भूमि स्वामित्व का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सैकड़ों लोगों की उम्मीदों और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता से भी जुड़ गया है। आवंटी चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करे और उनके हितों की रक्षा सुनिश्चित करे।

फिलहाल सिंचाई विभाग के नोटिस ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि LDA, सिंचाई विभाग और राज्य सरकार इस विवाद का समाधान किस प्रकार निकालते हैं तथा फ्लैट आवंटियों को राहत मिलती है या नहीं।