KGMU से जुड़े बहुचर्चित धर्मांतरण और यौन शोषण मामले में लखनऊ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जूनियर महिला डॉक्टर को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, गर्भपात और धर्म परिवर्तन कराने के आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक को 50 हजार के इनाम के साथ गिरफ्तार किया गया है।
KGMU Conversion Case: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े बहुचर्चित धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न प्रकरण में लखनऊ पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जूनियर महिला डॉक्टर को शादी का झांसा देकर बार-बार दुष्कर्म, बिना सहमति गर्भपात और जबरन धर्म परिवर्तन कराने के आरोपी डॉ. रमीज उद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वह लंबे समय से फरार चल रहा था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी को सर्विलांस सेल पश्चिमी जोन और थाना चौक पुलिस की संयुक्त टीम ने 09 जनवरी 2026 को दोपहर 14:40 बजे लखनऊ सिटी स्टेशन गेट के पास से गिरफ्तार किया। आरोपी उस समय अपने फ्लैट से सामान निकालने के लिए लखनऊ आया था, तभी मुखबिर और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए पुलिस ने उसे दबोच लिया।
पुलिस आयुक्त लखनऊ के निर्देश पर वांछित और इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। पश्चिमी जोन के पुलिस उपायुक्त विश्वजीत श्रीवास्तव, अपर पुलिस उपायुक्त धनन्जय सिंह कुशवाहा के निर्देशन और सहायक पुलिस आयुक्त राजकुमार सिंह के मार्गदर्शन में यह ऑपरेशन अंजाम दिया गया। थाना चौक प्रभारी निरीक्षक नागेश उपाध्याय के नेतृत्व में सर्विलांस सेल और थाना चौक पुलिस की टीम ने लगातार आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी। तकनीकी निगरानी और मुखबिर की सूचना के आधार पर सटीक रणनीति बनाकर उसे गिरफ्तार किया गया।
यह मामला 23 दिसंबर 2025 को सामने आया था, जब केजीएमयू की एमडी पैथोलॉजी की छात्रा ने थाना चौक में लिखित प्रार्थना पत्र दिया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके सीनियर डॉक्टर रमीज उद्दीन नायक उर्फ रमीज ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने न केवल उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया, बल्कि बिना उसकी सहमति के गर्भपात भी कराया और उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। पीड़िता का यह भी आरोप है कि आरोपी ने उसे मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया।
पीड़िता की शिकायत के आधार पर थाना चौक में मुकदमा संख्या 302/2025 दर्ज किया गया। इस मामले में आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 69, 89, 351(1), धारा 64(2)(ड) धारा 123, 61(2)(क), 115(2), 352 और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3/5(1) के तहत केस दर्ज किया गया।
विवेचना के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि आरोपी ने एक अन्य महिला मेडिकल छात्रा के साथ भी इसी तरह का अपराध किया था। उस मामले में भी दुष्कर्म, गर्भपात और धर्म परिवर्तन कराकर शादी कराने के आरोप सामने आए।
इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के परिजनों ने भी पीड़िता पर दबाव बनाकर उसे आरोपी के पुत्र से निकाह कराने का प्रयास किया। इसके आधार पर पुलिस ने मामले में आरोपी के परिजनों और अन्य सहयोगियों के खिलाफ भी धाराएं बढ़ाईं।
पुलिस ने इससे पहले 05 जनवरी 2026 को सलीमुद्दीन (पिता),खतीजा (माता) को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इनके अलावा शारिक खान और सैय्यद जाहिद हसन के नाम भी इस मामले में सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच जारी है।
मुख्य आरोपी रमीज मलिक काफी शातिर किस्म का अपराधी बताया जा रहा है। मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही वह लगातार फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी न होने पर संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) द्वारा उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था और डिजिटल ट्रैक से बचने की कोशिश कर रहा था।
इस मामले ने केजीएमयू जैसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान में महिला सुरक्षा और आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्राओं और महिला डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर भी बहस तेज हो गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे आरोपी किसी भी पद या पेशे से जुड़ा हो।